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किशोरावस्था में यदि आपका बच्चा भी पलटकर देने लगा है जवाब तो इस तरह से सुधारिए आदत

Mon, 04 Jan 2021 08:39 AM IST
तेजस्वी मेहता लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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बढ़ते बच्चे अक्सर चिढ़चिढ़े होने लगते हैं - फोटो : Social Media

बच्चे जैसे- जैसे बड़े होते हैं, उनमें बहुत सारे परिवर्तन आते हैं। सब से ज्यादा जो परिवर्तन चिंता का विषय बनता है वो है व्यवहार। बढ़ते बच्चे अक्सर चिढ़चिढ़े होने लगते हैं, उन्हें बार-बार लगता है कि उन्हें कोई समझता नहीं है। हार्मोनल परिवर्तनों के कारण भी वे थोड़े अजीब से होने लगते हैं। बच्चे छोटे होते हैं तो वे अपने मम्मी- पापा की बात को सुनते हैं लेकिन कई सारे बच्चे बड़े होने के बाद अपने माता-पिता को पलटकर जवाब देने लगते हैं, उनकी बातों को मानते नहीं है, जो कि अच्छी आदत नहीं है क्योंकि आगे चलकर यह आदत उन्हीं का भविष्य प्रभावित कर सकती है। अगली स्लाइड्स से जानिए कि किस तरह से बच्चों की इस आदत को सुधारा जाए। 

 

 

 

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मनोस्थिति को समझें - फोटो : pixabay

टोकना छोड़ दें
कई बार बच्चे जब किसी एक ही बात से बहुत ज्यादा चिढ़ जाते हैं तो वे एकदम से उठाकर अपने बड़ों को जवाब दे देते हैं इसलिए बच्चे की उम्र के हिसाब से मनोस्थिति को समझें। उसे एक ही बात के लिए बार-बार टोकना छोड़ दीजिए क्योंकि आप एक ही बात बार-बार कहेंगे तो उनके मन में तरह-तरह के विचार आएंगे कि आप उनके साथ ऐसा क्यों कर रहे हैं इसलिए इस आदत को छोड़ दें।

 

 

 

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छोटी-छोटी चीजें भी गंभीरता से बार-बार न पूछें - फोटो : social media

ज्यादा सवाल- जवाब न करें
बच्चे से बहुत छोटी-छोटी चीजें भी गंभीरता से बार-बार न पूछें जैसे कि यदि वो कहीं बाहर गया थो तो कहां गया था पूछना आपका हक है लेकिन क्या लड़कियों के साथ गया था और क्या जरूरत थी जाने की, जैसे सवालों को पूछकर आप उसे कुछ उल्टा जवाब देने के लिए खुद से मजबूर कर रहे हैं क्योंकि ऐसा करने पर उसे महसूस हो सकता है कि आप उसपर विश्वास नहीं करते हैं। 

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बच्चा उल्टा जवाब देने के बारे में सोच ही नहीं सकेगा - फोटो : social media

हां या न कहने का ही मौका दें
यदि आप बच्चे को कोई काम बता रहें हैं या कुछ जानना चाह रहे हैं तो अपने सवाल को इस तरह से प्रस्तुत करें कि वह बच्चे पर नकारात्मक प्रभाव न डाले और साथ ही वो आपको हां या न में ही जवाब दे सके। उसे बहुत अधिक बहानेबाजी करने का मौका ही न दें। जैसे कि आप इस तरह से काम बता सकते हैं कि ‘बेटा, मैं बाहर जा रही हूं तो तुम दूध तो ले ही लोगे न’? ऐसी स्थिति में बच्चा उल्टा जवाब देने के बारे में सोच ही नहीं सकेगा।

 

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वे अपनी बात को अच्छे से आपसे साझा कर सकें - फोटो : Pixabay
अपनी बात कहने का मौका दें
बच्चे के मन में बहुत सारे सवाल होते हैं, संशय होते हैं। ऐसे में ये आपकी जिम्मेदारी है कि आप बच्चे को समय और ऐसा माहौल दें कि वे अपनी बात को अच्छे से आपसे साझा कर सकें। इस बात को समझिए कि यदि उन्हें ऐसा वातावरण नहीं मिलता है तो वे फिर आपके खाना खा लिया? जैसे सवालों पर भी उखड़कर ही जवाब देंगे क्योंकि उनके दिमाग में जरूर कुछ चल रहा है। 
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