फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Sisters Day 2025: पक्की सहेली चाहिए? याद रखें, बहन ही तो है सबसे मजबूत रिश्ता

Sat, 02 Aug 2025 09:00 PM IST
शिवानी अवस्थी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला

सार

Friendship Day 2025 Special With Sisters: पापा की डांट हो, करियर की बात हो या जीवन से जुड़ा कोई बड़ा फैसला, आप सबसे पहले बहन से साझा करती हैं, क्योंकि आप भी जानती हैं कि वह आपको कभी गलत सलाह नहीं देगी और कुछ गलत हो जाने पर आपका साथ भी नहीं छोड़ेगी। इसीलिए कहते हैं, बहनों से अच्छी सहेलियां कोई और हो ही नहीं सकतीं।
विज्ञापन
1 of 7
बहन या दोस्त - फोटो : Adobe
अंशु सिंह

अच्छी और सच्ची सहेलियां वे होती हैं, जिन्हें कुछ भी समझाने की जरूरत नहीं पड़ती। वे अनकही बातों और भावनाओं को सहजता से भांप लेती हैं और जजमेंटल नहीं होती हैं। यह सच्ची दोस्ती हमें कभी बचपन में ही मिल जाती है, कभी स्कूल-कॉलेज में तो कभी ऑफिस में, लेकिन सच कहें तो बहन के रूप में मिली दोस्त का मुकाबला कोई नहीं कर सकता है। वह एक बेहतरीन तोहफा होती है, जो माता-पिता हमें देते हैं। यह कुदरत का रचा ऐसा खूबसूरत संबंध है, जो निश्छल, निस्वार्थ प्रेम एवं अटूट विश्वास पर आधारित है। बचपन से ही बहन के साथ कुछ साझा यादें होती हैं। बहन परछाई की भांति संग-संग रहती है। बढ़ती उम्र के साथ उसका व्यक्तित्व एवं आदतें भले ही जुदा हो जाएं, लेकिन एक-दूजे को दूसरों से कहीं बेहतर समझती है।

इसलिए जब बात दोस्ती की हो तो बहनों से अच्छी सहेलियां कोई और हो नहीं सकतीं। दिल्ली के एक सरकारी उपक्रम में अधिकारी सुपर्णा शर्मा कहती हैं, “अपनी बहन की सबसे अच्छी दोस्त होने का मतलब है कि आपको आलोचना की चिंता नहीं करनी पड़ती। न ही खुद को संभालने की जरूरत होती है। जब आप किसी लक्ष्य या सपने की ओर बढ़ती हैं तो वह परदे के पीछे आपके उतार-चढ़ाव को देख लेती है और आपकी उपलब्धियों का जश्न मनाती है, क्योंकि वह जानती है कि अमुक मुकाम तक पहुंचने के लिए आपने कितनी मेहनत की है।” सच्चे अर्थों में इसे ही दोस्ती कहा जाता है।
विज्ञापन

2 of 7
खट्टे-मीठे अहसास - फोटो : Adobe
खट्टे-मीठे अहसास

साथ-साथ बड़े होना। शरारत करना, लड़ना-झगड़ना, खेलना-कूदना, पढ़ना, घूमना, मौज-मस्ती करना। अमूमन हर भाई-बहन की जीवन यात्रा में ये सारे लम्हे एवं अनुभव शामिल होते हैं। भाई न भी हो तो दो बहनें भी आपस में इसी तरह के खट्टे-मीठे पलों के साथ सयानेपन की ओर बढ़ती हैं। बाकी संबंधों की तरह इनके रिश्ते का ताना-बाना भी एक अलग तरीके से बुनता है। या तो वे एक-दूसरे के करीब आती हैं, उनकी आपसी समझ, तालमेल वक्त के साथ बढ़ता है या उनके विचारों में असमानता आने से दूरियां बन जाती हैं। मनोवैज्ञानिक कहते हैं, अगर आपकी बहन के साथ आपका मनमुटाव हो गया है तो आपको रिश्ते को सुधारना और फिर से बनाना चाहिए। अपनी बहन के साथ दोस्ती के लिए जगह बनाना, जीवन भर अपनी भावनात्मक, संज्ञानात्मक, आध्यात्मिक और शारीरिक खुशहाली बनाए रखने का सबसे आसान तरीका है।
विज्ञापन

3 of 7
आत्मविश्वास बढ़ता है - फोटो : Instagram
आत्मविश्वास बढ़ता है

हर इन्सान को अपने जैसे व्यक्ति की तलाश रहती है, जो उसका हमदर्द हो, उसके राज को राज रख सके, जिससे बेझिझक, बेखौफ होकर अपनी बात साझा की जा सके और जो मुंह पर सच कहने की हिम्मत रखता हो। महिलाओं को भी ऐसे दोस्त की चाहत रहती है, जो जज करने के बजाय उन्हें समझे, उनकी भावनाओं का सम्मान करे, कमजोरियों को नजरअंदाज कर विशेषताओं को देखे, शिक्षक बनकर प्रोत्साहित करे तो डांटने से भी पीछे न रहे।

दिल्ली की स्कूल शिक्षिका मालिनी कहती हैं, "बचपन से मैं अपनी बड़ी बहन शिवांगी के बेहद करीब रही हूं। माता-पिता के शहर से बाहर जाने पर वे मेरा जिस तरह ध्यान रखती थीं, उसे भूल पाना मुश्किल है। उनसे ही सीखा है कि किसी की निस्वार्थ सेवा कैसे की जाती है। दीदी की ईमानदारी एवं साफ दिल की मैं हमेशा कायल रही। उनसे कभी कोई बात छुपाई नहीं। विश्वास था कि वे कभी गलत सलाह नहीं देंगी। 15 वर्ष पहले वे सात समंदर पार जा बसीं, लेकिन जरूरत पड़ने पर आज भी सबसे पहले उन से ही सुझाव मांगती हूं। वह मेरी गाइड, मेंटर और दोस्त, तीनों ही हैं।" अध्ययन बताते हैं कि बहन से सकारात्मक रिश्ता हमारा आत्मविश्वास बढ़ाता है।

4 of 7
बहनें अच्छी सहेलियां - फोटो : Adobe
बहनें अच्छी सहेलियां

एनिमेशन आर्टिस्ट शुभी कहती हैं, "हर किसी का अपना एक खास व्यक्तित्व होता है। मेरी छोटी बहन रश्मिका और मैं हमेशा से दो बिल्कुल अलग इन्सान रहे हैं। मुझे गुलाबी रंग पसंद है, उसे सफेद। मैं पढ़ाई में अच्छी रही हूं, वह खेलों में। मुझमें धैर्य है, वह तुरंत बेचैन हो जाती है। मैं शांत स्वभाव की हूं और वह बातूनी, लेकिन वह जानती है कि अपनी बातों-विचारों को कैसे सशक्त तरीके से रखना है। मैंने उससे यह सीखा है और इसका मुझे काफी फायदा मिला है। हम बहनों के व्यक्तित्व भले ही अलग हों, लेकिन माता-पिता से एक जैसे संस्कार मिले हैं। उम्र में चार साल का फर्क होने के बावजूद हम अच्छी सहेलियां हैं, क्योंकि दोनों कभी एक-दूसरे का भरोसा नहीं तोड़ती हैं।"

अमेरिका की आयोवा स्टेट यूनिवर्सिटी में मानव विकास और पारिवारिक अध्ययन की एसोसिएट प्रोफेसर मेगन गिलिगन की मानें तो बहनों के बीच घनिष्ठ संबंध ज्यादा होते हैं, क्योंकि आम तौर पर महिलाओं के पारस्परिक संबंध अधिक मजबूत होते हैं। वह कहती हैं, "बेटियों को अपनी भावनाओं और संवेदनाओं को ज्यादा अभिव्यक्त करने और पुरुषों की तुलना में रिश्तों को ज्यादा महत्व देने के लिए सामाजिक रूप से तैयार किया जाता है, जबकि बेटों को परिवार के बाहर महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। भाई की तुलना में महिलाएं बहन के रूप में अपनी भूमिका को ज्यादा महत्व देती हैं।"
 
विज्ञापन

5 of 7
कभी प्रतिस्पर्धा भी - फोटो : Adobe
कभी प्रतिस्पर्धा भी

कुछ अध्ययनों से ये भी निष्कर्ष निकले हैं कि बहनों से अधिक नजदीकी तनाव का कारण भी बन जाती है। कई मामलों में देखा गया है कि बहन के रूप में एक-दूसरे से बहुत ज्यादा जुड़े होने से आपके लिए व्यक्तिगत पहचान बनाना मुश्किल हो सकता है। फिल्म अभिनेत्री काजोल ने अपने एक इंटरव्यू में स्वीकार किया था कि शुरुआत में जब उनकी बहन तनीषा फिल्मों में आई तो उन्हें थोड़ी जलन हुई। दोनों के रिश्ते भी कुछ हद तक प्रभावित हुए, लेकिन फिर बहनों ने आपस में सुलह कर ली। यही खूबसूरती है इस रिश्ते की। कहने का आशय है कि स्वस्थ दोस्ती और रिश्ते में संतुलन बनाने से चीजें आसान हो सकती हैं।

अमेरिका के मैरीलैंड विश्वविद्यालय में स्कूल ऑफ सोशल वर्क के प्रोफेसर और एडल्ट सिबलिंग रिलेशनशिप्स के सह-लेखक जेफ्री ग्रीफ कहते हैं, "आप अपने दोस्त चुन सकते हैं, लेकिन अपने भाई-बहन नहीं। वे आपके जीवन में हमेशा साए की तरह रहते हैं, चाहे अच्छा हो या बुरा। हालांकि हमारे अध्ययन के अनुसार, ज्यादातर लोग भाई-बहनों के बहुत करीब होते हैं और उनके साथ अच्छे दोस्त का रिश्ता होना सामान्य है।"
 
विज्ञापन

6 of 7
मां जैसा प्यार - फोटो : Istock
मां जैसा प्यार

बड़ी बहन का होना किशोर उम्र भाई-बहनों को अकेलेपन, अप्रियता, अपराधबोध, आत्मचेतना और भय की भावना से बचाता है। अगर बहन साथ हो तो जीवन में संतुष्टि भी अधिक होती है। कुछ समय पूर्व तलाक की जटिल प्रक्रिया से गुजरने वाली नूपुर पसोपेश में थीं कि जिंदगी कैसे नए सिरे से शुरू की जाए। उन्हें अपने चार साल के बेटे की फिक्र खास तौर पर सता रही थी, क्योंकि परिवार के नाम पर उनके पास बची थी तो सिर्फ एक छोटी बहन सोनाली। उसकी सारी जिम्मेदारी उन्होंने ही पूरी की थी, यानी माता-पिता को खोने के बाद नूपुर ने पहले सोनाली को वकालत कराई। उसकी एक अच्छे परिवार में शादी कराई, लेकिन जब वह स्वयं जीवन के एक संघर्षपूर्ण दौर से गुजर रही थीं तो वही छोटी बहन उनका भावनात्मक सहारा बनी।

नूपुर बताती हैं, "सोनाली मुझसे 6 साल छोटी है। मैंने कभी सोचा नहीं था कि एक दिन ऐसा आएगा कि सोनाली को मुझे संभालना पड़ेगा। लेकिन मैंने जितना उसे संभाला है, उतना ही उसने भी मुझे संभाला है। मैं कमजोर या अकेला न महसूस करूं, इसका वह खास ख्याल रखती है। हमारा रिश्ता सिर्फ बहन नहीं, बल्कि एक ऐसे दोस्त का है, जो गलत को गलत कहने से नहीं रोकता।"
 
विज्ञापन
विज्ञापन

7 of 7
मानसिक सेहत के लिए जरूरी - फोटो : Adobe
मानसिक सेहत के लिए जरूरी

बहनों के बीच दोस्ती के अपने फायदे और नुकसान हैं। कई बार एक ही पेशे में होने से आपसी प्रतिस्पर्धा एवं ईर्ष्या उत्पन्न होने लगती है, जो रिश्ते को खराब कर सकती है। लेकिन बहनें वो दोस्त होती हैं, जिनके साथ आप जिंदगी भर बात कर सकती हैं, जो माता-पिता से ज्यादा आपको समझती हैं। आप उदास होती हैं तो चीयरलीडर बन हंसाती हैं। गलती करने पर माफी मांगना सिखाती हैं। रिलेशनशिप काउंसलर रचना कहती हैं, “बहनों के बीच भावनात्मक बॉन्डिंग गहरी होने से वे अपनी भावनाओं पर बेहतर नियंत्रण रख पाती हैं।” कई अध्ययन भी बताते हैं कि अच्छे दोस्त आपकी सेहत के लिए अच्छे होते हैं। वे आपके साथ अच्छे पलों का जश्न मनाते हैं और बुरे समय में आपका साथ देते हैं। अगर कहीं आपका आत्मविश्वास हिलता है तो उसे वापस लाने में मदद करते हैं। वे हर कठिन समय में आपका सहारा बनते हैं और फिर जब दो बहनें ही अच्छी दोस्त हों, तब तो कहना ही क्या!


वो आपको संबल देती है

जामिया मिलिया इस्लामिया, दिल्ली में मनोविज्ञान विभाग प्रोफेसर डॉ. नावेद इकबाल कहते हैं, भाई-बहनों में बहनों का रिश्ता सबसे मजबूत और गहरा होता है। उनमें वर्षों तक संपर्क और गहरी दोस्ती बनाए रखने की ज्यादा संभावना होती है। दशकों तक चलने वाला बहनों जैसा मजबूत रिश्ता अक्सर बड़ी उम्र की महिलाओं के लिए सबसे अनमोल दोस्ती का आधार बन जाता है। जब बाकी लोग साथ छोड़ देते हैं तो बहने ही एक-दूसरे का संबल बनती हैं। वे एक-दूसरे को जज किए बिना अपने सारे डर साझा करती हैं।

मनोविज्ञान में दो बहनों के रिश्ते को जटिल एवं गतिशील माना जाता है। यह रिश्ता प्रेम, सहयोग एवं समझ का स्रोत हो सकता है। इसमें ईर्ष्या, प्रतिस्पर्धा, झगड़े, मतभेद एवं मनभेद हो सकते हैं, लेकिन वे उन गिले-शिकवों को दूर करने की पूरी कोशिश करती हैं। बहनें अक्सर मजबूत भावनात्मक बंधन विकसित करती हैं और अपनी भावनाओं के बारे में ज्यादा खुलकर बात कर सकती हैं। उनकी रुचियां और अनुभव समान हो सकते हैं, जिससे गहरी दोस्ती को बढ़ावा मिल सकता है। बहनें चुनौतियों के दौरान एक-दूसरे का साथ देने की ज्यादा संभावना भी रखती हैं, एक-दूसरे का भावनात्मक सहारा बनती हैं और संघर्ष की साथी बनती हैं, इसलिए आपको कोशिश करनी चाहिए कि यह संबंध लंबा चले।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें