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जन्माष्टमी 2026: कृष्ण के ये 7 गुण अगर बच्चे में आ जाएं, तो जिंदगी भर नहीं होगी किसी चीज की कमी!

Fri, 04 Sep 2026 07:54 AM IST
शिवानी अवस्थी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

भगवान कृष्ण का जीवन और उनका दिया भगवद्गीता का ज्ञान बच्चों के व्यक्तित्व विकास के लिए कई प्रेरणाएं देता है। गीता में बुद्धि, ज्ञान, क्षमा, सत्य, इंद्रिय-संयम, मन की शांति, निडरता और करुणा जैसे गुणों का उल्लेख मिलता है।
 
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कृष्ण के गुण बच्चे को सिखाएं - फोटो : Ai
Krishna Janmashtami 2026: हर माता-पिता की सबसे बड़ी इच्छा होती है कि उनका बच्चा पढ़ाई में अच्छा होने के साथ-साथ संस्कारी, समझदार, दयालु और आत्मविश्वासी भी बने। आज के प्रतिस्पर्धी दौर में बच्चों के लिए केवल अच्छे नंबर या बड़ी नौकरी ही सफलता का पैमाना नहीं हैं। असली सफलता तब मानी जाती है, जब बच्चा मुश्किल परिस्थितियों में भी सही फैसला ले सके, दूसरों का सम्मान करे और अपने मन पर नियंत्रण रखना सीखे।

भगवान कृष्ण का जीवन और उनका दिया भगवद्गीता का ज्ञान बच्चों के व्यक्तित्व विकास के लिए कई प्रेरणाएं देता है। गीता में बुद्धि, ज्ञान, क्षमा, सत्य, इंद्रिय-संयम, मन की शांति, निडरता और करुणा जैसे गुणों का उल्लेख मिलता है।

इसीलिए अगर माता-पिता चाहते हैं कि उनका बच्चा केवल सफल ही नहीं, बल्कि एक अच्छा इंसान भी बने, तो कृष्ण के आदर्शों से जुड़े कुछ गुण उसके व्यक्तित्व में विकसित किए जा सकते हैं। यह जरूरी नहीं कि बच्चे को धार्मिक उपदेश ही दिए जाएं। रोजमर्रा की छोटी-छोटी आदतों, माता-पिता के व्यवहार और सही उदाहरण के जरिए इन गुणों को बच्चे के जीवन का हिस्सा बनाया जा सकता है।

तो आखिर भगवान कृष्ण के वे कौन से 7 गुण हैं, जिन्हें हर मां अपने बच्चे में देखना चाहती है? आइए जानते हैं और यह भी समझते हैं कि माता-पिता इन्हें बच्चों में कैसे विकसित कर सकते हैं।

 
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कृष्ण के गुण बच्चे को सिखाएं - फोटो : Ai
1. क्या सत्य बोलना बच्चे को मजबूत व्यक्तित्व देता है?

भगवद्गीता में सत्य को महत्वपूर्ण गुण माना गया है। बच्चे को हर परिस्थिति में सच बोलने के लिए प्रोत्साहित करना उसके व्यक्तित्व में विश्वास और जिम्मेदारी पैदा करता है।

माता-पिता क्या कर सकते हैं?
  • गलती होने पर बच्चे को तुरंत डांटने के बजाय सच बताने का अवसर दें।
  • खुद भी बच्चे के सामने ईमानदारी का उदाहरण पेश करें।
  • बच्चे को समझाएं कि गलती स्वीकार करना कमजोरी नहीं, साहस है।
  • सच बोलने पर उसकी सराहना करें।

सवाल: बच्चा झूठ बोले तो क्या करें?

जवाब: केवल सजा देने के बजाय यह समझने की कोशिश करें कि उसने झूठ क्यों बोला। डर, दबाव या डांट से बचने के लिए बोला गया झूठ हो सकता है।
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कृष्ण के गुण बच्चे को सिखाएं - फोटो : Ai
2. क्या आत्मसंयम बच्चे को जीवन में आगे बढ़ने में मदद करता है?

कृष्ण के संदेश में आत्मसंयम और इंद्रियों पर नियंत्रण को महत्वपूर्ण माना गया है। गीता में मन और इंद्रियों के नियंत्रण तथा स्थिरता को ज्ञान और अच्छे जीवन से जोड़ा गया है। 

आज बच्चों के सामने मोबाइल, गेमिंग, सोशल मीडिया और मनोरंजन के अनेक विकल्प हैं। ऐसे में आत्म-नियंत्रण एक बेहद उपयोगी जीवन कौशल बन जाता है।

बच्चे में आत्मसंयम कैसे विकसित करें?
  • स्क्रीन टाइम के स्पष्ट नियम बनाएं।
  • पढ़ाई, खेल और मनोरंजन के बीच संतुलन रखें।
  • हर मांग तुरंत पूरी न करें।
  • बच्चे को इंतजार करना और अपनी इच्छा को नियंत्रित करना सिखाएं।
आत्मसंयम वाला बच्चा केवल पढ़ाई में ही नहीं, बल्कि आगे चलकर करियर और रिश्तों में भी बेहतर निर्णय ले सकता है।

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कृष्ण के गुण बच्चे को सिखाएं - फोटो : Ai
3. क्या करुणा और दया बच्चे को अच्छा इंसान बनाती है?

भगवद्गीता में सभी जीवों के प्रति करुणा को दैवी गुणों में शामिल किया गया है। हर मां चाहती है कि उसका बच्चा केवल अपने बारे में न सोचे, बल्कि दूसरों की भावनाओं को भी समझे।

बच्चे में दया कैसे बढ़ाएं?
  • जरूरतमंद की मदद करने के लिए प्रेरित करें।
  • पशु-पक्षियों के प्रति संवेदनशीलता सिखाएं।
  • बच्चे की भावनाओं को ध्यान से सुनें।
  • उसे छोटे भाई-बहन और दोस्तों के साथ चीजें शेयर करना सिखाएं।
  • किसी कमजोर या अलग बच्चे का मजाक उड़ाने से रोकें।

याद रखें कि बच्चे अक्सर वही सीखते हैं जो वे माता-पिता को करते हुए देखते हैं। इसलिए करुणा सिखाने का सबसे प्रभावी तरीका स्वयं उसका उदाहरण बनना है।
 
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कृष्ण के गुण बच्चे को सिखाएं - फोटो : Ai
4. क्या क्षमा करना बच्चे को भावनात्मक रूप से मजबूत बनाता है?

गीता में क्षमा, सहनशीलता और धैर्य जैसे गुणों को महत्व दिया गया है। बच्चों में छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा या नाराजगी होना सामान्य है। लेकिन धीरे-धीरे उन्हें यह सिखाना जरूरी है कि हर गलती का जवाब बदले से नहीं दिया जाता।

बच्चे को क्षमा कैसे सिखाएं?
  • किसी दोस्त से झगड़ा होने पर शांत होकर बात करने को कहें।
  • बच्चे को अपनी भावनाएं शब्दों में व्यक्त करना सिखाएं।
  • हर छोटी गलती को बड़ा मुद्दा न बनाएं।
  • माफी मांगने और माफ करने, दोनों का महत्व समझाएं।
इससे बच्चा भावनात्मक रूप से अधिक संतुलित बन सकता है और रिश्तों को बेहतर तरीके से संभालना सीख सकता है।
 
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जन्माष्टमी - फोटो : Ai
5. क्या शांत और स्थिर मन बच्चे की सबसे बड़ी ताकत बन सकता है?

भगवद्गीता में शांति, मन का संतुलन और आत्मनियंत्रण महत्वपूर्ण गुणों के रूप में बताए गए हैं। परीक्षा में कम नंबर आना, खेल में हारना या किसी दोस्त से विवाद होना, बच्चे के लिए बड़ी चुनौती हो सकती है। ऐसे समय में माता-पिता का व्यवहार बच्चे को सिखाता है कि असफलता से कैसे निपटना है।

बच्चे में मानसिक संतुलन कैसे विकसित करें?
  • हारने पर उसे अपमानित न करें।
  • असफलता को सीखने का अवसर बताएं।
  • बच्चे की तुलना दूसरे बच्चों से न करें।
  • उसे समस्या पर चर्चा करने का मौका दें।
  • गुस्से में तुरंत प्रतिक्रिया देने के बजाय कुछ देर शांत रहने की आदत डालें।

सवाल: क्या शांत बच्चा कमजोर होता है?

जवाब: बिल्कुल नहीं। शांत रहकर सही निर्णय लेना कई परिस्थितियों में भावनात्मक मजबूती का संकेत हो सकता है।
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कृष्ण के गुण बच्चे को सिखाएं - फोटो : Ai
6. क्या ज्ञान और सही निर्णय लेने की क्षमता बच्चे को समझदार बनाती है?

गीता में बुद्धि, ज्ञान और भ्रम से मुक्त होकर सही समझ विकसित करने को महत्वपूर्ण बताया गया है। इसका अर्थ केवल किताबों की जानकारी हासिल करना नहीं है। बच्चे को यह समझना भी जरूरी है कि किसी परिस्थिति में सही और गलत के बीच कैसे निर्णय लिया जाए।

बच्चे में बुद्धिमत्ता कैसे विकसित करें?
  • उसके सवालों को दबाने के बजाय जवाब देने की कोशिश करें।
  • उसे किताबें पढ़ने की आदत डालें।
  • किसी निर्णय के फायदे और नुकसान पर चर्चा करें।
  • हर समस्या का समाधान तुरंत बताने के बजाय उससे पूछें, "तुम्हें क्या लगता है?"
  • बच्चों को सवाल पूछने और तर्क करने की स्वतंत्रता दें।
इस तरह बच्चा धीरे-धीरे ज्ञान के साथ बुद्धिमत्ता भी विकसित कर सकता है।
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7. क्या धैर्य और दृढ़ निश्चय बच्चे को मुश्किलों से लड़ना सिखाते हैं?

कृष्ण से जुड़े आदर्शों में कठिन परिस्थितियों के बीच कर्तव्य और सही मार्ग पर टिके रहने की प्रेरणा मिलती है। गीता में स्थिरता, दृढ़ता और धैर्य जैसे गुणों का भी उल्लेख है। आज बच्चों को छोटी असफलता के बाद निराश होने के बजाय प्रयास जारी रखना सीखना चाहिए।

बच्चे में दृढ़ निश्चय कैसे बढ़ाएं?
  • छोटे और वास्तविक लक्ष्य तय करवाएं।
  • हर सफलता पर केवल परिणाम नहीं, प्रयास की भी तारीफ करें।
  • असफल होने पर कहें, "चलो, देखते हैं अगली बार क्या बेहतर कर सकते हैं।"
  • बच्चे को कठिन काम से तुरंत भागने की आदत न डालें।
  • उसकी तुलना किसी दूसरे बच्चे से करने के बजाय उसके अपने पिछले प्रदर्शन से करें।
धैर्यवान बच्चा धीरे-धीरे चुनौतियों को डर के बजाय सीखने के अवसर के रूप में देखना सीख सकता है।
 
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