स्वामीजी के कहने पर शादी की कसमों के लिए दोनों जोड़े खड़े हुए। दोनों जोड़े स्वामीजी के कहे मंत्र दोहराने लगे- "शादी केवल शारीरिक संबंध नहीं है। ये दिलों में प्रेम और आध्यात्मिक समझदारी पर आधारित है। हम एक दूसरे को समझेंगे और मिल कर एक जिंदगी बिताएंगे। हम अपने निजी स्वार्थ से आगे बढ़ कर ईश्वर के काम और दानधर्म को अपना कर समाज की भलाई, खुशी और बेहतरी के लिए काम करते रहेंगे। इसके साथ-साथ हम अपने जीवन में धर्म, राष्ट्र, पर्यावरण और परिवार में रहने के बारे में भी जागरूक रहेंगे। हम ईर्ष्या, अंधविश्वास, अंध विश्वास और काले जादू से दूर रह कर एक जागरूक जीवन जिएंगे। हम निष्कलंक जीवन व्यतीत करेंगे, औरों के धन, उनकी जगह पर नज़र नहीं रखेंगे, ना ही उनकी यातना और आरोप के पात्र बनेंगे।