यशस्वी यादव
हममें से अधिकतर लोग मुश्किल हालात में खुद से बात करते हैं। बच्चे भी खुद से बातें करते हैं। अकेले में खुद से ही कुछ कहकर खुद ही उत्तर देना क्या उनके लिए सामान्य है? दिल्ली की रहने वाली रीना की बेटी सौम्या दूसरों बच्चों से उतनी बात नहीं करती, जितना कि खुद से करती है। रीना कई बार सौम्या को समझा चुकी है, लेकिन वह खुद से ही बातें करती रहती है। रीना इससे परेशान हो चुकी है, इसलिए उसने यह समस्या अपनी दोस्त हेमलता से साझा की। हेमलता ने रीना को बताया कि शोधकर्ताओं के अनुसार, इंटेलिजेंस और बच्चों का खुद से बात करना, दोनों का आपस में गहरा संबंध है।
खुद से बात करने की आदत उनके भाषायी विकास में भी बहुत योगदान करती है और उनके व्यवहार को विकसित करने में भी मदद करती है। हेमलता की बात से रीना तो संतुष्ट हो गई, लेकिन सवाल यह है कि क्या हेमलता सही कह रही है?