स्मार्टफोन चलाते बच्चे
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एक प्राइवेट कंपनी में कार्यरत भूमिका कहती हैं कि आधुनिक जीवनशैली में परिवार एकल हो गए हैं। ऐसे में अक्सर नए-नए अभिभावक बने कपल्स बच्चों को सही से नहीं संभाल पाते हैं। वह बच्चों की जरा-सी शैतानी और रोने को भी बर्दाश्त नहीं कर पाते हैं, ऐसे में वह या तो बच्चों को खेल लगाने के लिए लाउड म्यूजिक चला देते हैं या फिर उनके हाथ में स्मार्टफोन थमा देते हैं। पेरेंट्स यह भूल जाते हैं कि स्मार्टफोन की किरणें न सिर्फ बच्चों की आंखों के लिए हानिकारक हैं बल्कि स्वास्थ्य पर भी इनका घातक दुष्परिणाम होता है।