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Relationship Tips: बहू नहीं मानती बात तो सास अपनाएं ये तरीके, रिश्ते में नहीं आएगा कोई तनाव

Tue, 25 Feb 2025 05:21 PM IST
शिवानी अवस्थी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला

सार

सास-बहू का रिश्ता खट्टी-मीठी नोक-झोंक से भरा होता है। इसमें कई बार प्यार-समझदारी तो कई दफा तनाव भी होता है। बात तब बिगड़ती है, जब बहू सास की बात को अनसुना कर मनमानी करने लगती है। ऐसे में आप क्या करती हैं?
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सास बहू का रिश्ता - फोटो : istock
अलका ‘सोनी’

आज से करीब 25 साल पहले एक आम से फॉर्मूले पर बुनी कहानी ने घर-घर में अपनी पैठ बना ली थी और हर महिला, चाहे वह सास हो या बहू, इसे बड़े चाव से देखती थी। जी हां, हम बात कर रहे हैं ‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी’ धारावाहिक की। इस धारावाहिक में सास-बहू के चटकारे भरे रिश्ते को मजेदार अंदाज में प्रस्तुत किया गया था।

असल में, हमेशा से सास-बहू का रिश्ता सबके आकर्षण का केंद्र रहा है। अरेंज मैरिज हो या लव मैरिज, लड़कियों के मन में अपनी होने वाली सास को लेकर अलग ही तरह का संशय बना रहता है। ऐसा ही कुछ हाल होने वाली सास का भी होता है। विवाह के बाद उनका रिश्ता कैसा रहेगा, इसकी टेंशन दोनों को होती है। दोनों इस तनाव साथ के साथ ही नए रिश्ते में प्रवेश करती हैं। फलस्वरूप हमेशा दोनों के बीच नोक-झोंक या टकराव की स्थिति बनी रहती है। मगर जरूरी है कि यह नोक-झोंक मिठास से भरी हो, न कि कड़वाहट से, जो परिवार की नींव को ही हिलाकर रख दे।

आजकल की बहुओं के पास नए जमाने के तेवर और तकनीक है तो वहीं सास के पास बरसों का अनुभव और परिवार में चले आ रहे संस्कार। इन संस्कारों को वह अपनी नई-नवेली बहू को ठीक से जांच-परख कर ही देना चाहती है, जो अक्सर टकराव की वजह बनता है। मगर उनके इस खट्टे-मीठे रिश्ते को मधुर बनाए रखने की जिम्मेदारी परिवार के बाकी सदस्यों की भी होती है, जिसे थोड़ी-सी समझदारी के साथ आसानी से निभाया जा सकता है। अक्सर सास को शिकायत रहती है कि बहू बात नहीं सुनती। रोज के झगड़ों की वजह से लड़के की शामत आती है कि वह बीवी की सुने या मां की! इसी द्वंद्व में वह पूरा जीवन बिता देता है। सास-बहू के बीच झगड़े की कई वजहें हो सकती हैं, जैसे कि जेनरेशन गैप, आपस में बातचीत न होना आदि।
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शादी के बाद की जिम्मेदारियां - फोटो : Adobe stock
शादी के बाद की जिम्मेदारियां

सबसे पहले सास को यह समझना चाहिए कि एक नई लड़की अपना घर, परिवार और पुराना जीवन छोड़कर आपके घर आई है। उसे अभी आपके और नए परिवार के रीति-रिवाजों के बारे में कुछ भी पता नहीं है। ऐसी स्थिति में परिवार की मुख्य सदस्य और एक महिला होने के नाते बहू को सहारा दें, क्योंकि अचानक आई इन जिम्मेदारियों के कारण वह घबरा सकती है।

अगर वह आपके बताने के बाद भी चीजों को सही ढंग से नहीं कर पाती है तो सबके सामने उसे डांटने और उसका उपहास उड़ाने की जगह उसे प्यार से समझाएं। बहुत से परिवारों में नई बहू से हुई गलतियों पर उसे ताने और उलाहने दिए जाते हैं, जिससे उसके मन में स्थायी रूप से कड़वाहट घर कर जाती है। तानों के डर से वह सास से बात करना ही बंद कर देती है, क्योंकि उसे लगता है कि जब पलटकर उलाहने ही सुनने हैं तो फिर वह सास की बात ही क्यों सुने! याद रखें, अगर आपका व्यवहार मां जैसा होगा तो बहू कुछ भी बोलने में हिचकिचाएगी नहीं।
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आप सुनेंगी तो वो भी सुनेगी - फोटो : Adobe stock
आप सुनेंगी तो वो भी सुनेगी

नीति अपने ससुराल वालों का पूरा सम्मान करती है, लेकिन एक बात का उसे अफसोस होता है कि उसके ससुराल वाले घर के किसी भी मामले में उसकी राय नहीं लेते। वह अगर कुछ बोलना भी चाहती है तो यह कहकर रोक देते हैं कि ‘यह घर का मामला है!’ इसकी वजह से उसे तकलीफ होती है, क्योंकि जिस घर को अपना मानकर वह चल रही है, उसे लगता है कि वह उसका घर है ही नहीं!

इसलिए अगर आप बहू के विचारों और उसकी राय को महत्व देंगी तो बहू के प्रति आपका प्रेम बहू को भी आपसे जोड़कर रखेगा। अपने सास-ससुर से मिले स्नेह के कारण उनके साथ रहना उसे जिम्मेदारी या बोझ नहीं, बल्कि जिंदगी का हिस्सा लगने लगेगा। आप उसे सम्मान देंगी तो वह भी आपके प्रति सम्मान रखेगी।

जनरेशन गैप भी वजह

अक्सर जनरेशन गैप की वजह से परिवार में टकराव की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। यह टकराव कई बार पिता-पुत्र के बीच भी देखने को मिलता है, जो कि खून का रिश्ता होता है। फिर हम तो सास-बहू जैसे नाजुक और संवेदनशील रिश्ते की बात कर रहे हैं, जो बस आपसी समझदारी और धैर्य पर टिका होता है।

सास और बहू के बीच पीढ़ियों का अंतर होने के कारण उनके विचार, जीवन-शैली और मूल्यों में काफी अंतर होता है। पुरानी पीढ़ी की मान्यताएं और परंपराएं नई पीढ़ी के आधुनिक विचारों से टकरा सकती हैं, जिससे आपसी मतभेद बढ़ सकते हैं। जनरेशन गैप की वजह से दोनों एक-दूसरे को समझ और समझा नहीं पाते। दोनों के बीच जो लड़ाई होती है, वह किसी बड़े मुद्दे को लेकर नहीं, बल्कि सिर्फ इस बात की होती है कि बहू, सास की सुने और सास, बहू की।

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मिल-बांटकर काम - फोटो : istock
मिल-बांटकर काम

अधिकतर घरों में सास-बहू के झगड़े की वजह घर के काम होते हैं, जो दिखते तो आसान से हैं, लेकिन यह तो उन्हें करने वाला ही समझता है कि वे आसान हैं या कठिन। इन कामों को प्रायः बहू के जिम्मे ही समझा जाता है। आज के समय में 80 प्रतिशत लड़कियां वर्किंग हैं और शादी के बाद भी वे इसे जारी रखना चाहती हैं। शादी के बाद शुरू-शुरू में तो सास, बहू को समझती है। उसकी ऑफिस की थकान को समझती है, लेकिन वक्त के साथ सास-बहू की यह आपसी समझ भी बदल जाती है।

कई मामलों में जब बहू ऑफिस जाते वक्त या घर आकर किचन में सास की मदद नहीं कर पाती तो दोनों के रिश्तों में दरार आने लगती है। बहू को लगता है कि सास उसे नहीं समझ रही है तो वहीं सास को लगता है कि वह कोई काम ही नहीं करना चाहती है। इस सबका खामियाजा भुगतना पड़ता है पूरे घर को। कई घरों, जिनमें ननद, जेठानी या आस-पड़ोस की सहेलियां होती हैं, वहां तो स्थिति और भी तनावपूर्ण हो जाती है। इन्हें बहू के खिलाफ सास के कान भरने में समय नहीं लगता है।

आप बहू को केवल काम करने की मशीन न समझें। उसकी अपनी भी पसंद-नापसंद, मर्जी और सपने होते हैं, महत्वाकांक्षा होती है। आप उसे अपनी पसंद के काम करने की थोड़ी आजादी और समय जरूर दें। सास अगर मां बनकर बहू की रुचियों में दिलचस्पी लेगी, तभी बहू आपसे खुलकर बात कर पाएगी और आपका रिश्ता तनाव के बोझ तले नहीं दबेगा।

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हर समय कमी न निकालें - फोटो : istock
तुलना करना छोड़ दें

यह अमूमन इंसानी फितरत है कि हमें दूर के ढोल सुहावने लगते हैं और जो चीज हमारे पास होती है, वह अच्छी नहीं लगती, खासकर सास-बहू के रिश्ते में। बहू अपनी सहेलियों से सास की बुराई करती है, फिर चाहे वह कितनी ही अच्छी क्यों न हों। वहीं सास बहू की बुराई करती है, फिर चाहे वह घर और ऑफिस का सारा काम अच्छी तरह से क्यों न करती हो। इस वजह से दोनों अक्सर दूसरे से तुलना करने लगती हैं।

वर्किंग महिलाएं अक्सर ऑफिस में अपनी ससुराल, खासतौर से सास की दूसरों से तुलना करती हैं। उन्हें लगता है कि तमाम कोशिशों के बावजूद उन्हें घर में सही रिस्पॉन्स नहीं मिल रहा है। ऐसे में वे इसकी झुंझलाहट घर के सदस्यों पर निकालती हैं। ठीक इसी तरह सास भी जब औरों की बहुओं में ज्यादा गुण देखती है तो घर आकर अप्रत्यक्ष रूप से अपनी बहू और बेटे को ताना मारती है, जिससे बहू बौखला जाती है। वह पलटकर तुरंत जवाब देती है और रिश्ते में कड़वाहट आने लगती है।

मनोचिकित्सक कहते हैं कि सास-बहू के बीच अनबन एक विश्वव्यापी समस्या है। यह नोक-झोंक सिर्फ सास और बहू के बीच ही हो, यह जरूरी नहीं। टकराव दामाद और ससुर के बीच भी हो सकता है, क्योंकि ससुर और दामाद, सास-बहू की तरह हर वक्त एक-दूसरे के साथ नहीं रहते, इसलिए उनके बीच का मनमुटाव बहस तक ही रहता है। रिश्ते को बचाने के लिए बड़े होने के कारण थोड़ी कोशिश सास को करनी चाहिए, क्योंकि जिस पेड़ पर ज्यादा फल लगे हों, वही झुकता है। साथ ही बहू को भी चाहिए कि वह सास को मां की तरह स्नेह करे। उनकी छोटी-छोटी बात को दिल से न लगाए। दोनों ओर से हुईं कोशिशें यकीनन रिश्ते में मिठास घोल सकती हैं।


हर समय कमी न निकालें

नई बहू प्रायः ससुराल में ऐसा महसूस करती है, जैसा कि नया छात्र किसी संस्थान में करता है। ऊपर से रैगिंग का डर बना रहता है, सो अलग। इसलिए सबसे पहले बहू को सहज होने दें। गलती होने पर प्यार से समझाएं। उसे या उसके मायके वालों को लेकर ताने न दें। घरेलू कामों को भी मिल-जुलकर निपटाएं। अकेले उसी के सिर पर जिम्मेदारी न थोपें। इससे उसे सास और ससुराल, दोनों ही अपने लगने लगेंगे और बात बन जाएगी।
 
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जिम्मेदारी तो दोनों की है - फोटो : Adobe stock
जिम्मेदारी तो दोनों की है

दिल्ली विश्वविद्यालय के आर्यभट्ट काॅलेज में मनोविज्ञान विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. वर्षा सिंह बताती हैं, रिश्ता कोई भी हो, उसे निभाने की जिम्मेदारी दोनों पक्षों की होती है। सास-बहू का रिश्ता भी ऐसा ही है। अगर वे दोनों समझदारी और तालमेल के साथ चलें तो घर में शांति बनी रहती है और दोनों में प्यार भी। इस रिश्ते में अगर वे दोनों मां-बेटी न भी बन सकें तो सास ‘मां जैसी’ या फिर बहू ‘बेटी जैसी’ तो बन ही सकती है। ऐसे में सास को चाहिए कि वह बहू का नजरिया समझे और उसे स्पेस दे। अगर वह कोई नई चीज बनाना चाहती हो तो बनाने दे।

वहीं बहू को भी चाहिए कि वह सास की और अपनी उम्र के अंतर का ध्यान रखे। अगर वह कुछ अच्छा बता रही हों तो उसे सुने, क्योंकि कोई भी इन्सान सर्वज्ञानी नहीं होता। दूसरी बात यह कि सास परिवार की परपरंपराओं को निभाने की जिम्मेदारी बहू पर डाल देती है। बहू को उन परंपराओं का पालन करना चाहिए, लेकिन इसके इतर आपको अपने रिश्ते को स्वस्थ बनाने का प्रयास करते रहना चाहिए। सास किन विचारों की है, यह बहू को समझना चाहिए। साथ ही बहू के नए जमाने की सोच के साथ सास को भी सामंजस्य बिठाना चाहिए।
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