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Parenting Tips: बच्चों के भविष्य पर घर-परिवार का होता है गहरा असर, जानिए कैसे परिवेश में पल रहा आपका बच्चा

Wed, 09 Aug 2023 04:51 PM IST
शिवानी अवस्थी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला
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parenting Tips - फोटो : Istock
मोनिका अग्रवाल

Parenting Tips: आप जो करती हैं, बच्चा वही सीखता है। आप जैसे रहती हैं, बच्चा वही रहन-सहन अपनाता है। आप जो खाती हैं, बच्चा भी वैसा ही खाना सीख जाता है। घर में अलगाव जैसे वातावरण में बच्चे का स्वभाव भी जिद्दी हो सकता है, क्योंकि आपका घर ही बच्चे की परवरिश में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

पिंकी अपनी सहेली स्नेहा के घर पहुंची। वहां उसका 3 वर्षीय बेटा रोहन खिलौनों से खेल रहा था। पिंकी ने प्यार से रोहन से कहा, “क्या कर रहे हो, बेटा? हमें भी अपने साथ खिला लो।” इतना सुनते ही रोहन ने गुस्से से पिंकी की तरफ देखा और बोला, “यू स्टुपिड!” रोहन के ये शब्द सुनते ही पिंकी ने अचरज के साथ स्नेहा की तरफ देखा। स्नेहा ने मुस्कुराकर कहा, “पहली बार मिला है तुमसे, इसलिए ऐसा कह रहा है।” पिंकी को स्नेहा का इस तरह मुस्कुराना थोड़ा अखरा। उसने समझाते हुए कहा, “स्नेहा, बच्चे के व्यवहार के लिए उसके साथ माता-पिता का व्यवहार, घर का माहौल सब जिम्मेदार होते हैं। ये बातें आज अच्छी लग रही हैं, लेकिन जब बच्चा बड़ा होगा तो बुरी लगेंगी।”

आप अक्सर यह बात सुनती होंगी कि अपना घर तो अपना ही होता है और चाहे हम किसी भी महंगी या सस्ती जगह चले जाएं, लेकिन जो सुकून घर में मिलता है, वह कहीं नहीं मिलता। दरअसल, घर चाहे छोटा हो या बड़ा, परिवार के लिए काफी मायने रखता है। अगर घर में छोटे बच्चे हैं तो कैसे वातावरण में पल-बढ़ रहे हैं, घर के अंदर कैसा माहौल है और किस तरह से घर की साफ-सफाई का ध्यान रखा जाता है, इसका बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास पर बहुत प्रभाव पड़ता है।
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Parenting Tips - फोटो : pixabay
बच्चे के साथ जुड़ाव

रवि ने पत्नी प्रियंका के साथ मूवी जाने का प्रोग्राम बनाया और चार साल के बेटे वंश को पड़ोस में छोड़ कर जाने लगा। इस पर प्रियंका ने रवि से कहा, “अगर हम अपनी खुशी के लिए बच्चे को कुछ देर भी अकेला छोड़ेंगे तो वह तन्हा महसूस करेगा और ये बातें उसे हमारे साथ भावनात्मक रूप से जुड़ने नहीं देंगी। अगर कहीं घूमने भी जाना है तो वंश के साथ ही चलेंगे।” सही भी है, क्योंकि बच्चों का पहला घर आप ही होते हैं। इसलिए माता-पिता को बच्चों के साथ भावनात्मक रूप से जुड़ने की कोशिश करनी चाहिए। बच्चों को यह महसूस हो कि वे चाहे किसी भी स्थिति में हों, माता-पिता हमेशा उनका साथ देंगे। इससे बच्चों को घर में सुरक्षा की भावना महसूस होती है।

अच्छा व्यवहार

आप बच्चों के सामने अपनी जैसी छवि पेश करती हैं, उम्र भर वे आपको वैसा ही समझते हैं। अगर आप उनकी रोल मॉडल बनकर दिखाएंगी और उनके साथ हमेशा अच्छा व्यवहार करेंगी तो वे आपको हमेशा इज्जत और सम्मान देंगे। लेकिन अगर आप उन्हें इसी समय प्यार और समय नहीं दे पाएंगी तो वे आपको हमेशा नफरत की नजर से देखने लगेंगे।
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पेरेंटिंग टिप्स - फोटो : Istock
पहली सीख घर से

मधु अपनी ढाई वर्षीय बेटी के साथ खेल रही थी। बातों-बातों में उसने समझाया, “बड़ों के साथ हमेशा आदर से पेश आना चाहिए और उनके नाम के साथ जी लगाना चाहिए। इस पर मासूम-सी आवाज में आहना बोली, “मम्मी जी!” इतना सुनते ही मधु मुस्कुरा दी। असल में, बच्चे माता-पिता से ही सबसे पहले सीखते हैं, इसलिए कहा जाता है कि माता-पिता बच्चे के पहले शिक्षक होते हैं। अगर आपके बच्चे को स्वस्थ और दोस्ताना वातावरण मिलेगा तो वह चीजों को जल्दी से सीखना शुरू कर देगा और अच्छी बातें ज्यादा गंभीरता से सीख पाएगा।

छुपन-छुपाई क्यों नहीं

पीहू बार-बार अपनी मम्मी (मेघा) से मोबाइल देने की जिद कर रही थी। पीहू की दादी मेघा से बोलीं, “आजकल बच्चों को स्मार्ट गैजेट्स से शुरुआत में ही परिचित करा दिया जाता है, जिसके कारण वे हमेशा फोन में लगे रहते हैं। लेकिन घर में ऐसा माहौल बनाना चाहिए कि बच्चे को ऑफ लाइन खेलने के लिए भी कुछ मिल सके।” फिर उन्होंने पीहू से कहा, “आओ चलो, छुपन-छुपाई खेलते हैं। मोबाइल गेम से भी ज्यादा मजा आएगा।” सच में पीहू को बहुत मजा आया। वैसे भी आपको खुद से शुरुआत करनी होगी और पहले खुद फोन से थोड़ी दूरी बनानी होगी, तब बच्चे भी आपके साथ खेलने के इच्छुक बन सकेंगे।
 
 

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parenting Tips - फोटो : istock
अच्छा खाना, अच्छा मूड

आज के समय में बाजार में जंक फूड भरा पड़ा है और बच्चों को यह इतना पसंद आता है कि अगर वे एक बार खाना शुरू करते हैं तो रोज खाने की जिद करते हैं। ऐसे में आपको बच्चे के विकास के लिए जंक फूड को बंद करके उन्हें पौष्टिक भोजन देना चाहिए। बच्चे को कभी-कभार ही जंक फूड देना सही है। उनके शारीरिक विकास के लिए पौष्टिक चीजें ही उचित हैं।

“बच्चों के आचार-व्यवहार के साथ-साथ उनका कमरा कैसा है, यह भी बहुत मायने रखता है।” स्पर्धा ने सोनल से कहा तो उसने पूछा, “कैसे?” आप भी जान लीजिए कि कैसे बच्चे के विकास में उसके कमरे की साज-सज्जा सहायक है।
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parenting Tips - फोटो : pixabay
कमरे का रखरखाव

बच्चों को व्यवस्थित रखने के लिए जरूरी है कि उनके कमरे को भी व्यवस्थित रखा जाए। कई बच्चे काफी शरारती होते हैं और कमरे को फैलाकर रखते हैं। ऐसे बच्चों के कमरे को सही तरीके से व्यवस्थित करना बहुत जरूरी है। अगर आप अनेक रंगों का उपयोग कर उनके कमरे को सजाती हैं तो बच्चा इसको लेकर आकर्षित हो सकता है और अपनी किसी भी चीज को गुम किए बिना आसानी से ढूंढ सकता है।

कला-चित्र का उपयोग

बच्चे के कमरे में हाथ से बनी चीजों का उपयोग उसे आकर्षित करती हैं। हाथ से बनी ये चीजें बाजार में आसानी से मिल जाती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, बच्चे की मनपसंद चीजों से कमरे को सजाना उसके विकास में सहायक होता है, क्योंकि इससे बच्चा अपने कमरे और चीजों से जुड़ाव महसूस करता है। आप ऐसी चीजें भी उसके कमरे में रख सकती हैं, जो रात में चमकती हों, ताकि वह रात में अकेले सोने से न डरे।
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parenting Tips - फोटो : istock
चित्रकारी, तस्वीरें और पोस्ट कार्ड

सार्थक को अपने कमरे में रहना बहुत पसंद है, क्योंकि जब वह तीन साल का था, तभी से उसे दीवार को सफेद बोर्ड के तौर पर इस्तेमाल करने दिया गया। सार्थक को चित्रकारी का शौक भी था। बस क्या था, वह अक्सर चाक या स्केच पैन से नई-नई चीजें बनाता रहता था। इस तरह उसे अपनी प्रतिभा उभारने में मदद मिली। आकाश को कागज के टुकड़ों को जोड़ने का बहुत शौक था। वह दो साल का था, तभी से कार्ड और पोस्ट कार्ड एकत्र कर उन्हें दीवारों पर चिपकाता था। फिर उन पर स्केच पेन से चित्रकारी करता था। आकाश को देख उसके दोस्तों में भी फन एक्टिविटी विकसित हुई। जानकारों के अनुसार, आप चाहें तो उनके कमरे में अलग-अलग पोस्ट कार्ड और तस्वीरों को लगा सकती हैं। इनको रस्सी की मदद से जोड़कर लटका सकती हैं। इस तरह की एक्टिविटी बच्चे के स्क्रीन टाइम को कम करती है।

मनपसंद कार्टून का पोर्ट्रेट

अगर बच्चे किसी पालतू पशु या कार्टून के साथ रहकर खुश हैं तो उनके कमरे में उसका कोई पोर्ट्रेट लगाना बच्चे को बहुत प्रिय होता है। बच्चा खुशी महसूस करता है, जो उसके मानसिक विकास में सहायक होती है। माता-पिता चाहें तो स्टेंसिल की मदद से ऐसा कर सकते हैं। अगर चिपकाना न चाहें तो प्रोजेक्टर की मदद से बच्चे को ऐसी मूवी दिखा या फन एक्टिविटी करा सकते हैं। आप किसी भी आकृति को काटकर दीवार पर चिपका सकती हैं। इस तरह कमरा सजाना काफी आसान भी है।
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parenting Tips - फोटो : Istock
चारो ओर बॉर्डर

अक्सर बच्चों के कमरे में बच्चों की तस्वीरों वाले चार्ट और कुछ बोरिंग पेंटिंग लगी होती हैं, जो आज के समय में काफी आम बात है। इसलिए आप बच्चों के कमरे के चारो ओर कुछ इंटरेस्टिंग बॉर्डर लगवा सकती हैं। नॉन टॉक्सिक वाटर बेस्ड पेंट से इन बॉर्डर को हर महीने अच्छी तरह और आसानी से धोया जा सकता है। बच्चों के कमरे की साफ-सफाई भी इस तरह आसानी से की जा सकती है।

शुरुआत के पांच साल

दिल्ली विश्वविद्यालय के आर्यभट्ट कॉलेज में मनोविज्ञान विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर वर्षा सिंह कहती हैं, घर के सदस्यों में आपसी बॉन्डिंग कैसी है, माता-पिता में प्यार और लगाव कैसा है, ये सारी बातें बच्चे के विकास को बहुत प्रभावित करती हैं। बच्चों के विकास के लिए एरिक्सन का सिद्धांत अपनाना जरूरी है। यह सिद्धांत बताता है कि बच्चे का विकास कैसे हो रहा है, उसका किस प्रकार ध्यान रखा जा रहा है। ये कुछ ऐसी बातें हैं, जिनसे बच्चे में आत्मविश्वास बढ़ता है, वह भावनात्मक रूप से मजबूत बनता है। वहीं अगर घर में झगड़ा या नकारात्मक माहौल रहता है तो इसका उसके मानसिक विकास पर विपरीत असर पड़ता है।

बच्चे के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए शुरू के पांच वर्ष बहुत महत्वपूर्ण होते हैं। जितना ज्यादा बच्चे से संवाद रहेगा, प्यार भरा माहौल रहेगा, बच्चा उतना ही सुखद अनुभव करेगा, जो उसके विकास में सहायक होगा। अगर आप बच्चे के सामने अभद्र शब्दों का उपयोग करती हैं तो बच्चा भी अपशब्द ही सीखेगा। अगर आप बच्चे को सामाजिक व्यवहार सिखाती हैं, जैसे सॉरी बोलना, थैंक्यू बोलना, तो बच्चा इन बातों को सीखेगा।
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parenting Tips - फोटो : istock
एक थीम होनी चाहिए

इंटीरियर डिजाइनर वारिजा बजाज कहती हैं, अगर हम बच्चों के कमरे के इंटीरियर की बात करें तो उसमें उसके खेल-खिलौने होने चाहिए, बच्चों के कमरे की भी एक थीम होनी चाहिए। बच्चों के ही नहीं, बल्कि बड़ों के कमरे भी किसी न किसी थीम के अनुसार बने होने चाहिए। बच्चों के कमरे में उनकी पसंद के मुताबिक फर्नीचर रखना ठीक रहता है। इससे बच्चा अपने कमरे में खुश होकर समय बिताता है। अगर आप चाहती हैं कि बच्चे के मस्तिष्क के साथ-साथ उसका शारीरिक विकास भी ठीक तरह से हो तो उसके कमरे की डिजाइन भी ऐसी होनी चाहिए, जहां बच्चा खुद को फ्री महसूस करें।
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