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जिस क्लिनिक में मैं काम करता हूं, वो एक घर के बैठक वाले कमरे की तरह है। वहां सिर्फ तीन आरामदायक कुर्सियां हैं, एक मेरे लिए और बाकि दो क्लाइंट्स के लिए। वहां मेरे पास मेरे परिवार की कोई फोटो नहीं है और न ही अन्य निजी सामान। इससे लोगों से दूरी बनाए रखने में मदद मिलती है। क्लाइंट अकेले भी मुझसे बात करने आते हैं और जोड़े में भी। कुछ साल पहले 29 साल के रॉब अकेले मेरे पास आए थे क्योंकि वो अपनी नई गर्ल फ्रेंड के साथ अपने यौन संबंधों को लेकर चिंता में थे। उनकी गर्ल फ्रेंड को इन सब का बहुत अनुभव था लेकिन उन्हें नहीं। वो थेरपी में अपनी गर्लफ्रेंड को शामिल नहीं करना चाहते थे क्योंकि वो इसे लेकर शर्मिंदा महसूस कर रहे थे।