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कोरोना के दौर में इश्क: 'लॉकडाउन पीरियड' में कैसे बनाए रखें अपनी रोमांटिक लाइफ

Tue, 28 Apr 2020 09:56 AM IST
निलेश कुमार बीबीसी हिंदी
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
कोरोना ने हम सभी को घरों में कैद होने पर मजबूर कर दिया है। ऐसे कब तक बसर करना पड़ेगा कहा नहीं जा सकता। खुद को और दूसरों को बचाना है तो घरों की ये कैद मंजूर करनी ही होगी। लेकिन होम क्वारंटीन के फायदे हैं तो इसके नुकसान भी हैं। अभी तक हम सभी अपनी-अपनी जिंदगी में इतने वयस्त थे कि हमारे पास किसी के लिए समय ही नहीं था।

घर में रहने वाले बूढ़े मां-बाप शिकायत ही करते रह जाते थे कि बच्चे उन्हें समय नहीं देते। कोरोना के इस संकट काल में आप उनकी ये शिकायत दूर कर सकते हैं। लेकिन, घर में हर समय सभी सदस्यों की मौजूदगी हम सभी का प्राइवेट स्पेस खत्म कर रही है। इसका सीधा असर लोगों की रोमांटिक लाइफ पर पड़ रहा है।

बहुत से लोग मौज-मस्ती और प्यार के कुछ पल साथ बिताने के लिए बाहर जाया करते थे। पार्टी करते थे। ऐसे लोगों के लिए बड़ी समस्या खड़ी हो गई है। अब संकट के इस काल में रिश्तों की रूमानियत कैसे बरकरार रखी जाए? अगर आप अपने पार्टनर से दूर आइसोलेशन में हैं, तो जाहिर है उनकी कमी बेइंतहा खल रही होगी।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
'स्किन हंगर'
भले ही तकनीक की मदद से आप स्काइप, या वीडियो कॉल से ढेरों बातें कर लें। एक दूसरे से दिल की बात कह लें। फिर भी एक दूसरे का हाथ थाम कर बात करने का जो लुत्फ है वो नहीं मिल पाता। दिल और दिमाग को सुकून देने वाली एक दूसरे के वजूद की खुशबू कहीं गुम रहती है। रिसर्चर इसे 'स्किन हंगर' कहते हैं। यानी एक दूसरे के वजूद की गर्मी महसूस करने की ललक।

आइसोलेशन के इस दौर में तकनीक की मदद से इस 'हंगर' को दूर किया जा सकता है। इंटरनेट की दुनिया में ऐसी कई डिवाइस मौजूद हैं जो इस कमी को पूरा कर सकती हैं। अगर आप अपने किसी अजीज से दूर हैं तो उसकी भेजी गई चीज उस कमी को पूरा कर सकती है। जैसा कि खतों-किताबों के दौर में होता था।

लोग बड़े प्यार से अपने जज्बात शब्दों में पिरो कर एक कागज पर उतार देते थे। खत पढ़ने वाले उन शब्दों में खत भेजने वाले की मौजूदगी महसूस कर लिया करते थे। कागज के उस डुकड़े को सीने से लगा लेते थे। क्योंकि कागज का यही टुकड़ा तो उनके अपनों के हाथों में था। हो सकता है लिखने वाले ने चूम कर लिफाफा बंद किया हो। वो एहसास खत पढ़कर हो ही जाता है।
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एक दूसरे से दिल की बात कह लें - फोटो : Pixabay
'स्किन हंगर'
भले ही तकनीक की मदद से आप स्काइप, या वीडियो कॉल से ढेरों बातें कर लें। एक दूसरे से दिल की बात कह लें। फिर भी एक दूसरे का हाथ थाम कर बात करने का जो लुत्फ है वो नहीं मिल पाता। दिल और दिमाग को सुकून देने वाली एक दूसरे के वजूद की खुशबू कहीं गुम रहती है। रिसर्चर इसे 'स्किन हंगर' कहते हैं। यानी एक दूसरे के वजूद की गर्मी महसूस करने की ललक।

आइसोलेशन के इस दौर में तकनीक की मदद से इस 'हंगर' को दूर किया जा सकता है। इंटरनेट की दुनिया में ऐसी कई डिवाइस मौजूद हैं जो इस कमी को पूरा कर सकती हैं। अगर आप अपने किसी अजीज से दूर हैं तो उसकी भेजी गई चीज उस कमी को पूरा कर सकती है। जैसा कि खतों-किताबों के दौर में होता था।

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया
लोग बड़े प्यार से अपने जज्बात शब्दों में पिरो कर एक कागज पर उतार देते थे। खत पढ़ने वाले उन शब्दों में खत भेजने वाले की मौजूदगी महसूस कर लिया करते थे। कागज के उस डुकड़े को सीने से लगा लेते थे। क्योंकि कागज का यही टुकड़ा तो उनके अपनों के हाथों में था। हो सकता है लिखने वाले ने चूम कर लिफाफा बंद किया हो। वो एहसास खत पढ़कर हो ही जाता है।

जानकार कहते हैं कि अकेले रहना कोई बुरी चीज नहीं है। रिश्तों की तंदुरुस्ती और उसमें मिठास बनाए रखने के लिए कभी-कभी एक दूसरे से दूर रहना जरुरी है। संकट के इस दौर में सब कुछ बहुत उलझा हुआ है। एक ही जगह रहते हुए काम और रिश्ते निभाना मुश्किल होता है। पता ही नहीं चलता कब ऑफिस की जिम्मेदारी पूरी हुई और कब रिश्ते निभाने का काम शुरु हुआ। ऐसे में मौजूदा दौर में रिश्तों के लिए समय मिल भी पा रहा है या नहीं। ये भी कहना मुश्किल है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
एक-दूसरे की कमी का एहसास
जानकारों के मुताबिक एक दूसरे से दूर रहकर एक दूसरे की कमी महसूस करना इस बात की दलील है कि आपका रिश्ता कितना मजबूत है। कुछ समय अलग रहने के बाद जब आप फिर से मिलते हैं तो अलग ही ताजगी का एहसास होता है। नए जोश और उत्साह के साथ एक दूसरे से मिलते हैं। एक दूसरे की छोटी-छोटी गलतियां या कमियां नजर अंदाज कर देते हैं। वहीं हमेशा एक साथ रहने पर अक्सर हम एक दूसरे से चिड़चिड़ाने लगते हैं।

हमें लगने लगता है कि हमारा पर्सनल स्पेस खत्म हो रहा है। जो लोग कभी एक दूसरे से दूर नहीं होते उन्हें ये एहसास भी नहीं होता कि वो एक दूसरे के लिए कितने अहम हैं। एक दूसरे से अलग रहना ही चुनौतीपूर्ण नहीं है बल्कि अकेले रहने के बाद फिर से मिलना भी कम चुनौतीपूर्ण नहीं है। इसकी बेहतरीन मिसाल उन लोगों की जिंदगी में देखने को मिलती है जो रिटायर होने के बाद सारा समय परिवार के साथ घर में रहते हैं।

जब तक हम काम करते हैं उस वक्त तक पूरी आजादी और मर्जी से जिंदगी गुजारते हैं। ऑफिस में बिताए समय में किसी की दखलअंदाजी नहीं होती। लेकिन रिटायर होने के बाद जब हर वक्त घर में ही रहते हैं तो ना सिर्फ समय बिताना मुश्किल होता है बल्कि परिवार के साथ सौहार्दपूण संबंध बनाना भी मुश्किल हो जाता है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : pixabay
क्वारंटीन का असर
हां, अगर थोड़ी समझदारी से काम लिया जाए तो ये मुश्किल भी हल हो सकती है। क्वारंटीन का समय किसी के लिए भी आसान नहीं हो सकता। हमारी मानसिक स्थिति पर इसका क्या असर पड़ता है इस पर रिसर्च की जा रही है। रिसर्च में पाया गया है कि क्वारंटीन के समय बोरियत, झुंझलाहट और गुस्सा बढ़ जाता है। और ये असर काफी लंबे समय तक हम पर हावी रहता है।

रोमेंटिक रिलेशनशिप वालों पर इसका और भी गहरा असर पड़ता है। उनका एक दूसरे से दूर रहना तो और भी मुश्किल है। जिन लोगों का पारिवारिक जीवन पहले से ही खराब है उनके लिए भी ये समय भरपूर तनाव पैदा करने वाला है।

घर में होने वाली गाली-गलौज बच्चों पर बुरा असर डालती है। यहां तक कि अगर पीड़ित किसी को फोन करके अपने दिल की बात कहना चाहे तो वो भी मुश्किल है। ऐसे बहुत से लोग हैं जो घरों में रह रहे हैं। उनके पास रोजगार नहीं है। रोजी-रोटी की चिंता उन्हें चिड़चिड़ा बना रही है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
खास तौर से अमेरिका में तो हालात और भी खराब हैं। अगर दोनों ही पार्टनर की नौकरी चली जाए, और दोनों को एक ही घर में एक साथ हर समय रहना पड़े तो घरेलू हिंसा की संभावना सौ फीसद बढ़ जाती है। जानकारों का कहना है कि लॉकडाउन के दिनों में बहुत से देशों में घरेलू हिंसा के मामले काफी बढ़ गए हैं।

ब्रिटेन में ऐसे मामलों की संख्या में पांच गुना इजाफा हुआ है तो फ्रांस में तीन गुना। कुछ ऐसी ही रिपोर्ट अमेरिका और चीन से भी सामने आ रही है। वहीं कुछ जानकारों का ये भी कहना है कि तलाक के मामलों में सलाह या मदद की गुजारिशों में कमी दर्ज की गई है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
फ्रांस, इटली और स्पेन जैसे देशों में घरेलू हिंसा की शिकार महिलाओं के लिए अलग से कदम उठा रही हैं। उन्हें होटल में कमरे किराय पर दिए जा रहे हैं जहां वो सुकून से रह सकें। ब्रिटेन में भी ऐसी महिलाओं को लॉकडाउन के दौरान मदद के लिए बाहर आने को कह दिया गया है।

लॉकडाउन और आइसोलेशन के बाद सामान्य जीवन शुरु करना भी हम सभी के लिए आसान नहीं होगा। इसीलिए लॉकडाउन जैसी पाबंदियां हटने के बाद हम कैसे अपना जीवन आगे बढ़ाएंगे उसके लिए हम अभी से खुद को तैयार कर लें। जहां तक हो सके झगड़ों को अपने जीवन से दूर ही रखें। कोशिश यही करें कि एक दूसरे के साथ ज्यादा से ज्यादा समय हंसी-खुशी बिताएं।

आइसोलेशन हमें सिखा रहा है कि ना तो हमेशा एक दूसरे के नजदीक रहना अच्छा है, ना ही हमेशा दूर रहना - दोनों के फायदे और नुकसान हैं। लेकिन रिश्ते मजबूत रखने के लिए उनमें थोड़ी दूरी बनी रहे तो बेहतर है। अभी मुश्किल वक्त है। उम्मीद है कि ये जल्द ही गुजर जाएगा। फिर एक नए दिन की तरह हम सभी के रिश्तों और जिंदगी की एक नई शुरुआत होगी।
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