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रतन टाटा ने फेसबुक पर साझा की अधूरे प्यार की कहानी, लेकिन इसलिए नहीं हो पाई शादी

Thu, 13 Feb 2020 06:47 PM IST
नवनीत राठौर लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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रतन टाटा - फोटो : Social Media
भारत के दिग्गज उद्योगपति और टाटा ग्रुप के चेयरमैन रतन टाटा ने हाल ही में अपने परवरिश और प्यार से जुड़ी कुछ निजी जानकारियां शेयर की है। ह्यूमंस ऑफ बॉम्बे नाम के एक फेसबुक पेज पर 82 वर्षीय रतन टाटा ने लिखा है कि लॉस एंजिल्स में कॉलेज की पढ़ाई पूरी करने के बाद वो एक आर्किटेक्चर कंपनी में नौकरी करना शुरू कर दिया था। रतन टाटा बताते हैं कि 1962 का वह दौर बहुत अच्छा था क्योंकि लॉस एंजिल्स में ही उन्हें किसी से प्यार हो गया था।
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रतन टाटा - फोटो : Social Media
शादी लगभग पक्की हो चुकी थी। लेकिन, दादी की तबीयत खराब होने की वजह से टाटा को भारत लौटने का फैसला लेना पड़ा। भारत वापस लौटते वक्त रतन टाटा को ये उम्मीद थी कि वो जिससे शादी करना चाहते हैं वह भी साथ आएगी लेकिन भारत-चीन युद्ध की वजह से उनके माता-पिता तैयार नहीं हुए और रिश्ता खत्म हो गया।
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रतन टाटा - फोटो : Social Media
बता दें कि रतन टाटा जब 10 साल के ही थे तभी उनके माता-पिता के बीच तलाक हो गया था। इसके बाद उनकी परवरिश दादी नवजबाई ने की। रतन टाटा बताते हैं कि माता-पिता के अलग होने की वजह से मुझे और मेरे भाई को कुछ परेशानियां तो जरूर हुईं लेकिन इन सबके बावजूद भी हमारा बचपन खुशी से बीता।

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Ratan Tata - फोटो : Social Media
रतन टाटा ने बताया कि दूसरे विश्व-युद्ध के खत्म होते ही दादी हम दोनों भाइयों को छुट्टियां मनाने लंदन ले गईं। दादी ने ही हमें जिंदगी में मूल्यों की अहमियत बताई। उन्होंने ही समझाया कि प्रतिष्ठा सब चीजों से ऊपर होती है।
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Ratan Tata - फोटो : Social Media
रतन टाटा बचपन में वायलिन सीखना चाहते थे लेकिन उनके पिता जी पियानो पर जोर देते थे। रतन टाटा की  सोच उनके पिता जी से बिल्कुल भी नहीं मिलती थी। टाटा कॉलेज की पढ़ाई अमेरिका में करना चाहते थे लेकिन उनके पिता जी यूके भेजना चाहते थे। रतन टाटा की इच्छा आर्किटेक्ट बनने की थी लेकिन उनके पिता जी इंजीनियर बनाना चाहते थे।
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Ratan Tata - फोटो : Social Media
रतन टाटा बताते हैं कि अगर दादी नहीं होती तो मैं अमेरिका में पढ़ाई नहीं कर पाता। दादी की वजह से ही मैं मैकेनिकल इंजीनियरिंग से स्विच कर आर्किटेक्ट में एडमिशन ले पाया। इस बात से रतन टाटा के पिता जी नाराज भी थे। टाटा कहते हैं कि यह बात भी दादी ने सिखाई कि अपनी बात रखने की हिम्मत करने का तरीका भी विनम्र और शालीन हो सकता है।
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