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Elder Care: क्या आपके घर के बड़े-बुजुर्ग भी हैं चिड़चिड़े, हो सकती है ये पांच वजह

Sat, 09 Nov 2024 04:19 PM IST
शिवानी अवस्थी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

असल में, उम्र के साथ शरीर में कई हार्मोनल बदलाव होते हैं, जो मानसिक स्थिति पर भी असर डालते हैं और अवसाद एवं चिड़चिड़ेपन को जन्म देते हैं। लेकिन आप इसे उम्र का एक पड़ाव समझकर नजरअंदाज न करें, बल्कि इस पर ध्यान देकर उनके स्वभाव में नरमी ला सकती हैं
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परिवार - फोटो : istock
कंचन चौहान

परिवार का आशीर्वाद होते हैं बड़े-बुजुर्ग, लेकिन कई बार उनका स्वभाव चिड़चिड़ा हो जाता है। आपको इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। परिवार में बड़े-बुजुर्गों का होना आशीर्वाद की तरह होता है, मगर कई परिवारों में बड़े-बुजुर्गों का स्वभाव चिड़चिड़ा हो जाता है, जिस वजह से न सिर्फ वे खुद परेशान होते हैं, बल्कि परिवार का माहौल भी खराब होने लगता है। असल में, उम्र के साथ शरीर में कई हार्मोनल बदलाव होते हैं, जो मानसिक स्थिति पर भी असर डालते हैं और अवसाद एवं चिड़चिड़ेपन को जन्म देते हैं। लेकिन आप इसे उम्र का एक पड़ाव समझकर नजरअंदाज न करें, बल्कि इस पर ध्यान देकर उनके स्वभाव में नरमी ला सकती हैं।
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मां बेटी - फोटो : istock
बात कर परेशानी समझें

कोई भी कदम उठाने से पहले आप उनसे खुलकर बात करें और जानने की कोशिश करें कि वे किस कारण चिड़चिड़ा महसूस कर रहे हैं। हो सकता है कि वे किसी परेशानी से जूझ रहे हों। इसलिए आप उनकी भावनाओं को समझें। आप उन्हें अपने अनुभवों और चिंताओं को साझा करने का मौका दें, ताकि वे अकेला महसूस न करें और चिड़चिड़ापन उनके स्वभाव में न आए।
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परिवार - फोटो : istock
समय की कमी

स्वभाव में चिड़चिड़ापन आने की सबसे मुख्य वजह होती है उनकी बातों को न सुना जाना या नजरअंदाज कर देना। परिवार के बड़े-बुजुर्ग इस उम्र में अपनी जिम्मेदारियों से आजाद हो जाते हैं और अपनों के साथ कुछ वक्त बिताने की ख्वाहिश रखते हैं। वे चाहते हैं कि बस आप उनके साथ बैठें, उनके जीवन से जुड़े किस्सों और अनुभवों को जानें, मगर आपका और परिवार के अन्य सदस्यों का अपने कामों में व्यस्त रहना उन्हें परेशान करता है। इसलिए आप उनसे बात करें और नरमी भरे शब्दों में उन्हें अपनी स्थिति समझाएं। यकीनन, वे आपकी बात समझेंगे।

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परिवार - फोटो : istock
धैर्य से काम लें

जब आपको लगे कि उनका स्वभाव चिड़चिड़ा हो रहा है तो आपके लिए सबसे जरूरी है धैर्य से काम लेना। आपकी पीढ़ी और उनकी पीढ़ी अलग है, लेकिन आप उनकी सलाह को नजरअंदाज न करें, बल्कि उनके विचारों को महत्व दें और भावनाओं का सम्मान करें। आप उन्हें अहसास दिलाएं कि उनका इस घर में होना कितना महत्वपूर्ण है।
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परिवार - फोटो : istock
संवेदनशीलता और सहानुभूति

उम्र बढ़ने के साथ ही बुजुर्गों में कई तरह की शारीरिक और मानसिक समस्याएं देखी जाती हैं, जिनसे जूझते हुए उनका स्वभाव चिड़चिड़ा हो जाता है। इसलिए उनकी बातों को ध्यान से सुनें, उनके साथ संवेदनशीलता से पेश आएं और सहानुभूति दिखाएं। यह उन्हें खुशी का अहसास कराएगा और उनके स्वभाव को नरम भी बनाएगा।
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परिवार - फोटो : istock
अपने साथ शामिल करें

आप घर के बुजुर्गों को अपने साथ शामिल करें। उन्हें घरेलू गतिविधियों, बातचीत या उनके मनपसंद कार्यों में शामिल करें। यह उन्हें व्यस्त रखेगा, जिससे उनके स्वभाव में नरमी बनी रहेगी। इसके साथ ही हल्की-फुल्की सैर, योग या प्राणायाम जैसी गतिविधियां उन्हें मानसिक और शारीरिक रूप से अच्छा महसूस कराती हैं और मूड को भी स्थिर रखती हैं।

खुशियों के पल

रिलेशनशिप काउंसलर रुकैया जीरापुर बताती हैं, शारीरिक परेशानियों के अलावा बुजुर्गों पर कई ऐसी जिम्मेदारियां भी होती हैं, जिनको अब वे नहीं निभा सकते। खुद को ऐसे बंधा हुआ पाना उनके स्वभाव को चिड़चिड़ा बना देता है। इससे डील करने का यही तरीका है कि आप उनकी जिम्मेदारियों को समझें, समय का ध्यान रखें और उन्हें बखूबी निभाने का प्रयास करें, ताकि वे खुद को असहाय महसूस न करें। अक्सर माता-पिता को बस अपनी बात कहने की जरूरत होती है, इसलिए आप तसल्ली से उनकी बात सुनें और उनके विचारों को महत्व दें। साथ ही उनकी आर्थिक जरूरतों को पूरा करें, ताकि वे अपने भविष्य के बारे में चिंतित न हों। आप उन्हें सुरक्षित महसूस कराएं और उनकी पसंदीदा गतिविधियों में शामिल होकर उन्हें हंसाएं भी।
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