ज्योति मौर्या
बचपन का मतलब ही है खेल-कूद, शरारतें और छोटी-मोटी तकरार, लेकिन क्या आपका बच्चा अपने दोस्तों की गलतियों को आसानी से भुला नहीं पाता? अगर वह छोटी-छोटी बातों को दिल से लगा लेता है और अपने दोस्तों को माफ करने में कठिनाई महसूस करता है, तो यह स्थिति माता-पिता के लिए चिंता का विषय हो सकती है। यह व्यवहार केवल गुस्सा नहीं है, बल्कि उसके भावनात्मक विकास की एक चुनौती भी है।
क्या है वजह
बच्चे दुनिया को बड़ों की तुलना में बहुत अलग नजरिए से देखते हैं। उनके लिए खिलौना टूटना या खेल में हार जाना बहुत बड़ी बात है। ऐसे में दोस्त का उनकी बात न मानना, उन्हें असुरक्षा और धोखे का अहसास कराता है। धीरे-धीरे बच्चों में अहंकार की भावना विकसित होने लगती है, जिससे उन्हें माफी मांगने या देना बहुत बड़ा काम लगता है।