मां अक्सर छोटे बच्चों के साथ सोती है। भारतीय परिवारों में यह एक आम चलन है। देखा जाए तो कोई भी अपने नवजात शिशु को अकेले सोने के लिए नहीं छोड़ेगा। लेकिन क्या आपको पता है बच्चों के साथ सोना कई बार उनके लिए खतरनाक हो सकता है। दरअसल, एक नई स्टडी इस ओर इशारा करती है कि नवजात शिशुओं के साथ सोना खतरनाक हो सकता है।
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अमेरिका में हुई एक स्टडी के मुताबिक शिशुओं को अपने साथ सुलाने वाली महिलाओं में डिप्रेशन की समस्या होती है। इसकी वजह बच्चों की नींद की समस्या रहती है। आपको जानकार आश्चर्य होगा कि अमेरिका में बच्चों की आकस्मिक होने वाली मौत के पीछे यह भी एक वजह है।
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दरअसल, यूरोप और अमेरिका में मौसम ठंडा होता है। ठंड यहां का मुख्य मौसम ही है ऐसे में बच्चों को ठंड से बचाने के लिए उन्हें कंबल या चादर ओढ़ाया जाता है जिससे कई बार उनकी मौत दम घुटने के कारण होती है। ऐसे में यदि आप बच्चों को पास सुला रही हैं या रहे हैं तो उन्हें पूरी तरह ना ढकें।
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हालांकि भारत में मौसम बदलता रहता है लिहाजा दम घुटने जैसी समस्या का सामना परिवारों में नहीं होता। लेकिन डॉक्टर और विशेष रूप से चाइल्ड एक्सपर्ट मानते हैं कि चार से पांच माह के शिशुओं को माता-पिता के बीच नहीं सुलाना चाहिए यह उनके लिए खतरनाक हो सकता है। कई बार उन पर पैर रखने, उन पर पीठ या करवट का दबाव उनके लिए जानलेवा साबित हो सकता है।
दरअसल, डॉक्टर मानते हैं कि छोटे बच्चों विशेष रूप से नवजात शिशुओं को बिस्तर, पलंग और खटिया वगैरह पर सुलाते हुए भी बहुत ध्यान देने की जरूतर होती है। शुरुआती समय में बच्चों की गर्दन का विकास होता रहता है ऐसे में गर्दन के मुड़ने, टेढ़ा हो जाने या झटका-मोच लग जाने का खतरा रहता है। ऐसे में जरूरी है कि बच्चों को पास सुलाते वक्त खास सावधानियां बरती जाएं। नोटः यह लेख आपकी जागरूकता बढ़ाने के लिए साझा किया गया है। यदि आपके यहां नवजात शिशु है तो उसकी परिवरिश के बारे में अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें।