प्रतीकात्मक तस्वीर
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मनोरंजन से भरपूर
ये कहानियां उसी अंदाज में लिखी गई हैं जिस अंदाज में अलिफ-लैला लिखी गई है, जोकि मनोरंजन से भरपूर है। 'द परफ्यूम्ड गार्डन' में समलैंगिकता पर भी ख़ूब खुलकर चर्चा की गई है। बर्टन ने अपने तर्जुमे में 21 चैप्टर सिर्फ़ इन्हीं विषयों पर लिखे हैं। बहुत से लोगों का कहना है कि बर्टन इस किताब का दूसरा भाग द सेंटेड गार्डेन के नाम से लिखने वाले थे। लेकिन इससे पहले ही उनकी मौत हो गई। बाद में उनके बहुत से काम को उनकी बीवी इज़ाबेल ने आग के हवाले कर दिया।
धार्मिक मान्यता
अरबी साहित्य की जानकार सारा इर्विंग का कहना है कि आज भले ही अरब देशों में सेक्स के ज़िक्र तक से बचा जाता है। मगर, एक ज़माना था जब अरब देशों में सेक्स का लुत्फ बयान करने वाली किताबों को धार्मिक मान्यता प्राप्त थी। माना जाता था कि ये किताबें इंसान को जिस्मानी रिश्ते बनाने की सही तालीम देती हैं।
लिहाजा इन्हें भगवान का वरदान माना जाता था, लेकिन आज अरब देशों में सेक्स एक बड़ा हौवा बना हुआ है। ऐसा नहीं है कि वहां के लोग सेक्स नहीं करते या सेक्स की ख्वाहिश नहीं होती। लेकिन वो इस विषय पर बात करने से कन्नी काटते हैं। उनके लिए इस विषय पर बात करना किसी तीसरी दुनिया की बात करने जैसा है।