बॉलीवुड सिनेमाटोग्राफी की जानी-मानी आवाज और महान शख्सियत मोहम्मद रफी की आज 95वीं जयंती है। पंजाब के कोटला सुल्तान सिंह गांव में 24 दिसंबर 1924 को जन्मे मोहम्मद रफी ने अपनी आवाज से बॉलीवुड में कई अभिनेताओं को सुपरस्टार बनाया है। रफी साहब ने एक इंटरव्यू में खुद बताया था कि आखिर कैसे उन्हें गायकी का शौक लगा।
दरअसल बचपन में एक फकीर की आवाज ने मोहम्मद रफी को काफी प्रभावित किया था। उस फकीर का इस फनकार पर ऐसा असर पड़ा कि उन्होंने मन ही मन यह तय कर लिया कि अब उन्हें गायकी के मंच पर सुर बिखेरने से कोई नहीं रोक सकता। इश्क में कायल लोग रफी साहब की आवाज और उनके गानों के दीवाने हैं, पर क्या आप उनकी शादीशुदा जिंदगी से जरा भी वाकिफ हैं...
मोहम्मद रफी
इस बारे में शायद ही आप जानते होंगे की रफी ने दो शादियां की थी। उन्होंने अपनी पहली शादी की बात सबसे छिपाकर रखी थी। इस शादी के बारे में बस उनके घरवाले जानते थे। यह बात शायद कभी किसी को पता भी नहीं चलती अगर रफी की पुत्रवधू यास्मीन खालिद रफी की किताब बाजार में ना लातीं।
मोहम्मद रफी
यास्मीन की प्रकाशित किताब 'मोहम्मद रफी मेरे अब्बा..एक संस्मरण' में रफी की पहली शादी की बात का जिक्र किया गया है। किताब में लिखा है कि 13 साल की उम्र में रफी की पहली शादी उनके चाचा की बेटी बशीरन बेगम से हुई थी, लेकिन कुछ साल बाद ही दोनों अलग हो गये।
मोहम्मद रफी
रफी से उनकी पहली पत्नी बशीरा इसलिए अलग हुईं क्योंकि उन्होंने रफी के साथ भारत आने से मना कर दिया था। भारत और पाकिस्तान के बंटवारे के वक्त दंगों में बशीरा के माता-पिता की मौत हो गई थी। इन दंगों से वो इतनी डर गईं कि उन्होंने भारत में रहने से इनकार कर दिया और लाहौर में ही रुक गईं जबकि रफी अपना करियर आगे बढ़ाने के लिए मुंबई में ही रहे। इस शादी से उनका एक बेटा सईद हुआ था।
Mohammed Rafi
रफी के इस पहले विवाह के बारे में घर में सभी को मालूम था लेकिन बाहरी लोगों से इसे छिपा कर रखा गया था। घर में इस बात का जिक्र करना भी मना था क्योंकि रफी की दूसरी बीवी बिलकिस बेगम इसे बिल्कुल नापसंद करती थी और उन्हें बर्दाश्त नहीं था कि कोई इस बारे में बात करे। यदि कभी कोई इसकी चर्चा करता भी था तो बिलकिस बेगम और रफी के साले जहीर बारी इसे अफवाह कहकर बात को दबा देते थे।
मोहम्मद रफी
यास्मीन रफी ने अपनी किताब में यह भी लिखा हैं कि वह कभी यह नहीं समझ पाती थीं कि इस बात को छिपाने की क्या जरूरत है। 1944 में 20 साल की उम्र में रफी की दूसरी शादी सिराजुद्दीन अहमद बारी और तालिमुन्निसा की बेटी बिलकिस के साथ हुई। जिनसे उनके तीन बेटे खालिद, हामिद और शाहिद तथा तीन बेटियां परवीन अहमद, नसरीन अहमद और यास्मीन अहमद हुईं।