अलका ‘सोनी’
आज से करीब 25 साल पहले एक आम से फॉर्मूले पर बुनी कहानी ने घर-घर में अपनी पैठ बना ली थी और हर महिला, चाहे वह सास हो या बहू, इसे बड़े चाव से देखती थी। जी हां, हम बात कर रहे हैं ‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी’ धारावाहिक की। इस धारावाहिक में सास-बहू के चटकारे भरे रिश्ते को मजेदार अंदाज में प्रस्तुत किया गया था।
असल में, हमेशा से सास-बहू का रिश्ता सबके आकर्षण का केंद्र रहा है। अरेंज मैरिज हो या लव मैरिज, लड़कियों के मन में अपनी होने वाली सास को लेकर अलग ही तरह का संशय बना रहता है। ऐसा ही कुछ हाल होने वाली सास का भी होता है। विवाह के बाद उनका रिश्ता कैसा रहेगा, इसकी टेंशन दोनों को होती है। दोनों इस तनाव साथ के साथ ही नए रिश्ते में प्रवेश करती हैं। फलस्वरूप हमेशा दोनों के बीच नोक-झोंक या टकराव की स्थिति बनी रहती है। मगर जरूरी है कि यह नोक-झोंक मिठास से भरी हो, न कि कड़वाहट से, जो परिवार की नींव को ही हिलाकर रख दे।
आजकल की बहुओं के पास नए जमाने के तेवर और तकनीक है तो वहीं सास के पास बरसों का अनुभव और परिवार में चले आ रहे संस्कार। इन संस्कारों को वह अपनी नई-नवेली बहू को ठीक से जांच-परख कर ही देना चाहती है, जो अक्सर टकराव की वजह बनता है। मगर उनके इस खट्टे-मीठे रिश्ते को मधुर बनाए रखने की जिम्मेदारी परिवार के बाकी सदस्यों की भी होती है, जिसे थोड़ी-सी समझदारी के साथ आसानी से निभाया जा सकता है। अक्सर सास को शिकायत रहती है कि बहू बात नहीं सुनती। रोज के झगड़ों की वजह से लड़के की शामत आती है कि वह बीवी की सुने या मां की! इसी द्वंद्व में वह पूरा जीवन बिता देता है। सास-बहू के बीच झगड़े की कई वजहें हो सकती हैं, जैसे कि जेनरेशन गैप, आपस में बातचीत न होना आदि।