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Parenting tips: बच्चों के सामने इन 5 बातों को कहने से बचें

Thu, 08 Sep 2022 05:53 PM IST
स्वाति शर्मा लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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आपकी कही हर बात समझता है बच्चा - फोटो : istock
बच्चों को लेकर बड़े यानी वयस्कों की अक्सर यह सोच होती है कि बच्चे कुछ नहीं समझते और उनके सामने कुछ भी कहा जा सकता है, इससे उन्हें क्या फर्क पड़ेगा। जबकि बच्चे आपकी हर बात को रजिस्टर कर रहे होते हैं। जो भी आप उनके सामने कहते हैं उसका असर न केवल उनके मन पर पड़ता है बल्कि बार बार वही बात कहे जाने पर यह सोच उनके व्यक्तित्व का हिस्सा भी बन सकती है। यह बात 4 साल के बच्चे तक पर लागू होती है। 

कभी गुस्से, चिढ़ या अन्य किसी परिस्थिति के चलते आप बच्चे को ऐसी बात कह जाते हैं जो उसके पूरे व्यक्तित्व पर चोट करने वाली होती है। कहने के बाद आप तो कुछ देर में उसे भूल भी जाते हैं और आपको लगता है कि बच्चा भी इसे भूल गया होगा लेकिन हमेशा याद रखिये, बच्चे आपकी हर बात को गंभीरता से लेते हैं और उसको लेकर बकायदा विश्लेषण भी करते हैं। 
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निराशा में डूब सकता है बच्चा - फोटो : सोशल मीडिया
बच्चों के दिमाग पर पड़ता असर

जब भी बच्चे के व्यक्तित्व या व्यवहार से जुड़ी कोई बात बच्चे से कही जाती है, उसका दिमाग उसे तुरंत प्रोसेस करना शुरू कर देता है। ऐसी स्थिति में वह या तो परिस्थितियों को इसके लिए दोष देता है या फिर खुद को दोषी समझने लगता है। बार बार ऐसा कुछ कहे जाने पर वह खुद के प्रति नकारात्मक रुख अपना सकता है, सबको अपना दुश्मन समझ सकता है, हीनता का भाव मन में ला सकता है। इसलिए चाहे आपका मूड खराब हो या बच्चे से कोई गलती हो जाए, ध्यान रखें कि बच्चे को उसके लिए दोषी मानकर उसे कड़वी बात न कहें। यह बच्चे के सेल्फ स्टीम को नुकसान पहुंचा सकता है और इसका असर लम्बे समय तक बना रह सकता है। इतना ही नहीं कई बार यह हमेशा के लिए बच्चे के व्यक्तित्व को प्रभावित कर देता है। 
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कारण जानने की कोशिश करें
बातें जो करती हैं गलत असर 

ऐसी 5 बातें जो बच्चे के मन पर बुरा असर डाल सकती हैं, वे हैं-

सुबह सुबह मूड ऑफ़ कर दिया

आप बच्चे को स्कूल छोड़ने जा रहे हैं। हो सकता है बस छूट गई हो या बच्चे का मन स्कूल जाने का न हो और वह किसी बहाने से देर किये जा रहा हो या रो रहा हो तो बजाय यह कहने के बच्चे को धैर्य से यह कहें कि स्कूल उसके लिए जरूरी है और अगर उसे कोई समस्या है तो वह आपसे खुलकर कह सकता है। अगर समस्या ऐसी है जो शांति से बताई जा सकती है तो उसे कहें कि आज घर आने के बाद आप उसके साथ स्पेशल टाइम बितायेंगे और साथ में आइसक्रीम या कोई मजेदार चीज खाते हुए दोस्तों की तरह प्रॉब्लम शेयर करेंगे। याद रखिये आपके डांटने, झुंझलाने या चिढ़ने से बच्चे को उत्साह नहीं मिलेगा। बल्कि अगर सच में उसे कोई समस्या है तो वह मन में उस चीज को दबा लेगा क्योंकि उसे लगेगा कि इससे पापा-मम्मी गुस्सा होंगे। जब आप उससे समस्या सुनने का वादा करें तो उसे उसी दिन किसी भी हाल में निभाएं भी। 

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बच्चे को दुखी कर सकते हैं आपके शब्द - फोटो : pexels.com
तुम्हारी वजह से आज मुझे देर हो गई

दफ्तर जाना हो, किसी पार्टी में या किसी जरूरी काम से घर से निकलना हो, अगर आपका टाइम मैनेजमेंट गड़बड़ है तो उसका दोष बच्चे पर कभी न डालें। ये देर नहीं होती अगर आप और 15 मिनिट पहले तैयारी शुरू कर लेते/लेतीं। अगर आप बच्चे को इसके लिए दोषी ठहराएंगे तो हो सकता है कि दोषी महसूस करते हुए वह अपराधबोध से भर जाए। इतना ही नहीं फिर बाकी समय उसके मन में यही बात घूमती रह सकती है कि आज मम्मी या पापा को मेरी वजह से देर हुई और इसका बुरा असर उसके पूरे दिन पर पड़ सकता है। यदि आप रोजाना किसी जगह साथ जाते हैं जैसे आप दफ्तर जाते समय बच्चे को स्कूल छोड़ते हैं या किसी एक्टिविटी क्लास के लिए आप साथ घर के निकलते हैं तो कोशिश करें कि आपके पास अतिरक्त 15 मिनिट का समय कम से कम रहे। 
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बच्चे को प्रोत्साहित करें, दबाव न डालें - फोटो : istock
तुम तो किसी से घुलते मिलते ही नहीं!

हर व्यक्ति की अलग प्रकृति होती है और उसी के आधार पर वह व्यवहार करता है। हो सकता है आपके पड़ोस में रहने वाला कोई बच्चा बहुत मिलनसार या सोशल हो। वह खुद आगे होकर सबसे नमस्कार या बात कर लेता हो, सारे बच्चों के साथ खेल लेता हो, लेकिन आपके बच्चे को शांति से बैठकर किताबें पढ़ना, ड्राइंग करना या कम बातें करना पसंद हो। ऐसे में उसे बार बार यह न कहें कि बाकी बच्चे क्या कर रहे हैं। हो सकता है आप उसका उत्साह बढ़ाने के लिए ऐसा कर रहे हों लेकिन इसका उस पर उलटा असर भी पड़ सकता है। यह तुलना बार बार किये जाने पर उसके मन में खुद के लिए हीन भावना पैदा कर सकती है। वह खुद को उपेक्षित महसूस कर सकता है, कमतर मान सकता है। यदि आप बच्चे को सबसे मिल जुलकर रहना सिखाना भी  चाहते हों, तो भी धैर्य से धीरे धीरे कोशिश करें, कभी भी बार बार बोलकर या दबाव डालकर उसे मजबूर न करें। 
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धीरज से पूछें पूरी बात - फोटो : istock
एक बार में समझ क्यों नहीं आता तुम्हें!

यह वह वाक्य है जो अमूमन हर माँ-पिता अपने बच्चे से एक ही दिन में कई बार भी कह देते हैं लेकिन क्या कभी आपने गौर किया कि ये कहते समय स्थिति क्या होती है? हो सकता है बच्चा किसी उधेड़बुन में आपकी बात न सुन पाया हो या हो सकता है आप किसी उधेड़बुन में लगे हों और उसे ठीक से बात बता न पाए हों। ऐसा हमारे साथ भी तो कई बार होता है कि कोई हमसे कुछ कह रहा होता है और हम किसी और चीज में उलझे होने की वजह से उसे सुन और समझ नहीं पाते। हमारा दिमाग उस बात को रजिस्टर ही नहीं कर पाता और हम बार बार क्या, क्या कर के सामने वाले को चिढ़ा देते हैं। तो जब बच्चा आपकी बात एक बार में न समझ पाए तो बजाय चिढ़ने के सबसे पहले बच्चे का हाथ धीमे से पकड़कर उसे वह बात धैर्य से बताएं। अगर बच्चा अभी भी किसी उधेड़बुन में खोया है तो आपको उसे और समय देकर सुनने की जरूरत है। हो सकता है बच्चा किसी परेशानी में हो और आपसे कह न पा रहा हो। आपके अधीर होने और चिढ़ने से वह अपनी बात कहने से और पीछे हट सकता है। इसलिए उससे आराम से पूछें कि क्या वह कोई बात शेयर करना चाहता है। 
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काम पूरा न हो पाने पर ताना न दें
छोड़ो, तुमसे न हो पायेगा!
 
यह लाइन मीम्स में तो बहुत मजेदार लगती है लेकिन असल जिंदगी में यह बहुत नकारात्मक रूप भी ले सकती है। आपने खुद अगर कोई टास्क बच्चे को दिया है तो यह आपकी जिम्मेदारी है कि सोचें बच्चा उस काम को करने में सक्षम है भी या नहीं।  बिना सोचे आपने बच्चे को टास्क दे दिया और ऊपर से उसे ताना भी मार रहे हैं कि तुमसे न हो पायेगा। इसमें बच्चे की गलती बिल्कुल नहीं है। वह तो पहली बार उस काम को कर रहा है और हो सकता है वह काम उसकी क्षमता से आगे का हो। हो सकता है फिर भी वह प्रयास करके इस काम को पूरा कर ले लेकिन आपका उपरोक्त ताना उसको प्रयास करने से भी रोक देगा। इसलिए अगर काम सौंपा है तो बच्चे को प्रयास करने दें और यदि आपको काम का परिणाम ही चाहिए तो बच्चे को उसकी सामर्थ्य अनुसार काम सौंपें। 
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