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Sawan 2024: सुखी पारिवारिक जीवन के लिए भगवान शिव से सीखनी चाहिए ये पांच बातें

Fri, 02 Aug 2024 10:02 AM IST
शिवानी अवस्थी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला

सार

माता पार्वती ने शिव जी को पति रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की तो वहीं शिव जी ने देवी सती के आत्मदाह करने पर तांडव किया था, जिससे दुनिया में प्रलय आ गई थी। माता पार्वती और भगवान शिव के इसी अटूट रिश्ते को हर शादीशुदा जोड़ा अपनाकर अपने जीवन में खुशहाली ला सकते हैं।
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सावन 2024 - फोटो : अमर उजाला
Sawan 2024 Relationship Tips: भगवान शिव गृहस्थ जीवन के देवता हैं। भगवान भोलेनाथ इकलौते ऐसे ईश्वर हैं, जिनके विवाह और बच्चों के बारे में पौराणिक कथाएं प्रचलित हैं। सावन मास में भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था। इस कारण सावन का महीना भगवान भोलेनाथ का सबसे प्रिय है। इस बार सावन 22 जुलाई से शुरू हो रहा है। मान्यता है कि सावन में उपवास करने से सुखी दाम्पत्य जीवन का आशीर्वाद मिलता है।

माता पार्वती और शिव जी के दाम्पत्य जीवन से हर जोड़ा सीख ले सकता है। माता पार्वती ने शिव जी को पति रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की तो वहीं शिव जी ने देवी सती के आत्मदाह करने पर तांडव किया था, जिससे दुनिया में प्रलय आ गई थी। माता पार्वती और भगवान शिव के इसी अटूट रिश्ते को हर शादीशुदा जोड़ा अपनाकर अपने जीवन में खुशहाली ला सकते हैं।
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सावन 2024 - फोटो : freepik
समानता का अधिकार

भगवान शिव को अर्धनारीश्वर कहा जाता है। अर्धनारीश्वर का अर्थ है, आधा पुरुष और आधी नारी। भगवान शिव के इस स्वरूप में आधा रूप उनका और आधा उनकी पत्नी माता पार्वती का है। इस स्वरूप को शादीशुदा लोगों का प्रतीक माना जाता है, जिसमें पति-पत्नी का शरीर भले ही अलग हो लेकिन दोनों का मन एक होता है।

पति-पत्नी के बीच विवाद की एक वजह खुद को बड़ा दिखाना है, लेकिन अगर आप सुखद वैवाहिक जीवन को जीना चाहते हैं तो भगवान शिव और मां पार्वती के इस गुण को अपनाएं। अपने साथी को अपनी बराबरी का दर्जा दें।
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सावन 2024 - फोटो : Freepic
प्यार

पति-पत्नी के रिश्ते में प्रेम भाव होना जरूरी है। भगवान शिव और मां पार्वती का साथ उन सभी के लिए उदाहरण है जो विवाह के दौरान एक दूसरे के बैंक बैलेंस, पदवी और खूबसूरती को अहमियत देते हैं। माता पार्वती ने भस्मधारी, गले में सर्पों की माला वाले शिव जी को पसंद किया। उनके गृहस्थ जीवन के लिए दोनों के बीच प्यार और समर्पण जरूरी था न कि खूबसूरती और पैसा।

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सावन 2024 - फोटो : अमर उजाला
ईमानदारी

भगवान शिव को भोलेनाथ भी कहते हैं, क्योंकि वह सीधे और भोले हैं। हर लड़की अपने जीवनसाथी में भोले बाबा जैसा सीधा व्यक्ति तलाशती है। भगवान शिव चाहते तो कोई भी रूप-रंग या राजकुमार जैसी छवि लेकर माता पार्वती से विवाह कर सकते थे, जबकि इसके पहले उनकी इसी छवि के कारण माता सती को उनके पिता के दरबार में अपमानित होना पड़ा था। लेकिन शिव जी ने अपने रिश्ते में ईमानदारी रहना चुना।
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सावन 2024 - फोटो : Amar Ujala
एक अच्छा मुखिया

भगवान शिव अपने परिवार के लिए एक अच्छे मुखिया हैं। उनके नेतृत्व में गृह क्लेश की संभावना ही नहीं होती। उदाहरण के लिए , भगवान शिव के गले में सर्प की माला है, जो कि उनके पुत्र गणेश के वाहन चूहे का शत्रु है लेकिन दोनों में कोई बैर नहीं देखा गया। ठीक उसी तरह मां गौरी का वाहन शेर है और भगवान शिव के वाहन बैल एक दूसरे के शत्रु हैं लेकिन दोनों मिलकर रहते हैं। विषम परिस्थितियों में परिवार को संभालकर चलने का गुण आप उनसे सीख सकते हैं। 
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सावन 2024 - फोटो : अमर उजाला
जिम्मेदारी
 
परिवार की जिम्मेदारी का ईमानदारी से निर्वहन करने से जीवन सुखी बनता है। भोले बाबा तपस्या में लीन रहते हैं तो माता पार्वती उनकी अनुपस्थिति में परिवार, पुत्रों और सभी देवी-देवताओं समेत सृष्टी की देखभाल करती हैं। हर पति-पत्नी को एक दूसरे के साथ मिलकर या एक दूसरे की अनुपस्थिति में आदर्श सुखी जीवन के लिए परिवार की जिम्मेदारियों का निर्वहन करना चाहिए।
 
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