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Parenting Tips: बच्चे आपकी बात नहीं मानते? पहले बदलें अपनी ये आदत, फिर देखें कमाल

Fri, 17 Jul 2026 03:10 PM IST
शिवानी अवस्थी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला

सार

Calm Parenting Guide: बच्चों की परवरिश आसान नहीं होती। सबसे बड़ी चुनौती यह होती है कि बच्चे केवल माता-पिता की बातों से ही नहीं, बल्कि उनके व्यवहार, बोलने के तरीके और समस्याओं से निपटने के ढंग की भी नकल करते हैं। 
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पेरेंटिंग टिप्स - फोटो : Ai
How To Handle Angry Kids: क्या आपका बच्चा छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा करता है या दूसरों से झगड़ने लगता है? इसकी वजह सिर्फ उसकी आदतें नहीं, बल्कि घर का माहौल भी हो सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, बच्चे सुनने से ज्यादा देखकर सीखते हैं। ऐसे में हर गलती पर चिल्लाने के बजाय शांत पेरेंटिंग अपनाना उनके मानसिक और भावनात्मक विकास के लिए ज्यादा फायदेमंद हो सकता है।

घर का माहौल ही बनाता है बच्चे का व्यवहार

बच्चों की परवरिश आसान नहीं होती। सबसे बड़ी चुनौती यह होती है कि बच्चे केवल माता-पिता की बातों से ही नहीं, बल्कि उनके व्यवहार, बोलने के तरीके और समस्याओं से निपटने के ढंग की भी नकल करते हैं। इसलिए घर का शांत, प्रेमपूर्ण और सकारात्मक वातावरण बच्चों को आत्मविश्वासी, संवेदनशील, जिम्मेदार और अच्छे संस्कारों वाला व्यक्ति बनाने में मदद करता है।
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Parenting Tips - फोटो : Adobe stock
हर बार डांटना नहीं है सही तरीका

अक्सर माता-पिता यह सोचते हैं कि ऊंची आवाज में बोलने या डांटने से बच्चा तुरंत उनकी बात मान लेगा। हो सकता है कि उस समय बच्चा डर के कारण चुप हो जाए, लेकिन यह उसकी समझ नहीं, बल्कि भय की प्रतिक्रिया होती है, जिसका परिणाम अक्सर भावनाओं को खुलकर न व्यक्त करने और कई बार झूठ बोलने या अपनी गलतियों को छिपाने के रूप में सामने आता है। इसलिए आपको अपने इस व्यवहार को बदलना चाहिए।
 
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parenting tips - फोटो : Adobe stock
शांत पेरेंटिंग के फायदे

जब माता-पिता धैर्य और शांति से बच्चों की बात सुनते हैं, तो बच्चे सुरक्षित और सम्मानित महसूस करते हैं। उन्हें विश्वास होता है कि उनकी बात समझी जाएगी, चाहे उनसे गलती ही क्यों न हुई हो। इससे उनका आत्मविश्वास बढ़ता है और वे अपनी भावनाएं, समस्याएं तथा विचार खुलकर व्यक्त करना सीखते हैं। शांत पेरेंटिंग बच्चों को गुस्से के बजाय समझदारी और संवाद से समस्याओं का समाधान करना सिखाती है, जिससे उनके रिश्ते और सामाजिक व्यवहार बेहतर बनते हैं।

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पेरेंटिंग टिप्स - फोटो : Adobe
अनुशासन जरूरी है, लेकिन डर के बिना

शांत पेरेंटिंग का अर्थ यह बिल्कुल नहीं है कि बच्चों की गलतियों को नजरअंदाज किया जाए। अनुशासन जरूरी है, लेकिन इसका उद्देश्य डर पैदा करना नहीं, बल्कि सही-गलत की समझ देना होना चाहिए। स्पष्ट नियम बनाएं, उनके कारण समझाएं और उन्हें सभी पर समान रूप से लागू करें। कठोर शब्दों और ऊंची आवाज के बजाय प्रेम, संवाद और निरंतरता अपनाएं। यदि गुस्से में बच्चे पर चिल्ला दें, तो अपनी गलती स्वीकार करें। इससे बच्चे अपनी गलतियां मानना, उनसे सीखना और जिम्मेदार व्यवहार करना सीखते हैं।
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Parenting Tips - फोटो : Adobe stock
विशेषज्ञ की राय - माता-पिता क्या करें

क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट गरिमा बताती हैं कि बच्चों पर चिल्लाने के बजाय पहले उनकी बात ध्यान से सुनें और अपनी भावनाओं पर नियंत्रण रखें। गलती होने पर डांटने की जगह समाधान सिखाएं और अच्छे व्यवहार की सराहना करें।

रोज थोड़ा गुणवत्तापूर्ण समय साथ बिताएं, ताकि भरोसा बढ़े। धैर्य, संवाद और सकारात्मक उदाहरण से ही बच्चे सीखते हैं। सुलझे हुए पेरेंट वही हैं, जो समझदारी और संवेदनशीलता से बच्चों का मार्गदर्शन करते हैं। याद रखें, बच्चे आपके शब्दों से ज्यादा आपके व्यवहार से सीखते हैं। इसलिए हर गलती पर गुस्सा करने के बजाय धैर्य, संवाद और प्यार का रास्ता चुनें। यही शांत पेरेंटिंग बच्चे के उज्ज्वल और संतुलित भविष्य की सबसे मजबूत नींव बन सकती है।
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