Parenting Tips
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आप बोलें सच
घर में कोई बिन बुलाया मेहमान या किसी का फोन आता है तो घर के बड़े कह देते हैं कि ‘बेटा कह दो कि पापा या मम्मी घर पर नहीं हैं।’ बस, यहीं से बच्चों के झूठ बोलने की शुरुआत होती है। उन्हें ऐसा महसूस होता है कि जब बड़े ऐसा कर सकते हैं तो हम क्यों नहीं। इसलिए बच्चों के सामने झूठ न बोलें और न ही उन्हें झूठ बोलने के लिए प्रोत्साहित करें।
न दें झूठे होने का लेबल
बाल मनोवैज्ञानिक रुचि अग्रवाल बताती हैं, बच्चे अपनी ओर ध्यान आकर्षित करने, किसी चीज से बचने या अपनी कोई बात मनवाने के लिए झूठ का सहारा लेने लगते हैं। इसके अलावा वे कार्टून और टीवी पर आने वाले शोज से भी झूठ बोलना सीखते हैं। इसलिए वे क्या देख रहे हैं, आप इस बात का ध्यान रखें। आप कभी भी बच्चे के झूठ बोलने की आदत को नजरअंदाज न करें। आप उससे प्यार से और बिना डांट-फटकार के झूठ बोलने की वजह पूछें, जोर-जबरदस्ती बिल्कुल न करें और उसे समय दें। इसके अलावा सबसे जरूरी है कि आप कभी भी उसकी इस आदत को सुधारने के लिए उसको कोई लेबल न दें, जैसे ‘तुम हमेशा झूठ बोलते हो’ या फिर ‘तुम तो हो ही झूठे।’ इस तरह के लेबल से बच्चे के आत्मविश्वास को चोट पहुंचती है, जिस कारण वह जिद्दी बन जाता है और झूठ पर झूठ बोलने लगता है।