Children Psychology: हर माता-पिता चाहते हैं कि उनका बच्चा दयालु, संवेदनशील और दूसरों का सम्मान करने वाला बने। लेकिन कई बार बच्चे छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा करने लगते हैं, दूसरों की सफलता से परेशान होते हैं या किसी व्यक्ति के प्रति नकारात्मक व्यवहार दिखाने लगते हैं।
ऐसे में अक्सर सवाल उठता है कि क्या बच्चों में द्वेष या नफरत की भावना जन्म से होती है, या यह समय के साथ विकसित होती है? बाल मनोविज्ञान के अनुसार, छोटे बच्चे अपनी भावनाओं को समझना और व्यक्त करना धीरे-धीरे सीखते हैं। द्वेष जैसी जटिल भावना आमतौर पर उनके अनुभवों, वातावरण और सामाजिक सीख से विकसित हो सकती है, न कि जन्मजात रूप से।
परिवार का माहौल, माता-पिता का व्यवहार, स्कूल का अनुभव, दोस्तों का प्रभाव और बार-बार की तुलना जैसे कई कारण बच्चों की सोच और भावनात्मक विकास को प्रभावित करते हैं। यदि बच्चे को बार-बार अपमानित महसूस कराया जाए, उसकी बात न सुनी जाए या उसे लगातार दूसरों से कमतर बताया जाए, तो उसके मन में असुरक्षा, ईर्ष्या और द्वेष जैसी भावनाएं पनप सकती हैं।
सही मार्गदर्शन, खुला संवाद और सकारात्मक परवरिश के माध्यम से बच्चों को स्वस्थ तरीके से अपनी भावनाओं को समझना और संभालना सिखाया जा सकता है।