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Shardiya Navratri 2025: मां दुर्गा के इन 9 गुणों में छिपा है खुशहाल परिवार और रिश्तों का राज

Tue, 09 Sep 2025 12:25 PM IST
शिवानी अवस्थी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Shardiya Navratri 2025 Divine Qualities: महिलाओं के लिए सिर्फ घर-परिवार की खुशहाली ही नहीं, बल्कि दफ्तर में काम करना और पदोन्नति हासिल करना भी आसान हो जाएगा। आइए जानते हैं दुर्गा माता के नौ स्वरूप और उनसे मिलने वाली सीख, जिन्हें हर महिला अपने जीवन में उतार सकती है।
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शारदीय नवरात्रि पर मां दुर्गा के नौ गुण अपनाएं - फोटो : Adobe
Shardiya Navratri 2025 Divine Qualities: शारदीय नवरात्रि 22 सितंबर 2025 से शुरू हो रही है। 9 दिवसीय शारदीय नवरात्रि माता दुर्गा के नौ स्वरूपों को समर्पित पर्व है। माता दुर्गा के नौ रूप शक्ति,  साहस, प्रेम, ज्ञान और करुणा का प्रतीक हैं। अगर हर महिला इन गुणों को अपने जीवन में अपनाए, तो न केवल परिवार खुशहाल बन सकता है, बल्कि रिश्तों में भी मजबूती आती है। इतना ही नहीं महिलाओं के लिए सिर्फ घर-परिवार की खुशहाली ही नहीं, बल्कि दफ्तर में काम करना और पदोन्नति हासिल करना भी आसान हो जाएगा। आइए जानते हैं दुर्गा माता के नौ स्वरूप और उनसे मिलने वाली सीख, जिन्हें हर महिला अपने जीवन में उतार सकती है।
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धैर्य और स्थिरता - फोटो : adobe stock
धैर्य और स्थिरता

नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है। मां शैलपुत्री हमें सिखाती हैं कि जीवन की हर परिस्थिति में धैर्य बनाए रखनाजरूरी है। घर और रिश्तों में स्थिरता तभी आती है जब महिला खुद संतुलन का आधार बने।
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त्याग और तपस्या - फोटो : Adobe stock
त्याग और तपस्या

मां दुर्गा का द्वितीय स्वरूप माता ब्रह्मचारिणी का गुण संयम और त्याग है। हर महिला जब अपने परिवार और रिश्तों के लिए निस्वार्थ भाव रखती है, तो घर में सुख-शांति और विश्वास बढ़ता है।

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साहस और सुरक्षा - फोटो : adobe stock
साहस और सुरक्षा

नवदुर्गा का तीसरा स्वरूप मां चंद्रघंटा का हैजो कि साहस और सुरक्षा का प्रतीक हैं। मां चंद्रघंटा का स्वरूप महिलाओं को सिखाता है कि उन्हें अपनी सुरक्षा और परिवार की रक्षा के लिए साहसी होना चाहिए। साहस रिश्तों में आत्मविश्वास लाता है।
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सकारात्मक ऊर्जा - फोटो : Adobe
सकारात्मक ऊर्जा

कूष्मांडा देवी सृष्टि की रचयिता हैं। वे हमें प्रेरित करती हैं कि महिला ही परिवार की ऊर्जा का स्रोत है। मुस्कान और सकारात्मक सोच रिश्तों को मजबूती देती है।
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मातृत्व और करुणा - फोटो : Adobe stock
मातृत्व और करुणा

मां स्कंदमाता का प्रेम और करुणा हर महिला में मातृत्व की भावना जगाता है। बच्चों और परिवार के प्रति यही करुणा रिश्तों को और मधुर बनाती है।
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साहस और न्याय - फोटो : Pexel
साहस और न्याय

नवरात्रि के छठे दिन मां कात्यायनी की पूजा की जाती है। माता कात्यायनी का रूप यह बताता है कि गलतियों और अन्याय के खिलाफ आवाज उठाना भी जरूरी है। रिश्तों में सच्चाई और न्याय ही स्थायी सुख का आधार है।

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निडरता और आत्मविश्वास - फोटो : Adobe
निडरता और आत्मविश्वास

मां कालरात्रि से सीख मिलती है कि हर महिला को जीवन की कठिन परिस्थितियों से निडर होकर सामना करना चाहिए। आत्मविश्वास से रिश्तों में मजबूती आती है और दफ्तर में भी बेहतर तरीके से कार्य किया जा सकता है।

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पवित्रता और सादगी - फोटो : Adobe stock
पवित्रता और सादगी

दुर्गा अष्टमी में माता महागौरी की पूजा होती है। महागौरी पवित्रता और सादगी की मिसाल हैं। उनसे महिलाएं सीख सकती हैं कि सादगी और पवित्रता ही रिश्तों में सबसे बड़ा आकर्षण है। सरलता से ही परिवार में स्थायी खुशी आती है।
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सहयोग और संतुलन - फोटो : istock
सहयोग और संतुलन

मां सिद्धिदात्री का गुण है सहयोग और संतुलन। वे सिखाती हैं कि जब महिला हर सदस्य का सहयोग करती है, तो परिवार में सामंजस्य और स्थिरता बनी रहती है। परिवार में सभी से सहयोग और घर व दफ्तर के काम में संतुलन बनाए रखने की कला महिलाओं को आनी चाहिए।
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