परिवार
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अपने साथ शामिल करें
आप घर के बुजुर्गों को अपने साथ शामिल करें। उन्हें घरेलू गतिविधियों, बातचीत या उनके मनपसंद कार्यों में शामिल करें। यह उन्हें व्यस्त रखेगा, जिससे उनके स्वभाव में नरमी बनी रहेगी। इसके साथ ही हल्की-फुल्की सैर, योग या प्राणायाम जैसी गतिविधियां उन्हें मानसिक और शारीरिक रूप से अच्छा महसूस कराती हैं और मूड को भी स्थिर रखती हैं।
खुशियों के पल
रिलेशनशिप काउंसलर रुकैया जीरापुर बताती हैं, शारीरिक परेशानियों के अलावा बुजुर्गों पर कई ऐसी जिम्मेदारियां भी होती हैं, जिनको अब वे नहीं निभा सकते। खुद को ऐसे बंधा हुआ पाना उनके स्वभाव को चिड़चिड़ा बना देता है। इससे डील करने का यही तरीका है कि आप उनकी जिम्मेदारियों को समझें, समय का ध्यान रखें और उन्हें बखूबी निभाने का प्रयास करें, ताकि वे खुद को असहाय महसूस न करें। अक्सर माता-पिता को बस अपनी बात कहने की जरूरत होती है, इसलिए आप तसल्ली से उनकी बात सुनें और उनके विचारों को महत्व दें। साथ ही उनकी आर्थिक जरूरतों को पूरा करें, ताकि वे अपने भविष्य के बारे में चिंतित न हों। आप उन्हें सुरक्षित महसूस कराएं और उनकी पसंदीदा गतिविधियों में शामिल होकर उन्हें हंसाएं भी।