Marriage Advice: भारतीय समाज में शादी केवल दो लोगों का रिश्ता नहीं, बल्कि दो परिवारों का मिलन होता है। लेकिन कई बार पुरुषों को ऐसी परिस्थिति का सामना करना पड़ता है, जब उन्हें माता-पिता और पत्नी के बीच संतुलन बनाने में कठिनाई होती है। पुरुषों की स्थिति ऐसी होती हैं कि माता-पिता का साथ दे तो ममाज बाॅय कहलाते हैं और पत्नी की बात मानें तो 'जोरू का गुलाम'। यह स्थिति तब अधिक बिगड़ जाती है जब पुरुष को माता-पिता और पत्नी में से किसी एक का चुनाव करना पडे। ऐसे हालात बेहद भावनात्मक और चुनौतीपूर्ण हो जाते हैं। एक गलत फैसला उनके दोनों रिश्तों को प्रभावित कर सकता है।
पति को माता-पिता और पत्नी में से किसी एक को चुनना ही पड़े, यह स्थिति आदर्श नहीं है। असली समझदारी यह है कि ऐसी परिस्थिति आने ही न दी जाए। असली सवाल यह है कि इस परिस्थिति से बचा कैसे जाए? यहां शादीशुदा पुरुषों को कुछ सुझाव दिए जा रहे हैं जो पत्नी और माता पिता के बीच संतुलन बनाने और रिश्तों को संभालने में उनके काम आ सकते हैं।