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Live-in Reletionship: क्या शादी से पहले साथ रहना सही? जानिए फायदे, नुकसान और कानूनी पहलू

Thu, 28 Aug 2025 01:06 PM IST
शिवानी अवस्थी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Live In Relationship: लिव इन रिलेशनशिप को मान्यता देनी है या नहीं, समाज और कानून की इसमें क्या प्रतिक्रिया है, वह समझने से पहले लिव इन रिलेशनशिप के फायदे और नुकसान जान लीजिए। 
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लिव इन रिलेशनशिप - फोटो : amar ujala
Relationship Tips: आज का युवा प्यार को खुलकर जीना चाहता है। शादी जैसे जिम्मेदारी पूर्ण रिश्ते में जाने से युवा कतराता है लेकिन अपने पार्टनर के साथ रहने की इच्छा जरूर रखता है। पाश्चात्य संस्कृति से आए लिव-इन रिलेशनशिप को तेजी से भारत के युवाओं ने अपनाया। लिव-इन रिलेशनशिप में कपल बिना शादी के एक साथ रहते हैं। शादी से पहले साथ रहकर एक दूसरे को समझना और जीवन को आसान बनाने के विकल्प को अपनाना लिव-इन रिलेशनशिप है। 

हालांकि भारतीय समाज में इस तरह के रिश्ते को अभी तक स्वीकार्यता नहीं मिल सकी है। भारतीय समाज जहां शादी को पवित्र बंधन माना जाता है, वहां बिना शादी साथ रहना अवैध की मान्यता रखता है। हालांकि युवाओं की रूचि के कारण लिव-इन को लेकर खींचतान और बहस जारी है। लिव इन रिलेशनशिप को मान्यता देनी है या नहीं, समाज और कानून की इसमें क्या प्रतिक्रिया है, वह समझने से पहले लिव इन रिलेशनशिप के फायदे और नुकसान जान लीजिए। 
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लिव-इन रिलेशनशिप के फायदे - फोटो : Adobe
लिव-इन रिलेशनशिप के फायदे

लिव-इन रिलेशनशिप का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह कपल को एक-दूसरे को गहराई से समझने का मौका देता है। शादी से पहले साथ रहकर आप अपने पार्टनर की आदतों, स्वभाव, गुस्से, लाइफस्टाइल और सोच को जान पाते हैं। इससे आगे चलकर शादी में तालमेल आसान हो जाता है। साथ ही, ऐसे रिश्ते में स्वतंत्रता और व्यक्तिगत स्पेस ज्यादा रहती है।

आर्थिक स्वतंत्रता

लिव-इन रिलेशनशिप में कपल आमतौर पर आर्थिक रूप से स्वतंत्र होते हैं। दोनों एक दूसरे पर निर्भर नहीं होते, जिससे दोनों को अपनी आर्थिक जिम्मेदारियों को शेयर करने में मदद मिलती है।

भावनात्मक निकटता

साथ रहने से उनके बीच एक दूसरे के साथ अधिक खुला संवाद हो पाता है। यह भावात्मक तौर पर उन्हें एक दूसरे के करीब लाता है, जिससे रिश्ता और मजबूत होता है।

तलाक की जटिलताओं से बचना

यही उनके साथ रहने पर भी रिश्ता काम नहीं करता तो वह आसानी से एक दूसरे से अलग हो सकते हैं। वह तलाक जैसी कानूनी जटिलताओं से बच सकते हैं।
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लिव-इन रिलेशनशिप के नुकसान - फोटो : Adobe stock
लिव-इन रिलेशनशिप के नुकसान और चुनौतियां
 
  • हर चमकती चीज सोना नहीं होती। लिव-इन रिलेशनशिप में कमिटमेंट की कमी सबसे बड़ा नुकसान है। विवाह जैसा मजबूत आधार न होने से रिश्ते में भरोसा खत्म हो सकता है और बिना भरोसे के लंबे समय तक रिश्ता नहीं निभाया जा सकता है।
  • जब चीजें सही नहीं चलतीं तो बिना कानूनी झंझट के अलग होना आसान होता है, लेकिन इससे मानसिक और भावनात्मक तनाव भी बहुत होता है।
  • इस तरह के रिश्ते को समान और परिवार द्वारा स्वीकार नहीं किया जाता है,  जिससे कपल को सामाजिक कलंक और आलोचना का सामना करना पड़ता है। साथ ही कई बार परिवार और समाज का दबाव रिश्ते पर भारी पड़ जाता है।
  • लिव-इन रिलेशनशिप में कपल पर कोई कानूनी प्रतिबद्धता नहीं होती है, ऐसे में संपत्ति और उत्तराधिकार जैसे मामलों में कानूनी सुरक्षा कम होती है।
  • सबसे बड़ी चुनौती तब आती है जब बच्चों की बात होती है, क्योंकि भारतीय कानून और समाज अभी इस व्यवस्था को पूरी तरह स्वीकार नहीं कर पाए हैं।

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लिव-इन पर भारतीय समाज की सोच - फोटो : Adobe stock
लिव-इन पर भारतीय समाज की सोच

भारतीय समाज में शादी को सिर्फ दो लोगों का नहीं, बल्कि दो परिवारों का मिलन माना जाता है। ऐसे में बिना शादी के साथ रहना अब भी बहुतों को विद्रोह जैसा लगता है। शहरी क्षेत्रों में यह ट्रेंड तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन गांवों और छोटे शहरों में इसे अब भी पाप या असभ्यता माना जाता है। यही वजह है कि ऐसे रिश्तों को लेकर समाज बंटा हुआ है।
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लिव-इन पर कानून और अधिकार - फोटो : Adobe
लिव-इन पर कानून और अधिकार

भारत में लिव-इन रिलेशनशिप अवैध नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने भी इसे मान्यता दी है, खासकर दो वयस्कों की सहमति के आधार पर। घरेलू हिंसा कानून के तहत लिव-इन पार्टनर भी सुरक्षा और अधिकार पा सकते हैं। हालांकि, विरासत और बच्चों के अधिकार को लेकर अब भी स्पष्टता नहीं है। 

लिव-इन रिलेशनशिप आधुनिक सोच और परंपरागत मूल्यों के बीच की जंग है। जहां यह रिश्ते को समझने का मौका देता है, वहीं इसमें स्थिरता और सामाजिक स्वीकृति की कमी रहती है। सही गलत का निर्णय व्यक्ति की जरूरतों, परिस्थितियों और सोच पर निर्भर है। भारतीय समाज धीरे-धीरे बदल रहा है, लेकिन अभी लंबा रास्ता बाकी है।
 
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