बखूबी छिपाते हैं जज्बात
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बखूबी छिपाते हैं जज्बात
इस साल आपको भी नववर्ष, जन्मदिन या महिला दिवस पर तोहफे मिले होंगे, लेकिन उनमें से कितने आपको पसंद आए? एक, दो या कोई भी नहीं? लेकिन सवाल है कि आपने इस निराशा को कैसे और क्यों छिपाया? सर्वे बताता है कि पसंद का तोहफा न मिलने पर निराशा होना स्वाभाविक है, लेकिन अधिकतर लोग अपने रिश्तों को मधुर बनाए रखने के लिए इस निराशा को छिपा जाते हैं और ऊपरी तौर पर खुश होने का दिखावा करते हैं। असल में, जब व्यक्ति अपनी उम्मीदों के विपरीत तोहफा पाता है तो वह निराशा के भाव को छिपाने के लिए मुस्कुराहट या प्रशंसा का सहारा लेता है, ताकि देने वाले का दिल न दुखे। यह एक प्रकार का ‘सोशल डिजायर’ है, जहां आप दूसरे की भावना को नुकसान पहुंचाए बिना अपनी असंतुष्टि को प्रकट करने से बचती हैं। सर्वे के अनुसार, 56 प्रतिशत महिला-पुरुष निराशा को बड़ी कुशलता से छिपा लेते हैं। 57 प्रतिशत का तो कहना है कि वे इस कला में महारत हासिल कर चुके हैं।
पसंद-नापसंद के संकेत
आपको तोहफे मिलते हैं तो आप देती भी तो होंगी। लेकिन उसे वह पसंद आया या नहीं, इस बारे में आप कितना सोचती हैं? अध्ययन बताते हैं कि इसे जानने के भी कई संकेत होते हैं, जो बताते हैं कि तोहफा पसंद आया या नहीं। इसमें प्राप्तकर्ता का आंखें न मिलाना गिफ्ट देख असंतुष्ट होने का सबसे स्पष्ट संकेत होता है, हालांकि इसे कम ही लोग समझ पाते हैं। इसके बाद 20 प्रतिशत लोग नकली मुस्कान देते हैं। 16 प्रतिशत के लहजे में परिवर्तन आता है। वहीं 16 प्रतिशत तोहफे की खासियत गिनवाने का प्रयास करते हैं और ज्यादा से ज्यादा इस बारे में बात करते हैं।
कई मामलों में प्राप्तकर्ता गिफ्ट को खोलने के बाद उसे तुरंत साइड में रख देते हैं, जो कि इस बात का सीधा-सा संकेत होता है कि उसे तोहफा कुछ खास पसंद नहीं आया। वे आपकी खुशी के लिए मुस्कुराते तो हैं, लेकिन उत्साह नहीं दिखा पाते। वहीं अगर वे केवल औपचारिक धन्यवाद देते हैं और अधिक प्रतिक्रिया नहीं दिखाते तो यह सीधा संकेत है कि आपका तोहफा उनकी उम्मीदों से मेल नहीं खाता।