फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

मैरिज टिप्स: पत्नी और मां के बीच क्यों फंस जाते हैं कई पुरुष? जानिए असली कारण और समाधान

Sat, 29 Aug 2026 05:22 PM IST
शिवानी अवस्थी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला

सार

Relationship Tips: क्या पुरुष सच में पत्नी से ज्यादा मां को प्राथमिकता देते हैं?
हर पुरुष ऐसा नहीं करता। हालांकि कई परिवारों में पुरुष अपनी मां के साथ लंबे समय से बने भावनात्मक जुड़ाव, परवरिश, पारिवारिक जिम्मेदारियों और सामाजिक संस्कारों के कारण कई परिस्थितियों में मां को पहले महत्व देते हैं। वहीं एक स्वस्थ वैवाहिक जीवन के लिए मां और पत्नी, दोनों के प्रति सम्मान, संवाद और संतुलन बनाए रखना सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है।
विज्ञापन
1 of 6
शादी के बाद पत्नी या मां किसकी बात सुनते हैं पति - फोटो : AI

Mother Vs Wife Relationship: भारतीय परिवारों में शादी के बाद पति, पत्नी और मां के रिश्तों को लेकर अक्सर कई तरह की चर्चाएं होती हैं। कई बार यह सवाल उठता है कि कुछ पुरुष अपनी पत्नी की तुलना में मां की बात को ज्यादा महत्व क्यों देते हैं। यह विषय केवल भावनाओं का नहीं, बल्कि परिवार, संस्कार, परवरिश, जिम्मेदारियों और रिश्तों की गहरी समझ से भी जुड़ा हुआ है।

असल में हर परिवार की परिस्थितियां अलग होती हैं। कुछ पुरुष अपनी मां के प्रति गहरा भावनात्मक जुड़ाव महसूस करते हैं क्योंकि बचपन से लेकर युवावस्था तक मां ने उनके जीवन में सबसे बड़ी भूमिका निभाई होती है। वहीं शादी के बाद जीवन में पत्नी एक नई और महत्वपूर्ण साथी बनकर आती है। ऐसे में कई बार दोनों रिश्तों के बीच संतुलन बनाना आसान नहीं होता।

विशेषज्ञों का मानना है कि किसी एक रिश्ते को दूसरे से ऊपर रखना हर स्थिति में सही नहीं माना जा सकता। एक सफल परिवार वही होता है जहां पति अपनी मां का सम्मान बनाए रखते हुए पत्नी को भी बराबर महत्व दे। खुला संवाद, आपसी सम्मान और समझदारी ऐसे रिश्तों को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाते हैं।

विज्ञापन

2 of 6
बचपन से बना गहरा भावनात्मक जुड़ाव - फोटो : Adobe

बचपन से बना गहरा भावनात्मक जुड़ाव

  • अधिकांश पुरुषों का अपनी मां के साथ बचपन से ही मजबूत भावनात्मक रिश्ता होता है।
  • मां उनके पालन-पोषण, शिक्षा, बीमारियों और जीवन के हर महत्वपूर्ण पड़ाव में साथ रहती हैं।
  • वर्षों का यह जुड़ाव कई बार निर्णय लेने के तरीके को भी प्रभावित करता है।
  • इसका अर्थ यह नहीं कि पत्नी कम महत्वपूर्ण है, बल्कि पुराने रिश्ते की गहराई स्वाभाविक रूप से अधिक हो सकती है।
विज्ञापन

3 of 6
भारतीय परिवारों के संस्कार और सामाजिक सोच - फोटो : Adobe

भारतीय परिवारों के संस्कार और सामाजिक सोच

  • भारतीय समाज में माता-पिता की सेवा और सम्मान को महत्वपूर्ण मूल्य माना जाता है।
  • कई पुरुष बचपन से यही सीखते हैं कि माता-पिता की बात को प्राथमिकता देना उनका कर्तव्य है।
  • यही संस्कार शादी के बाद भी उनके व्यवहार में दिखाई देते हैं।
  • हालांकि आधुनिक परिवारों में पति-पत्नी के बीच साझेदारी और संयुक्त निर्णय लेने की प्रवृत्ति भी तेजी से बढ़ रही है।

4 of 6
जिम्मेदारियों का दबाव - फोटो : Adobe

जिम्मेदारियों का दबाव

  • शादी के बाद कई पुरुष एक साथ कई भूमिकाएं निभाते हैं, बेटे, पति, पिता और कमाने वाले सदस्य की।
  • यदि मां उम्रदराज़ हों, अस्वस्थ हों या आर्थिक रूप से उन पर निर्भर हों, तो उनकी देखभाल को प्राथमिकता देना स्वाभाविक हो सकता है।
  • यह स्थिति पत्नी के महत्व को कम नहीं करती, बल्कि पारिवारिक जिम्मेदारियों का हिस्सा हो सकती है।
विज्ञापन

5 of 6
संवाद की कमी से बढ़ती हैं गलतफहमियां - फोटो : Adobe

संवाद की कमी से बढ़ती हैं गलतफहमियां
 

  • कई बार पत्नी को लगता है कि उनकी बात नहीं सुनी जा रही, जबकि पति स्वयं दो महत्वपूर्ण रिश्तों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहे होते हैं।
  • यदि परिवार में खुलकर बातचीत न हो, तो छोटी-छोटी बातें भी विवाद का कारण बन सकती हैं।
  • नियमित संवाद, एक-दूसरे की भावनाओं को समझना और मिलकर निर्णय लेना ऐसे तनाव को कम कर सकता है।
विज्ञापन
विज्ञापन

6 of 6
रिश्तों में संतुलन जरूरी - फोटो : Adobe

रिश्तों में संतुलन जरूरी

  • रिश्ते किसी एक व्यक्ति को चुनने की प्रतियोगिता नहीं हैं।
  • एक सफल पति वही माना जाता है जो मां का सम्मान बनाए रखते हुए पत्नी के साथ विश्वास, सहयोग और समान भागीदारी का रिश्ता विकसित करे।
  • इसी तरह परिवार के अन्य सदस्यों के लिए भी आपसी सम्मान और सीमाओं का ध्यान रखना जरूरी है।
  • जब सभी एक-दूसरे की भूमिका को समझते हैं, तब परिवार में सामंजस्य और विश्वास मजबूत होता है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें