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Janmashtami 2025: क्या आपका साथी राधा रानी की तरह करता है सच्चा प्यार? इन संकेतों से करें पहचान

Fri, 15 Aug 2025 01:01 PM IST
शिवानी अवस्थी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Janmashtami 2025: अगर आप जानना चाहते हैं कि आपका साथी भी राधा की तरह समर्पित है या नहीं, तो इन संकेतों पर ध्यान दें।
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राधा कृष्ण के प्रेम के गुण - फोटो : Adobe stock
Janmashtami 2025: इस बार कृष्ण जन्माष्टमी 16 अगस्त 2025 को मनाई जा रही है। ये पर्व भगवान विष्णु के अवतार प्रभु श्रीकृष्ण के जन्म तिथि पर मनाया जाता है। कृष्ण जी का जन्म मथुरा में हुआ, बचपन गोकुल और वृंदावन में बीता, वहीं बरसाना में राधा रानी रहती थीं। राधा रानी कृष्ण जी की प्रियसी हैं। जब भी कान्हा का नाम लिया जाता है तो राधा रानी का नाम लेना तो अनिवार्य है। राधा और कृष्ण के प्रेम की गाथा सदियों से सुनी और सुनाई जा रही है। आज के दौर के आशिक भी राधा और कृष्ण जैसा प्रेम चाहते हैं। 

भगवान कृष्ण और राधा की प्रेम कथा भारतीय संस्कृति में सच्चे प्रेम और समर्पण का सर्वोच्च उदाहरण है। राधा का प्रेम न केवल रोमांटिक था, बल्कि त्याग, निस्वार्थता और आध्यात्मिक जुड़ाव से भरा हुआ था। अगर आप जानना चाहते हैं कि आपका साथी भी कृष्ण की राधा की तरह समर्पित है या नहीं, तो इन संकेतों पर ध्यान दें।
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हमेशा आपके सुख-दुख में साथ - फोटो : Adobe Stock
हमेशा आपके सुख-दुख में साथ

राधा रानी कृष्ण जी का बचपन का प्रेम ही नहीं थीं, बल्कि उनके सुख दुख की साथी भी थीं। जब भगवान कृष्ण मथुरा कंस का वध करने जा रहे थे तो राधा जी ने उन्हें रोका नहीं। वहीं जब कन्हैया ने गोकुल बरसाना छोड़ने का फैसला लिया तो भी राधा रानी ने उन्हें उनके कर्तव्य से विमुख नहीं होने दिया। सच्चा प्रेम सिर्फ खुशियों में नहीं, बल्कि मुश्किल वक्त में भी साथ देता है।
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आपकी कमियों को भी स्वीकार करना - फोटो : Adobe Stock
आपकी कमियों को भी स्वीकार करना

राधा ने कृष्ण को उनकी अच्छाइयों और कमियों सहित अपनाया था। कहते हैं राधा रानी गोरी और सुंदर थी, वहीं कन्हैया श्याम रंग के थे। कन्हैया की शरारते, उनकी माखन चोरी की कथाएं आदि सब सुनने और जानने के बाद भी राधा रानी कृष्ण से प्रेम करती थीं। मथुरा के राजा कंस कृष्ण को मारना चाहते हैं, इन बात ने भी राधा को कृष्ण से प्रेम करने के लिए विचलित नहीं किया। आपका साथी अगर आपको आपकी कमियों और परेशानियों के बाद भी अपनाएं तो समझिए उनका प्रेम भी राधा जैसा ही है।

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सपनों को पूरा करने में मदद करना - फोटो : instagram
सपनों को पूरा करने में मदद करना

राधा ने हमेशा कृष्ण का साथ दिया। वह भलीभांति जानती थीं कि कृष्ण का जन्म मथुरा के राजा कंस का वध करने के लिए हुआ है और उन्हें राजा बनना है। राधा रानी ने उनके सपनों और कर्तव्यों को पूरा करने में हमेशा उनका साथ दिया। एक समर्पित साथी हमेशा आपके लक्ष्यों और महत्वाकांक्षाओं में सहयोग देता है।
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भरोसे और वफादारी में अडिग - फोटो : Adobe stock
भरोसे और वफादारी में अडिग

राधा का प्रेम कभी डगमगाया नहीं, यही सच्चे रिश्ते की पहचान है। कृष्ण गोकुल-बरसाने की सभी गोपियों के साथ रास लीला करते थे। कान्हा की मुरली की धुन पर गोपियां और ग्वाल-बाल ही नहीं, जीव-जंतु तक मग्न हो जाते थे। लेकिन राधा में हमेशा कान्हा पर भरोसा किया। भगवान श्रीकृष्ण की 1008 रानियां थीं। हालांकि राधा के भरोसे और वफादारी के कारण ही उनका नाम हमेशा कृष्ण के साथ लिया जाता है।
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बिना शर्त प्यार करना - फोटो : Instagram
बिना शर्त प्यार करना

सच्चे प्यार में कोई शर्त नहीं होती। ऐसा प्यार जो किसी उम्मीद पर आधारित न हो, बल्कि सिर्फ दिल से हो। राधा रानी से भी कृष्ण से ऐसा ही प्यार किया। इस प्यार में साथ रहने, शादी करने आदि जैसी शर्ते नहीं थी। उनके बीच सिर्फ प्रेम था, जिसका उदाहरण सदियों सदियों तक दिया जाता रहेगा।
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