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Parenting Tips: बच्चों को सिखाएं छह अहम बातें, बुद्धिमान के साथ ही बनेगा एक अच्छा इंसान

Sat, 14 Jun 2025 05:18 PM IST
शिवानी अवस्थी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला

सार

Parenting Tips: आप भी चाहती हैं कि आपका बच्चा नरम दिल का एक अच्छा इन्सान बने, साथ ही वह बुद्धिमान भी हो तो इसके लिए आपको उसमें बचपन से ही कुछ सॉफ्ट स्किल्स डेवलप करने होंगे।
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बच्चे को सिखाएं सॉफ्ट स्किल्स - फोटो : freepik.com
कंचन चौहान

आज की प्रतिस्पर्धा भरी दुनिया में केवल अच्छी पढ़ाई या टॉप ग्रेड ही काफी नहीं है, सफलता के लिए जरूरी है कि बच्चों के अंदर सॉफ्ट स्किल्स यानी व्यावहारिक और सामाजिक कौशल भी विकसित किया जाए। इसलिए माता-पिता को अपने बच्चों को बचपन से ही न सिर्फ किताबों का ज्ञान देना चाहिए, बल्कि जिंदगी से जुड़ी कुछ अहम बातें भी सिखानी चाहिए, ताकि वे आगे आने वाली परेशानियों का सामना आसानी से कर सकें।

संवाद कौशल

कम्युनिकेशन स्किल यानी अपनी बात को प्रभावी ढंग से, स्पष्ट रूप से और समझदारी भरे लहजे में दूसरे तक पहुंचाना। यह न केवल शब्दों का प्रयोग है, बल्कि इसमें सुनना, समझना, बॉडी लैंग्वेज और भावनाओं को व्यक्त करना भी शामिल है। अच्छे संवाद कौशल से बच्चा अपने मन की बात खुलकर प्रभावी ढंग से कह पाता है और दूसरों को भी बेहतर तरीके से समझ पाता है, जो उसके भविष्य के लिए बेहद जरूरी है।
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टीमवर्क - फोटो : adobe
इमोशनल इंटेलिजेंस

यह बच्चों की भावनात्मक बुद्धिमत्ता है, जो सोच और भावना को मिलाकर इच्छित निर्णय लेने की क्षमता बनाती है। सरल शब्दों में कहें तो यह भावनाओं के साथ अधिक चतुराई से पेश आना है। भावनात्मक बुद्धिमत्ता बच्चों को खुद को समझने, बेहतर निर्णय लेने और दूसरों से जुड़ने में मदद करती है। साथ ही यह स्किल बच्चों को मानसिक रूप से मजबूत भी बनाती है और वे कठिन परिस्थितियों में भी संतुलित रह पाते हैं।

टीमवर्क

ज्यादातर कामों में आपको एक टीम के तौर पर काम करना होता है। अच्छे टीमवर्क का मतलब है- सभी का एक साथ मिलकर काम करना। टीमवर्क बच्चों में दूसरों की राय का सम्मान करना, अपनी भूमिका निभाते हुए टीम के लक्ष्य पर ध्यान देना और मदद करने जैसी भावनाओं को विकसित करता है। यह गुण बच्चे को सहयोगी बनाता है और आगे चलकर प्रोफेशनल लाइफ में भी बेहद काम आता है।
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समय प्रबंधन - फोटो : freepik.com
प्रॉब्लम सॉल्विंग

यह एक अहम स्किल है, जो बच्चों को सोच-समझकर फैसले लेना और समस्याओं का समाधान करना सिखाती है। इस स्किल के माध्यम से बच्चा खुद पर भरोसा करता है और जिंदगी में आने वाली चुनौतियों से घबराता नहीं है।

समय प्रबंधन

हर कार्य को सही समय पर पूरा करना जीवन को सफल बनाने की कुंजी है। अगर बच्चे में यह कौशल विकसित हो जाए तो उसमें समय की अहमियत की समझ विकसित होती है और वह अनुशासित, जिम्मेदार और आत्मनिर्भर बनता है।
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किताबी ज्ञान तक सीमित न रखें - फोटो : freepik.com
आत्मनिर्भरता

अपने कामों और फैसलों के लिए खुद पर भरोसा करना और दूसरों पर कम निर्भर रहना सरल जीवन जीने का सबसे आसान रास्ता है। जब बच्चा आत्मनिर्भर बनता है तो उसका आत्मविश्वास बढ़ता है और वह मुश्किल हालात में भी सोच-समझकर सही निर्णय ले पाता है।

किताबी ज्ञान तक सीमित न रखें

बाल मनोवैज्ञानिक गार्गी मालगुड़ी बताती हैं, बच्चों को किताबी ज्ञान, खेल-कूद के साथ-साथ जीवन के उन पहलुओं की भी शिक्षा देनी चाहिए, जिनसे उनके संपूर्ण व्यक्तित्व का विकास हो और वे सामाजिक ढांचे में ठीक से रच-बस सकें। स्कूली शिक्षा के साथ कुछ सॉफ्ट स्किल्स, जैसे खुद को समाज में भावनात्मक और विचारात्मक तौर पर व्यक्त करने का तरीका, प्रॉब्लम सॉल्विंग एबिलिटी, सटीक बॉडी लैंग्वेज, टोन ऑफ वॉयस, हेल्दी नेगोसिएशन, टीमवर्क, न बोलना, खुद की बात या राय को ठीक ढंग से प्रकट करना, खुद की सीमाएं निर्धारित करना और दूसरे की सीमाओं का सम्मान करना बच्चों को जरूर सिखाएं, ताकि उनका आत्मविश्वास बढ़े और उन्हें सामाजिक स्तर पर अपनी एक पहचान मिले।
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