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महिला दिवस विशेष: अपने इन अधिकारों के बारे में जान लें महिलाएं

Tue, 15 Mar 2016 03:33 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला
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कानून - फोटो : getty images
साल 2011 में सुप्रीम कोर्ट के द्वारा दिए एक फैसले के मुताबिक आईपीसी के सेक्शन 497 के तहत किसी भी महिला को विवाहोत्तर सबंधों के लिए दोषी करार नहीं कर सकता। यहां तक की कानून किसी महिला को ऐसे सबंधों के लिए उकसाने के नाम पर भी दोषी नहीं ठहराया जा सकता।
 
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महिला दिवस विशेष: महिलाएं बिना थाने जाए ईमेल से भी दर्ज करा सकती हैं शिकायत

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कानून - फोटो : getty images
पुलिस किसी भी महिला को सूरज उगने से पहले या सूरज ढलने के बाद हिरासत में नहीं ले सकती। इसके लिए उसके पास लिखित में पर्याप्त कारणों के साथ सबूत होना चाहिए।
 
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कानून - फोटो : getty images
दिल्ली पुलिस एक महिला को ये छूट देती है कि वो घटनास्थल के अलावा किसी भी थाने में अपनी एफआईआर दर्ज करा सकती है और इसे करने से कोई भी थाना इंकार नहीं कर सकता।
 

महिला दिवस विशेष: महिलाएं बिना थाने जाए ईमेल से भी दर्ज करा सकती हैं शिकायत

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कानून - फोटो : getty images
कोड ऑफ क्रिमिनल प्रोसीजर के सेक्शन 51 के तहत हिरासत में ली गई महिला की जांच या फिर उसे गिरफ्तार करने का अधिकार सिर्फ महिला पुलिस को है। कोई पुरुष उससे गिरफ्तार नहीं कर सकता।
 
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महिला दिवस विशेष: महिलाएं बिना थाने जाए ईमेल से भी दर्ज करा सकती हैं शिकायत

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कानून - फोटो : getty images
दिल्ली पुलिस ने महिलाओं को ये अधिकार दिया है कि वो अपनी शिकायत को बिना सामने आए ईमेल या फिर रजिस्टर्ड पोस्ट से भी दर्ज करा सकती है जिसे बाद में संबंधित थानेदार उसे घटना से संबंधित थाने के पास पुष्टि के लिए भेज सकता है और एफआईआर दर्ज करता है।
 
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आईपीसी के अनुछेद 38(1) और 21 के तहत रेप पीड़ित महिला को ये अधिकार है कि वो अपना इलाज मुफ्त में कराए। 
 
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इसके अलावा महिलाओं के साथ थाने में शिकायत दर्ज कराने के नाम पर कई बार बुरा बर्ताव होता है जिससे बचाने के लिए जरुरी है कि वो किसी वकील के साथ ही जाए ताकि उसके साथ होने वाले बर्ताव का वो साक्षी हो।
 

अनुछेद 39(ए) के तहत महिला और पुरुषों को काम के स्थान पर एक समान वेतन का आधार है।

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अनुछेद 39(ए) के तहत महिला और पुरुषों को काम के स्थान पर एक समान वेतन का आधार है। 
 

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रेप या यौन उत्पीड़न की शिकार महिला को ये जरुरी नहीं है कि वो थाने जाकर ही बयान दे। अपने घर पर भी बयान दे  सकती है।
 

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मेटेरनिटी बेनिफिट ऐक्ट 1961 के अनुसार  किसी भी गर्भवती महिला को इस आधार पर नहीं नौकरी से नहीं निकाला जा सकता है कि वो गर्भवती है।
 

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क्रिमिनल प्रोसीजर कोड के सेक्शन 160 के मुताबिक एक महिला को बिना कोर्ट आए इस बात कि छूट है कि वो एक महिला कॉस्टेबल की मौजूदगी में घर पर ही जबाव दे।
 
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रेप से पीड़ित महिला को ये अधिकार है कि वो बिना एफआईआर दर्ज कराए किसी डॉक्टर से अपना इलाज करा सकती है।

 
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