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Krishna Janmashtami 2025: कृष्ण जैसे मित्र की तलाश में हैं? जानिए कौन हो सकता है आपकी जिंदगी का ‘सुदामा'

Tue, 12 Aug 2025 02:16 PM IST
शिवानी अवस्थी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला

सार

Janmashtami 2025: इस वर्ष जन्माष्टमी 16 अगस्त 2025 को मनाई जा रही है। जन्माष्टमी के इस पावन अवसर पर, एक पल रुककर सोचें, क्या आपके जीवन में सुदामा जैसा कोई मित्र है? अगर है तो इस दिन उन्हें यह एहसास कराना न भूलें कि वे आपके लिए कितने खास हैं। 
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कृष्ण सुदामा की दोस्ती - फोटो : instagram
Janmashtami 2025: जन्माष्टमी केवल भगवान कृष्ण के जन्मोत्सव का पर्व नहीं है, बल्कि यह रिश्तों में प्रेम, भरोसा और त्याग की भी याद दिलाता है। कृष्ण-सुदामा की दोस्ती आज भी सच्चे मित्र के प्रतीक के रूप में मानी जाती है। दोनों के बीच न कोई लालच था, न कोई स्वार्थ सिर्फ अपनापन और एक-दूसरे के सुख-दुख में साथ खड़े रहने का वादा।

आज के समय में ऐसे सच्चे मित्र को पहचानना आसान नहीं है, लेकिन कुछ संकेत आपको मदद कर सकते हैं। एक सुदामा जैसा मित्र वह होता है जो आपकी सफलता से खुश हो, असफलता में आपका सहारा बने, और बिना कहे आपकी भावनाओं को समझ ले। ऐसा मित्र आपके जीवन में संतुलन और ताकत दोनों लाता है।

इस वर्ष जन्माष्टमी 16 अगस्त 2025 को मनाई जा रही है। जन्माष्टमी के इस पावन अवसर पर, एक पल रुककर सोचें, क्या आपके जीवन में सुदामा जैसा कोई मित्र है? अगर है तो इस दिन उन्हें यह एहसास कराना न भूलें कि वे आपके लिए कितने खास हैं। 
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निस्वार्थ प्रेम - फोटो : Adobe
निस्वार्थ प्रेम

श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता का सबसे बड़ा आधार निस्वार्थ प्रेम था। उनमें न कोई स्वार्थ था, न कोई लेन-देन का हिसाब। वे एक-दूसरे की खुशी और भलाई के लिए हर परिस्थिति में खड़े रहते थे। एक सच्चा दोस्त वही होता है, जो आपकी मदद सिर्फ आपके फायदे के लिए नहीं, बल्कि आपके सुख-दुख में साझेदारी के लिए करे। उनके बीच न लालच था और ना कोई स्वार्थ, सिर्फ अपनापन और एक दूसरे के सुख-दुख में साथ खड़े रहने की लालसा थी।
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अपनापन - फोटो : adobe

अपनापन

दोनों के जीवन में परिस्थितियाँ बदल गईं, कृष्ण द्वारका के राजा बने और सुदामा एक गरीब ब्राह्मण। फिर भी उनकी दोस्ती में कोई बदलाव नहीं आया। यह सिखाता है कि सच्ची दोस्ती में स्थिति, पैसा या सामाजिक हैसियत मायने नहीं रखती। असली दोस्त आपको आपकी असली पहचान से अपनाता है न कि आपके ओहदे या आपके पास क्या है, इस बात पर दोस्ती टिकी होती है।

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बिना कहे समझने की क्षमता - फोटो : Adobe

बिना कहे समझने की क्षमता

जब सुदामा द्वारका आए तो उन्होंने अपनी गरीबी या परेशानी का जिक्र नहीं किया। लेकिन कृष्ण ने उनके मन की बात बिना कहे समझ ली। सच्चा मित्र वही होता है जो आपकी भावनाओं और जरूरतों को शब्दों के बिना भी महसूस कर ले।

 
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आदर और सम्मान - फोटो : Adobe

आदर और सम्मान

कृष्ण ने सुदामा का स्वागत राजसी सम्मान के साथ किया, उनके पैर धोए और उन्हें गले लगाया। इससे पता चलता है कि असली दोस्त हमेशा आपका सम्मान करता है, चाहे आप जीवन में कहीं भी खड़े हों। दोस्ती में बराबरी और इज्जत सबसे अहम होती है।

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सुख-दुख में साथ - फोटो : adobe

सुख-दुख में साथ

सुदामा ने कृष्ण के साथ अपने बचपन के संघर्ष साझा किए थे और कृष्ण ने भी जीवनभर उनका साथ निभाया। सच्ची दोस्ती की पहचान यही है , मुश्किल वक्त में साथ रहना और खुशियों में दिल से शामिल होना।

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