How Ego Ruins Relationships: एक हेल्दी रिश्ते की बुनियाद आपसी प्यार, सम्मान और समझ पर टिकी होती है। मगर जब इसमें धीरे-धीरे 'ईगो' या अहंकार आता है, तो मजबूत से मजबूत रिश्ते भी ताश के पत्तों की तरह ढहने लगते हैं। ईगो एक ऐसा दुश्मन है जो पार्टनर की उपलब्धियों पर खुशी महसूस करने के बजाय प्रतिस्पर्धा पैदा करता है और गलतियों को स्वीकार न करने के रास्ते में दीवार बनकर खड़ा हो जाता है।
अक्सर लोग 'आत्म-सम्मान' और 'ईगो' के बीच के बारीक अंतर को नहीं समझ पाते हैं। जहां आत्म-सम्मान आपको अपनी गरिमा बनाए रखना सिखाता है, वहीं ईगो आपको 'मैं हमेशा सही हूं' के भ्रम में बांध देता है। आज के आधुनिक रिश्तों में, जहां दोनों पार्टनर करियर और पर्सनल फ्रिडम को महत्व देते हैं, वहां छोटी-छोटी बातों पर ईगो का टकराना आम हो गया है।
ध्यान देने वाली बात यह है कि अगर समय रहते इसे ठीक करने की कोशिश नहीं किया गया, तो यह रिश्तों में बहुत कड़वाहट ला सकता है। कई बार यह अलगाव तक का कारण बन जाता है। ईगो को संतुष्ट करने की कोशिश में हम अक्सर उस इंसान को खो देते हैं जो हमारे लिए सबसे अधिक मायने रखता है।