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Parenting Tips: दोस्तों से छोटी-छोटी बात पर नाराज रहता है बच्चा? ऐसे बदलें उसकी सोच

Wed, 15 Jul 2026 12:08 PM IST
शिवानी अवस्थी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला

सार

किसी बात पर रूठकर दोस्तों से बातचीत पूरी तरह बंद कर देने की प्रवृत्ति और ‘कभी माफ न करने’ का अडिग फैसला बच्चों के सामाजिक विकास में बाधक हो सकता है।
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बच्चा माफ करना नहीं जानें तो क्या करें - फोटो : AI
ज्योति मौर्या

बचपन का मतलब ही है खेल-कूद, शरारतें और छोटी-मोटी तकरार, लेकिन क्या आपका बच्चा अपने दोस्तों की गलतियों को आसानी से भुला नहीं पाता? अगर वह छोटी-छोटी बातों को दिल से लगा लेता है और अपने दोस्तों को माफ करने में कठिनाई महसूस करता है, तो यह स्थिति माता-पिता के लिए चिंता का विषय हो सकती है। यह व्यवहार केवल गुस्सा नहीं है, बल्कि उसके भावनात्मक विकास की एक चुनौती भी है।

क्या है वजह

बच्चे दुनिया को बड़ों की तुलना में बहुत अलग नजरिए से देखते हैं। उनके लिए खिलौना टूटना या खेल में हार जाना बहुत बड़ी बात है। ऐसे में दोस्त का उनकी बात न मानना, उन्हें असुरक्षा और धोखे का अहसास कराता है। धीरे-धीरे बच्चों में अहंकार की भावना विकसित होने लगती है, जिससे उन्हें माफी मांगने या देना बहुत बड़ा काम लगता है।
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Parenting Tips - फोटो : Adobe stock
बदलते स्वभाव का असर
  • अगर बच्चा माफी देने की आदत नहीं डालेगा, तो धीरे-धीरे अकेला पड़ जाएगा।
  • मन में कड़वाहट पालने से उसका मानसिक तनाव बढ़ेगा।
  • वहीं, रिश्तों में लचीलापन न होने के कारण वह नए दोस्त नहीं बना पाएगा।
  • संवेदनशील और समझदार इन्सान बनने के लिए उसे माफ करना सीखना होगा।
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Parenting Tips - फोटो : Adobe stock
माता-पिता कैसे करें मदद
  • यदि माता-पिता छोटी बातों पर गुस्सा करते हैं और माफी नहीं मांगते या देते हैं, तो बच्चा भी वही सीखेगा।
  • ऐसे में बच्चे से पूछें कि अगर उससे गलती होती, तो वह क्या उम्मीद करता?
  • उसे दूसरे बच्चे की स्थिति को समझने के लिए प्रेरित करें।
  • आप भी घर में छोटे-मोटे झगड़ों के बाद माफी मांगें और दें।
  • इससे बच्चा समझ पाएगा कि माफी मांगना कमजोरी नहीं, बल्कि बड़प्पन है।

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Parenting Tips - फोटो : Pixabay
दोस्ती को मजबूत बनाने के मंत्र
  • बच्चों को समझाएं कि कोई भी इन्सान परफेक्ट नहीं होता।
  • गलतियां सभी से होती हैं।
  • दोस्ती का रिश्ता विश्वास और माफी की नींव पर टिका होता है।
  • उन्हें ‘सॉरी’ कहने का महत्व समझाएं।
  • मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि जो बच्चे बचपन में ही माफ करना सीख जाते हैं, वे भविष्य में अधिक खुश और सफल रहते हैं।
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parenting tips - फोटो : Adobe stock
धैर्य रखें और प्यार दें

बाल विकास सलाहकार रोहिणी सेठी बताती हैं, हर बच्चा अलग होता है और उसके सीखने की गति भी अलग होती है। धैर्य रखें और उसे प्यार से समझाएं। जब बच्चा मन की कड़वाहट को छोड़ना सीख जाएगा, तो उसकी मुस्कान और उसकी दोस्ती दोनों ही अधिक गहरी और लंबी होगी। याद रखें, आपका सही मार्गदर्शन उसे एक बेहतर इन्सान बना सकता है। इसलिए जब भी वह किसी दोस्त से नाराज हो, तो उसे बैठकर प्यार से समझाएं, न कि डांटें।
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