छोटा-बड़ा, जात-पात, ऊंच-नीच जैसी कई चीजें हैं जिससे समाज में भेदभाव पहले से ही फैला हुआ है। हमारे समाज में लैंगिक भेदभाव भी गंभीर मुद्दा है जिसकी वजह से पुरुष और महिलाओं के बीच की खाई पाटना आज भी मुश्किल है। सबसे दुखद तो ये है कि इसका बुरा असर बच्चों पर पड़ रहा है। हम आज भी अपने लड़कों को यही सिखाते हैं कि, 'लड़के रोते नहीं है वो बहादुर और मजबूत होते हैं।' वहीं लड़कियों को सिखाया जाता है कि, 'उनकी ताकत बुद्धि नहीं बल्कि रूप संवारने में है।' ऐसे करना कितना सही है? कहीं आप भी तो उन मां-बाप में शामिल नहीं जो अपने बच्चों के बीच लैंगिक भेदभाव करते हैं।