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Sheetali Pranayama: गर्मी में ठंडक देगा शीतली प्राणायाम, जानें अभ्यास का सही तरीका और फायदे

Thu, 16 Apr 2026 10:32 AM IST
Shivani Awasthi लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला

सार

Sheetali Pranayama ke Fayde: शीतली प्राणायाम एक योगिक श्वास तकनीक है जो शरीर को ठंडक पहुंचाने, तनाव कम करने और मानसिक शांति देने में मदद करती है। इसे जीभ को मोड़कर सांस लेने और नाक से छोड़ने के तरीके से किया जाता है।
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शीतली प्राणायाम - फोटो : AI

Sheetali Pranayama Kaise Karen: आज की तेज़ भागदौड़ भरी जिंदगी में तनाव, गर्मी और मानसिक थकान आम समस्या बन गई है। ऐसे में अगर आपको एक ऐसा आसान तरीका मिल जाए जो कुछ ही मिनटों में आपके शरीर और दिमाग को ठंडक और सुकून दे, तो कैसा रहेगा? यही काम करता है शीतली प्राणायाम।

शीतली प्राणायाम एक प्राचीन योग तकनीक है, जिसे खासतौर पर शरीर की गर्मी को कम करने और मन को शांत करने के लिए किया जाता है। गर्मियों में यह प्राणायाम किसी प्राकृतिक एयर कंडीशनर की तरह काम करता है।
इसकी सबसे खास बात यह है कि इसे करने के लिए आपको किसी विशेष उपकरण या ज्यादा समय की जरूरत नहीं होती। सिर्फ 5–10 मिनट का अभ्यास आपको ताजगी और ऊर्जा से भर सकता है।

आजकल बढ़ते तनाव, ब्लड प्रेशर और एंग्जायटी जैसी समस्याओं के बीच यह प्राणायाम बेहद फायदेमंद साबित हो रहा है। अगर आप भी अपने दिन की शुरुआत एक शांत और ठंडे दिमाग से करना चाहते हैं, तो शीतली प्राणायाम आपके लिए एक बेहतरीन विकल्प हो सकता है।

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शीतली प्राणायाम - फोटो : Amar Ujala

शीतली प्राणायाम क्या है?

शीतली प्राणायाम एक ऐसी योगिक श्वास तकनीक है जो शरीर के तापमान को नियंत्रित करती है और मन को शांत करती है। शीतली का अर्थ है ठंडक, और यह प्राणायाम उसी नाम के अनुसार शरीर को ठंडा करने का काम करता है।

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योग - फोटो : Adobe Stock

शीतली प्राणायाम के फायदे

इस प्राणायाम के कई स्वास्थ्य लाभ हैं।
 

  • यह शरीर की गर्मी को कम करता है।
  • तनाव और चिंता को घटाता है।
  • ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने में मदद करता है।
  • पाचन तंत्र को बेहतर बनाता है।
  • साथ ही यह त्वचा को भी स्वस्थ बनाए रखने में सहायक है।

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शीतली प्राणायाम - फोटो : इंस्टाग्राम

शीतली अभ्यास का सही तरीका

 
  • शांत जगह पर बैठें और अपनी रीढ़ सीधी रखें।
  • जीभ को बाहर निकालकर उसे नली की तरह मोड़ें।
  • अब धीरे-धीरे मुंह से सांस अंदर लें और नाक से बाहर छोड़ें।
  • इस प्रक्रिया को 5-10 मिनट तक दोहराएं।
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सांस की समस्या - फोटो : Adobe Stock

किन बातों का रखें ध्यान

इस प्राणायाम को बहुत ठंडे मौसम में नहीं करना चाहिए। जिन लोगों को सर्दी-जुकाम या अस्थमा की समस्या है, उन्हें डॉक्टर की सलाह लेकर ही इसका अभ्यास करना चाहिए।


कब और कितनी देर करें?

सुबह के समय या खाली पेट इसका अभ्यास करना सबसे अच्छा होता है। रोजाना 5 से 15 मिनट तक इसका अभ्यास करने से बेहतर परिणाम मिलते हैं।

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नोट: यह लेख योग विशेषज्ञों के सुझावों के आधार पर तैयार किया गया है। आसन की सही स्थिति के बारे में जानने के लिए किसी योग गुरु से संपर्क कर सकते हैं। गर्भावस्था में योग को लेकर डॉक्टर से सलाह जरूर ले लें।


अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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