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Happy Marriage Tips: माता पार्वती से सीखें सुखी विवाह का मंत्र, ये टिप्स बनाएंगे शादीशुदा जीवन को स्वर्ग

Mon, 21 Jul 2025 02:25 PM IST
शिवानी अवस्थी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला

सार

माता पार्वती के जीवन से हमें यही सीख मिलती है कि एक सफल विवाह केवल प्यार नहीं, बल्कि समझ, त्याग, संवाद और आत्मसम्मान से चलता है। अगर आप इन बातों को अपने वैवाहिक जीवन में उतारेंगी, तो निश्चित रूप से आपका रिश्ता मजबूत और सुखी रहेगा।
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सावन - फोटो : Amar Ujala
Happy Marriage Advice: हिंदू धर्म में माता पार्वती को आदर्श पत्नी का प्रतीक माना जाता है। उनका भगवान शिव के प्रति प्रेम, समर्पण और धैर्य आज भी हर महिला के लिए प्रेरणादायक है। विवाह के बाद जीवन में आने वाली जिम्मेदारियों को कैसे संतुलित किया जाए, ये माता पार्वती के जीवन से सीखा जा सकता है। अगर आप होने वाली दुल्हन हैं, तो शादी से पहले इन 5 बातों को जानना और अपनाना आपके वैवाहिक जीवन को सुखद, संतुलित और मजबूत बना सकता है। माता पार्वती के जीवन से हमें यही सीख मिलती है कि एक सफल विवाह केवल प्यार नहीं, बल्कि समझ, त्याग, संवाद और आत्मसम्मान से चलता है। अगर आप इन बातों को अपने वैवाहिक जीवन में उतारेंगी, तो निश्चित रूप से आपका रिश्ता मजबूत और सुखी रहेगा।
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माता पार्वती के मंत्र - फोटो : Adobe stock
 माता पार्वती के जीवन से नई दुल्हन लें 5 जरूरी विवाह टिप्स

धैर्य और विश्वास रखें

हर रिश्ता समय मांगता है। अपने रिश्ते को लेकर माता पार्वती का धैर्या और विश्वास ही उनके और शिव जी के अटूट संबंध का प्रतीक है। माता पार्वती ने शिव जी को पाने के लिए वर्षों तपस्या की। आप भी माता पार्वती के इस गुण को अपनाएं। उनसे सीख लेकर अपने रिश्ते को समय दें, धैर्य रखें और अटूट रिश्ते के लिए एक-दूसरे पर विश्वास करना जरूर सीखें। 
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माता पार्वती से लें सुखी वैवाहिक जीवन के मंत्र - फोटो : adobe
पहचान के साथ सम्मान 

वैवाहिक जीवन में हर महिला को अपनी पहचान बनाए रखनी चाहिए, साथ ही साथी की पहचान का सम्मान करें। माता पार्वती ने भगवान शिव को पाने के लिए तपस्या की, लेकिन उन्होंने अपनी शक्ति और पहचान भी बनाए रखी। साथ ही भगवान शिव के स्वरूप का सम्मान किया। हर नई दुल्हन को उनसे सीख लेते हुए शादी के बाद खुद को खोने के बजाय, अपनी पहचान के साथ रिश्ता निभाना चाहिए और अपने साथी का सम्मान करना चाहिए।

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शिव पार्वती की प्रतिमा - फोटो : Instagram
संकट में साथ

सच्चा रिश्ता वही है जो संकट में भी साथ निभाएं। चाहे समुद्र मंथन हो या शिव के तांडव का समय, माता पार्वती हमेशा अपने पति के साथ रहीं। इससे सीख मिलती है कि सिर्फ अच्छे समय में नहीं, बल्कि कठिन समय में भी पति के साथ खड़ा रहना ही सच्चा जीवनसाथी होना है।
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माता पार्वती के गुण - फोटो : freepik
मौन नहीं, संवाद जरूरी

माता पार्वती ने हमेशा शिव जी से खुलकर बात की, जब भी कोई असहमति हुई। उनके रिश्ते से समझें कि शादी में बातचीत जरूरी है, मन में बात रखने से दूरी बढ़ती है।
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मां पार्वती और शिव जी - फोटो : Instagram
 त्याग करें, लेकिन आत्मसम्मान न खोएं

विवाह से बाद माता पार्वती ने बहुत त्याग किया, लेकिन कभी आत्म-सम्मान से समझौता नहीं किया। रिश्ते के लिए समझौता करें लेकिन खुद को न खोएं।
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