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Parenting Tips: बच्चों में नफरत और ईर्ष्या क्यों बढ़ती है? माता-पिता जरूर जानें ये बातें

Mon, 27 Jul 2026 03:59 PM IST
शिवानी अवस्थी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला

सार

child jealousy: बच्चों में द्वेष की भावना जन्मजात नहीं होती। यह अक्सर परिवार, आसपास के माहौल, बार-बार की तुलना, उपेक्षा, कठोर व्यवहार या सामाजिक अनुभवों से धीरे-धीरे विकसित हो सकती है। समय रहते सकारात्मक संवाद, भावनात्मक सहयोग और स्वस्थ पारिवारिक वातावरण बच्चों में सहानुभूति और सम्मान की भावना विकसित करने में मदद करते हैं।
 
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बच्चों में जलन और द्वेष क्यों होता है - फोटो : AI

Children Psychology: हर माता-पिता चाहते हैं कि उनका बच्चा दयालु, संवेदनशील और दूसरों का सम्मान करने वाला बने। लेकिन कई बार बच्चे छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा करने लगते हैं, दूसरों की सफलता से परेशान होते हैं या किसी व्यक्ति के प्रति नकारात्मक व्यवहार दिखाने लगते हैं।

ऐसे में अक्सर सवाल उठता है कि क्या बच्चों में द्वेष या नफरत की भावना जन्म से होती है, या यह समय के साथ विकसित होती है? बाल मनोविज्ञान के अनुसार, छोटे बच्चे अपनी भावनाओं को समझना और व्यक्त करना धीरे-धीरे सीखते हैं। द्वेष जैसी जटिल भावना आमतौर पर उनके अनुभवों, वातावरण और सामाजिक सीख से विकसित हो सकती है, न कि जन्मजात रूप से।

परिवार का माहौल, माता-पिता का व्यवहार, स्कूल का अनुभव, दोस्तों का प्रभाव और बार-बार की तुलना जैसे कई कारण बच्चों की सोच और भावनात्मक विकास को प्रभावित करते हैं। यदि बच्चे को बार-बार अपमानित महसूस कराया जाए, उसकी बात न सुनी जाए या उसे लगातार दूसरों से कमतर बताया जाए, तो उसके मन में असुरक्षा, ईर्ष्या और द्वेष जैसी भावनाएं पनप सकती हैं।

सही मार्गदर्शन, खुला संवाद और सकारात्मक परवरिश के माध्यम से बच्चों को स्वस्थ तरीके से अपनी भावनाओं को समझना और संभालना सिखाया जा सकता है।

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बच्चों में जलन और द्वेष क्यों होता है - फोटो : AI

बच्चे देखकर और सुनकर सबसे ज्यादा सीखते हैं
 

  • बच्चे केवल समझाने से नहीं, बल्कि बड़ों के व्यवहार को देखकर भी सीखते हैं।
  • यदि घर में अक्सर झगड़े, कटु भाषा, दूसरों की बुराई या भेदभाव देखने को मिलता है, तो बच्चा इन्हीं व्यवहारों को सामान्य मान सकता है।
  • इसके उलट, सम्मानपूर्ण बातचीत, सहयोग और सहानुभूति का वातावरण सकारात्मक भावनात्मक विकास को बढ़ावा देता है।
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तुलना से नकारात्मक असर - फोटो : AI

बार-बार तुलना करने से बढ़ सकती है नकारात्मक भावना

  • "तुम्हारा दोस्त तुमसे बेहतर है" या "तुम्हारी बहन हमेशा अच्छा करती है" जैसी बातें बच्चे के आत्मविश्वास को प्रभावित कर सकती हैं।
  • लगातार तुलना होने पर कुछ बच्चों में ईर्ष्या, हीन भावना और दूसरों के प्रति नकारात्मक सोच विकसित हो सकती है।
  • बेहतर है कि बच्चे की तुलना केवल उसकी अपनी प्रगति से की जाए।

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बच्चे मोबाइल देखकर खाना खाए तो क्या करें - फोटो : AI

उपेक्षा और भावनात्मक दूरी भी बन सकती है कारण

  • जब बच्चे को लगता है कि उसकी बात नहीं सुनी जा रही या उसे पर्याप्त स्नेह और ध्यान नहीं मिल रहा, तो वह अपने भीतर नकारात्मक भावनाएं जमा कर सकता है।
  • नियमित बातचीत, उसकी भावनाओं को गंभीरता से सुनना और उसके प्रयासों की सराहना करना भावनात्मक सुरक्षा की भावना विकसित करता है।
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सोशल मीडिया और आसपास का माहौल भी डालते हैं प्रभाव - फोटो : Adobe stock

सोशल मीडिया और आसपास का माहौल भी डालते हैं प्रभाव

  • आज के समय में बच्चे परिवार के अलावा इंटरनेट, टीवी, गेम्स और साथियों से भी बहुत कुछ सीखते हैं।
  • यदि वे बार-बार आक्रामक व्यवहार, अपमानजनक भाषा या भेदभावपूर्ण संदेश देखते हैं, तो उनका असर उनके व्यवहार पर पड़ सकता है।
  • इसलिए अभिभावकों का मार्गदर्शन और उम्र के अनुसार उपयुक्त सामग्री का चयन महत्वपूर्ण है।
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बच्चों में जलन और द्वेष क्यों होता है - फोटो : AI

माता-पिता क्या करें? 
 

  • बच्चे की बात ध्यान से सुनें।

  • उसकी भावनाओं को स्वीकार करें और उन पर शांतिपूर्वक चर्चा करें।

  • तुलना करने से बचें।

  • घर में सम्मानजनक भाषा और व्यवहार अपनाएं।

  • सहानुभूति, सहयोग और साझा करने की आदत विकसित करें।

  • यदि बच्चे का गुस्सा, आक्रामकता या नफरत लंबे समय तक बनी रहे और उसके दैनिक जीवन को प्रभावित करे, तो किसी योग्य बाल मनोवैज्ञानिक या मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लेना उपयोगी हो सकता है।

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बच्चों में द्वेष और ईर्ष्या की वजह - फोटो : AI

किन संकेतों पर ध्यान देना चाहिए?
 

  • हर समय गुस्सा या चिड़चिड़ापन।

  • दूसरों को जानबूझकर परेशान करना।

  • किसी खास व्यक्ति या समूह के प्रति लगातार नकारात्मक व्यवहार।

  • अपनी भावनाओं को व्यक्त करने में कठिनाई।

  • दोस्तों से दूरी बनाना या बार-बार झगड़ा करना।

ऐसे संकेत हमेशा गंभीर समस्या का मतलब नहीं होते, लेकिन यदि वे लंबे समय तक बने रहें, तो समझदारी से उनकी वजह जानने की कोशिश करनी चाहिए।

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