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Parenting Tips: मां-बाप के साथ सोने वाले बच्चों में होती है इन चीजों की कमी, हर अभिभावक के लिए जानना जरूरी

Mon, 24 Feb 2025 10:33 AM IST
श्रुति गौड़ लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

यदि आप बड़े होने के बाद भी अपने बच्चे को अपने पास ही सुलाते हैं, तो इससे उनके जीवन पर काफी गलत प्रभाव भी पड़ सकता है। बच्चों के मानसिक और शारीरिक विकास के लिए यह जरूरी है कि वे अपने माता-पिता से धीरे-धीरे अलग सोने की आदत डालें
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मां-बाप के साथ सोने वाले बच्चों में होती है इन चीजों की कमी - फोटो : Adobe stock
Parenting Tips: भारत में बच्चे चाहे कितने भी बड़े क्यों न हो जाएं, वो अपने माता-पिता के साथ ही सोना पसंद करते हैं। घरवालों का ऐसा मानना होता है कि अभिभावक के साथ सोने से बच्चे और उनके बीच का रिश्ता मजबूत होता है। कई मायनों में देखा गया है कि ये बात सही भी है।

पर, क्या आप जानते हैं कि बढ़ती उम्र में भी यदि आप अपने बच्चे को अपने साथ सुलाएंगे तो उनके अंदर कई चीजों की कमी आ सकती है। ज्यादातर अभिभावकों को इस बारे में जानकारी होती ही नहीं है। ऐसे में हम आपको आज यहां बताएंगे कि एक उम्र के बाद बच्चों को अलग सुलाना क्यों जरूरी है और यदि आप ऐसा नहीं करते हैं तो बच्चे में किन तीन अहम चीजों की कमी आ सकती है। 
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आत्मनिर्भरता की कमी - फोटो : Freepik.com
1. आत्मनिर्भरता की कमी

एक उम्र के बाद से यदि आप अपने बच्चे को अलग सुलाने लगेंगे तो इससे वो आत्मनिर्भर बनता है। मां-बाप के साथ सोने वाले बच्चे में आत्मनिर्भरता की कमी हो सकती है और वे जरूरत से ज्यादा माता-पिता पर निर्भर हो सकते हैं। इसलिए यदि समय के साथ बच्चे को आत्मनिर्भर बनाना है तो उन्हें अलग सोने की आदत डालें। 

 
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आत्मविश्वास की कमी - फोटो : Freepik.com
2. आत्मविश्वास की कमी

आज के समय में हर बच्चे में आत्मविश्वास का होना बेहद जरूरी होता है। आत्मविश्वास की वजह से ही वो आगे जाकर अपने लिए स्टैंड ले पाते हैं। ऐसे में उन्हें एक उम्र के बाद अपना अलग कमरा दें, ताकि वो बचपन से ही आत्मनिर्भर बनें। इससे उनका आत्मविश्वास बढ़ता है।  

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भावनात्मक संतुलन की कमी - फोटो : Adobe stock
3. भावनात्मक संतुलन की कमी

 यदि आप बड़े होने के बाद भी अपने बच्चे को अपने साथ ही सुलाते हैं तो इससे उनका भावनात्मक संतुलन बिगड़ सकता है। अलग सोने से बच्चा अपने डर से खुद लड़ना सीखता है और मानसिक रूप से मजबूत बनता है। जब वो अलग सोकर अपने डर से लड़ेंगे तो उनका आत्मविश्वास भी बढ़ेगा। 
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आगे जाकर नहीं होगी परेशानी - फोटो : Adobe stock
आगे जाकर नहीं होगी परेशानी

यदि आप अपने बच्चे को शुरुआत से ही अकेले सोने की आदत डलवा देंगे तो उन्हें आगे जाकर उस वक्त परेशानी नहीं होगी, जब वो बाहर कहीं पड़ने या फिर नौकरी के लिए जाएंगे। वरना बच्चों को हमेशा ही ये डर बना रहता है कि वो कभी भी अकेले नहीं रह पाएंगे।  
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क्या हर बच्चे को जल्दी अलग सुला देना चाहिए? - फोटो : Adobe stock
क्या हर बच्चे को जल्दी अलग सुला देना चाहिए?
  
हर बच्चे का विकास अलग तरीके से होता है। कुछ बच्चे जल्दी अलग सोने के लिए तैयार हो जाते हैं, जबकि कुछ को समय लगता है। ऐसे में जल्दबाजी न करें। जब भी बच्चा तैयार लगे, तभी ये बदलाव करें।
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क्या हर बच्चे को जल्दी अलग सुला देना चाहिए? - फोटो : Adobe stock
यहां अलग सुलाने का अर्थ ये बिल्कुल नहीं है कि जबरदस्ती बच्चे को अलग कमरे में सुलाने की कोशिश करें। इसके लिए आपको धीरे-धीरे कदम उठाने होंगे। यदि आप जबरन अपने बच्चे को अलग सुलाएंगे तो इससे उनके मन पर गलत प्रभाव भी पड़ सकता है। बच्चे को अलग सुलाने के लिए पहले दिन के समय उन्हें अकेले कमरे में सोने की आदत डालें। 
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