आपने आज तक सिर्फ महिलाओं को पुरुषों की शिकायत करते देखा होगा। लेकिन इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि मर्दों को औरतें बिल्कुल परेशान नहीं करतीं। जी हां मर्द को भी दर्द होता है, वो अलग बात है कि महिलाओं को परेशान करने के मामले मीडिया में ज्यादा देखे जाते हैं इसलिए पहली बार में मर्दों से ज्यादा महिलाओं की बात को ही सच समझ लिया जाता है। जिसकी वजह से कई बार बेकसूर पुरुष भी फंस जाते हैं। ऐसे में लड़कों को भी महिलाओं की तरह अपने अधिकारों के बारे में पता होना चाहिए।
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मर्दों के दबते अधिकारों को देखते हुए आपको बताते हैं कि सिर्फ पति ही पत्नियों को प्रताड़ित नहीं करते बल्कि कई बार पत्नियां भी अपने पतियों को तंग करती हैं। ऐसे में मर्दों को अपने ये खास अधिकार जरूर पता होने चाहिए। अगर आप भी कभी ऐसी ही किसी मुसीबत में कभी फंस जाएं तो झूठ का सामना सच से कीजिए।
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पहला अधिकार यह है कि अगर कोई पत्नी शारीरिक या मानसिक तौर पर अपने पति को परेशान करती है तो पति उससे तलाक मांग सकता है। ऐसे में पति को सबसे पहले पुलिस में शिकायत करनी चाहिए क्योंकि कोर्ट में खुद की बात साबित करने के लिए यह कम्पलेंड बाद में काम आती है।
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पुरुषों की फजीहत तब ज्यादा होती है अगर पत्नी ही पति के खिलाफ पहले रेप या शारीरिक और मानसिक शोषण का झूठा मामला पुलिस में दर्ज करवा देती है। ऐसे में अगर केस दर्ज हो जाए तो याद रखें कि कोई भी असफल शादी रेप में नहीं बदल सकती और न ही ब्रेकअप करने पर आप बलात्कार के मुजरिम हो सकते हैं। ऐसे अपराध साबित करने पड़ते हैं।
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रेप केस में पुलिस का जांच अधिकार योग और वकील का रुख आरोप लगाने वाली महिलाओं के प्रति सहानुभूतिपूर्ण होता है। लेकिन इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि आप अपना पक्ष बिल्कुल नहीं रख सकते। ऐसे में आप अपने वकील को बुलाकर बताएं कि यह केस बिल्कुल झूठा है।
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याद रखें झूठे केस में शिकायतकर्ता, गवाहों, जांच अधिकारी और बायस्ड पुलिसकर्मियों पर भी केस किया जा सकता है। IPC की धारा 193 के अनुसार किसी रेप केस की सुनवाई के दौरान किसी मौके पर झूठे साक्ष्य पेश करने या साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ करने पर 7 साल तक की सजा और जुर्माना या दोनों हो सकते हैं।
किसी शख्स की प्रतिष्ठा या उसे नुकसान पहुंचाने के इरादे से गलत रेप केस करने वाले को दो साल तक की सजा या जुर्माना या फिर दोनों का ही दंड मिल सकता है। CRPC की धारा 340 के तहत रेप मामले में सहयोग देने वालों के ऊपर या उनका साथ देने वालों के ऊपर भी केस दर्ज हो सकता है।