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आपके फोन में मौजूद तस्वीरें बन सकती हैं आपके लिए मुसीबत,जानें कैसे

Thu, 24 Jan 2019 11:19 AM IST
मंजू ममगाईं बीबीसी हिंदी
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जमाखोरी जुर्म है।इसे करने पर लोगों को कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ता है लेकिन, क्या आप को पता है कि डिजिटल हो रही दुनिया में डिजिटल जमाखोरी भी हो रही है।ऐसा करने वालों को इसकी भारी कीमत भी चुकानी पड़ रही है।फिलहाल, डिजिटल जमाखोरी को रोकने के लिए कानून तो नहीं हैं।लेकिन, ऐसा करने वाले अपने लिए मुसीबतों का ढेर लगा रहे हैं।हो सकता है कि आप भी डिजिटल जमाखोरी कर रहे हों।चलिए इसका पता लगाते हैं।क्या आप के मोबाइल में तस्वीरों का अंबार लगा है? क्या आप के पर्सनल और ऑफिशियल ई-मेल अकाउंट में हजारों मेल जमा हैं? क्या आप के पेन ड्राइव में ढेर सारे गैरजरूरी डॉक्यूमेंट सेव हैं?

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अगर इन सभी सवालों का जवाब हां है, तो आप भी डिजिटल जमाखोरी कर रहे हैं।आज हमारे मोबाइल, लैपटॉप और कंप्यूटर की स्टोरेज लगातार बढ़ती जा रही है।इसके अलावा तमाम कंपनियां अपनी क्लाउड स्टोरेज सुविधाएं मुफ़्त में या बेहद मामूली दर पर दे रही हैं।नतीजा ये कि हम जरूरी डेटा के साथ-साथ हजारों गैरजरूरी 'बाइट्स' अपने मोबाइल, लैपटॉप या कंप्यूटर में जमा करते जा रहे हैं।ई-मेल, फोटो, डॉक्यूमेंट और दूसरे तरह की डिजिटल डेटा के पहाड़ हमें चारों तरफ से घेर चुके हैं।

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डेटा के ढेर बन रहे मुसीबत

आज दुनिया में ये डिजिटल जमाखोरी इस कदर बढ़ गई है कि अब ये बाकायदा रिसर्च का विषय बन गयी है।हम अपने काम के दौरान या फिर निजी इस्तेमाल के दौरान तमाम ऐसे डेटा को जमा करते जा रहे हैं, जिनकी शायद हमें कभी जरूरत ही न पड़े पर, इस डिजिटल जमाखोरी के नतीजे खतरनाक हो सकते हैं।ये डिजिटल जमाखोरी हमें तनाव देती है।इससे घिरे हुए कई बार हम धुनते हैं।

हो सकता है कि दफ़्तर के ई-मेल में हजारों मेल देखकर आपका दिल अपने बाल नोचने का करता हो।हर रोज आप इस ढेर को साफ करने की सोच कर काम शुरू करते हैं, फिर मेल का जखीरा देख कर आप इसे अगली बार पर टाल देते हों। ये ई-मेल और दूसरे डिजिटल डेटा का ढेर आपके लिए मुसीबत बनता जा रहा है।

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आपकी दिमागी सेहत पर असर डाल रहा है।बहुत से लोगों की आदत होती है कि काम होने के बाद भी मेल डिलीट नहीं करते।डॉक्यूमेंट बचाकर रखते हैं।तस्वीरें सहेजते रहते हैं।इस उम्मीद में कि आगे चल शायद इनकी कभी जरूरत पड़े।नतीजा ये कि जब जरूरत पड़ती है, तो हम डिजिटल कचरे के ढेर के नीचे ख़ुद को दबाते जा रहे हैं।

 

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डिजिटल जमाखोरी पर रिसर्च पेपर

डिजिटल जमाखोरी जुमले का इस्तेमाल सबसे पहले साल 2015 में एक रिसर्च पेपर में हुआ था।नीदरलैंड के वैज्ञानिकों ने वहां के एक आदमी के बारे में लिखा था कि वो हर रोज हजारों तस्वीरें खींचता था फिर घंटों उन तस्वीरों की प्रोसेसिंग का काम करता था।अखबार ने लिखा था कि, 'वो आदमी अपनी खींची तस्वीरों को दोबारा देखता भी नहीं था।लेकिन उसे ये लगता था कि भविष्य में ये तस्वीरें किसी न किसी काम जरूर आएंगी।'डिजिटल जमाखोरी को कुछ इस तरह से परिभाषित किया गया है, 'डिजिटल फाइलों का ढेर इस कदर लगाते जाना कि उन्हें सहेजने का मकसद ही कहीं गुम हो जाए।'

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ये जमाखोरी का एक नया रूप है, जिसे मनोवैज्ञानिक बीमारी कहते हैं।नीदरलैंड में तस्वीरों की जमाखोरी करने वाला आदमी पहले तमाम गैरजरूरी सामानों का ढेर लगाकर रखे हुए थे।ब्रिटेन की नॉरथम्ब्रिया यूनिवर्सिटी में डिजिटल जमाखोरी पर रिसर्च करने वाले निक नीव कहते हैं कि जैसे रोजमर्रा की जिंदगी में हम बेवजह की चीजों को हटाते नहीं, सहेज कर रखते रहते हैं, ठीक वैसा ही अब डिजिटल दुनिया में भी हो रहा है।निक कहते हैं कि,'जब आप असली जमाखोरों की बात करते हैं, तो लोगों को यही तो कहते हैं कि क्या बेवजह की चीजों का ढेर लगा रखा है, हटाओ सब।तो फौरन वो जवाब देगा कि शायद आगे चल कर इस में से कुछ काम आ जाए।यही हाल ई-मेल का ढेर लगाने वालों का होता है।'

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लोग क्यों जमा करते हैं डिजिटल डेटा?

निक नीव और उनकी टीम ने डिजिटल जमाखोरी पर रिसर्च के दौरान 45 लोगों से बात की।उनसे पूछा कि आखिर वो डिजिटल डेटा का ढेर लगाकर क्यों रखे हुए हैं? इन लोगों ने कई कारण गिनाए जैसे आलस, भविष्य में कोई चीज काम न आ जाए, किसी चीज को हमेशा के लिए डिलीट करने से अनजाना भय या फिर डेटा को किसी के खिलाफ इस्तेमाल करने के लिए सहेजना।डिजिटल जमाखोरी में अव्वल है ई-मेल।ज़्यादातर लोगों के निजी और दफ़्तर के ई-मेल अकाउंट में हजारों मेल पड़े होते हैं।

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ऑफिस की मेल न डिलीट करने के पीछे लोगों की यही सोच होती है कि कहीं भविष्य में उसकी जरूरत न पड़ जाए।जबकि हकीकत ये होती है कि ऐसी सहेजकर रखी गई ई-मेल हम शायद ही कभी दोबारा देखते या पढ़ते हैं।निक नीव कहते हैं कि, 'लोगों को पता होता है कि मेल का ये ढेर एक समस्या है लेकिन, तमाम संस्थानों के काम करने के तरीके की वजह से वो इन्हें डिलीट करने से हिचकते हैं।इस तरह ई-मेल का ढेर लगता जाता है।'हालांकि निक कहते हैं कि डिजिटल जमाखोरी पर रिसर्च अभी नई-नई है, तो तुरत-फुरत किसी नतीजे पर पहुंचना ठीक नहीं।

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डिजिटल डेटा से काम की चीज की तलाश मुश्किल

अक्सर हम सब ई-मेल के ढेर में से जरूरी मेल निकालने में मुश्किलें उठाते हैं।फोटो के ढेर में से जरूरत की तस्वीर खोजे नहीं मिलती।ऑस्ट्रेलिया की मोनाश यूनिवर्सिटी के दर्शन सेदारा पिछले कुछ साल से डिजिटल जमाखोरी पर रिसर्च कर रहे हैं।उन्होंने इस बारे में जितने लोगों से बात की, कमोबेश हर इंसान को डिजिटल डेटा से काम की चीज तलाशने में मुश्किल आई थी।दिसंबर 2018 में दर्शन सेदारा ने अपनी सहयोगी सचित्रा लोकुगे के साथ एक रिसर्च पेपर प्रकाशित किया था।इस में उन्होंने 846 लोगों से बात करने के बाद ये नतीजा निकाला था कि डिजिटल डेटा के ढेर में से जरूरी चीज तलाशने से उन्हें तनाव हुआ।बेवजह सामान जमा करने वाले लोगों में डिजिटल जमाखोरी की भी आदत पड़ जाती है।ऐसे लोग अक्सर तनाव का शिकार होते हैं।

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डेटा से नियंत्रण हट जाता है

अमरीका की विस्कॉन्सिन-व्हाइटवाटर यूनिवर्सिटी में आईटी की प्रोफेसर जो एन ओरावेक कहती हैं कि डिजिटल जमाखोरी का सिर्फ यही मतलब नहीं कि आपने ढेर सारा डेटा जमा कर रखा है।बल्कि असल में बात ये है कि हमारे पास जो डिजिटल डेटा जमा है, उसकी उपयोगिता का हमें अंदाजा है भी या नहीं? अगर हमें इन आंकड़ों की उपयोगिता का अंदाजा है, तो हम इसे डिजिटल जमाखोरी नहीं कह सकते।लेकिन प्रोफेसर एन कहती हैं कि जब हम बेवजह के डेटा जमा करने लगते हैं, तो ये जमाखोरी ही कहलाता है।इससे हमारे जहनी संतुलन पर असर पड़ता है।बहुत से लोगों को आंकड़ों के इस अंबार से मुश्किल होती है।वो परेशान हो जाते हैं।फाइलों में से जरूरी फाइल तलाशने में दिक़्कत होती है।यानी हम डेटा पर से नियंत्रण खो बैठते हैं।

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इस मुसीबत की जड़ स्टोरेज की बढ़ती उपलब्धता है।तमाम कंपनियां क्लाउड स्टोरेज की सुविधा बहुत कम कीमत पर देती हैं।इसके अलावा हमारे फोन और लैपटॉप में आंकड़े सहेजने की जगह बढ़ती जा रही है इसीलिए डिजिटल जमाखोरी भी बढ़ रही है।प्रोफेसर एन ओरावेक सलाह देती हैं कि आईटी कंपनियों को चाहिए कि वो डेटा स्टोरेज को लेकर जो सुविधाएं दे रही हैं, उन पर फिर से विचार करें।लोगों को भी चाहिए कि वो नियमित रूप से अपने सहेजे हुए डेटा को देखें और गौरजरूरी फाइलें समय-समय पर डिलीट करते रहें।सेल्फी का ढेर, अनदेखी ई-मेल और दूसरी बेवजह की फाइलों का ढेर लगाने का कोई फायदा नहीं। इनसे तनाव ही बढ़ता है।इन्हें हटाकर हम अपने डिजिटल खजाने पर सही तरीके से कंट्रोल कर सकते हैं।

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