अक्सर औरतों को खराब ड्रावर कहकर उनका मजाक उड़ाया जाता है। कहा जाता है कि चाहे गाड़ियां चलाने की बात हो या उन्हें पार्क करने की, महिलाएं दोनों में ही खराब होती हैं। लेकिन हाल ही में हुए एक शोध ने इस धारणा को झूठा साबित कर दिया है।
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औरतों की ड्राइविंग का न उड़ाएं मजाक, कोई और है जिम्मेदार
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स्टडी के मुताबिक हम गाड़ी कैसे चलाते और पार्क करते हैं, यह सब हमारे हार्मोन पर निर्भर करता है। पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन का नियमित लेवल होता है। इसलिए वह गाड़ी तेज चलाते हैं। उन्हें ज्यादा रिस्क लेने के लिए भी यही हार्मोन जिम्मेदार होता है।
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औरतों की ड्राइविंग का न उड़ाएं मजाक, कोई और है जिम्मेदार
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वहीं महिलाओं में हार्मोन हर वक्त ऊपर-नीचे होते रहते हैं। महिलाओं में एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन, दो तरह के हार्मोन होते हैं। यह हार्मोन ना ही सिर्फ रिप्रोडक्शन में मददगार होते हैं, बल्कि महिलाओं के दिमाग पर भी इन्हीं का राज होता है।
औरतों की ड्राइविंग का न उड़ाएं मजाक, कोई और है जिम्मेदार
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यह हार्मोन महिलाओं के व्यवहार को भी नियंत्रित करता है। जब एस्ट्रोजन का लेवल कम होता है यानि की जब महिलाएं पीरियड्स में होती हैं, तब उन्हें गाड़ी चलाने और पार्क करने में परेशानी होती है।
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शोध में यह भी दावा किया गया है कि पुरुषों का रैश गाड़ी चलाना उनके डीएनए में होता है। पुराने काल में पुरुषों का शिकारी होना और शिकार के पीछे भागना आज उनके रैश ड्राइविंग का कारण है।