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कोरोना: लॉकडाउन बच्चों को परिवार से जोड़ रहा है

Wed, 01 Apr 2020 11:36 AM IST
अपराजिता शुक्ला लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए सरकार ने देश को 21 दिन के लिए लॉकडाउन कर दिया है और लोगों को घरों में रहने की सलाह दी गई है। स्कूल और कॉलेज बंद पड़े हैं ताकि छात्रों को इस वायरस से बचाया जा सके। बच्चों की छुट्टियां हो गई हैं और उन्हें घर पर ही रहना पड़ रहा है। ऐसे में जहां माएं इस वक्त का इस्तेमाल बच्चों को कुकिंग और नए क्राफ्ट सिखाने में कर रही हैं, वहीं बच्चे भी नई चीजें सीख रहे हैं और परिवार के साथ ज्यादा वक्त बिता रहे हैं।
 
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वक्त से पहले शुरू हो गई छुट्टियां
ये छुट्टियां बच्चों के लिए गर्मियों के पहले शुरू हुए मॉनसून जैसी हैं। हालांकि, कुछ माएं इन छुट्टियों से ज्यादा खुश नहीं हैं, जबकि कुछ वर्किंग महिलाएं इसे एक लंबे वीकेंड के तौर पर ले रही हैं। कई परिवार इस लॉकडाउन का इस्तेमाल परिवार के साथ क्वालिटी टाइम बिताने और आपसी रिश्ते मजबूत करने में कर रहे हैं। चेन्नई में एक्सेंचर में काम करने वाली आईटी प्रोफेशनल प्रिया आनंद 10 साल और 4 साल के दो बच्चों की मां हैं। वह कहती हैं, "मुझे ऐसा लग रहा है जैसे की अभी वीकेंड ही चल रहा हो।" 
वह कहती हैं कि इस वक्त का इस्तेमाल बच्चों को कुकिंग और दूसरे क्राफ्ट सिखाने के लिए किया जा सकता है। वो कहती हैं, "इस बार समर कैंप्स नहीं होंगे और ऐसे में घर ही लर्निंग ग्राउंड बन गया है।" बच्चों के घर में ही बंद होने पर वह कहती हैं, "हां, घर तितर-बितर पड़ा हुआ है, लेकिन मैं घर को ज्यादा वक्त तक साफ करने के लिए तैयार हूं। मुझे बच्चों के घर पर रहने में कोई शिकायत नहीं है।"
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- फोटो : pixabay
टीनेज और छोटे बच्चों को संभालने में हो रही दिक्कत
तमिलनाडु के मदुरै जिले के थेनी में रहने वाली नागिनी कंडाला का बेटा 12 साल का है। वह बताती हैं, "मेरा बेटा किताबें पढ़कर और हमारे साथ टीवी पर खबरें देखकर वक्त बिताता है। यह उसके लिए एक अच्छा ब्रेक है।" हैदराबाद की काउंसलिंग साइकोलॉजिस्ट जीसी कविता कहती हैं कि बड़े बच्चों के मुकाबले टीनेज और छोटे बच्चों को संभालने में कहीं ज्यादा दिक्कत होती है। उन्होंने बताया कि हाल में एक टीनेज लड़की की मां ने उनसे संपर्क किया और कहा कि मौजूदा हालात की गंभीरता के बारे में वो बेटी को समझाएं क्योंकि वह सोशल आइसोलेशन में नहीं रहना चाहती। वो बताती हैं "लड़की की मां ने कहा कि कि उनकी बेटी को घर पर घुटन होती है क्योंकि उसे बाहर जाने और दोस्तों से मिलने की इजाजत नहीं मिल रही है। मुझे उनकी बेटी लड़की को यह समझाने में काफी वक्त लगा कि वह टेक्नोलॉजी के जरिए अपने दोस्तों के साथ वर्चुअली कनेक्टेड है।"

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हाइजीन और अनुशासन
कई महिलाएं इस बात से खुश हैं कि उनके बच्चे इस दौरान हाइजीन के बारे में जागरुक हो रहे हैं और ज्यादा अनुशासित बन रहे हैं। हैदराबाद की फैशन डिजाइनर और मूवी एक्ट्रेस निहारिका रेड्डी के बच्चों की उम्र 9 साल और 6 साल है। रेड्डी बताती हैं कि वह अपने बच्चों के साथ अब ज्यादा वक्त बिताती हैं और उन्हें कहानियां सुनाती हैं, सामान्य वक्त में बिजी शेड्यूल के चलते बच्चों को वो इतना वक्त नहीं दे पाती थीं।
रेड्डी कहती हैं, "मेरे बच्चे अब हाइजीन पर ज्यादा फोकस कर रहे हैं और वे अपने स्नैक्स बनाने और क्राफ्ट्स को सीखने में वक्त लगा रहे हैं।"
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- फोटो : social media
ग्रैंडपेरेंट्स से बात कर रहे बच्चे
रेड्डी खुश हैं कि उनके बच्चे अपने दादा-दादी और अन्य रिश्तेदारों से हर रोज बात कर पाते हैं क्योंकि सभी के पास अब पर्याप्त वक्त है। वो कहती हैं, "हम अब वो सब कुछ कर रहे हैं जिसे हम इतने वक्त से मिस कर रहे थे।" 
कविता कहती हैं कि आमतौर पर बड़े-बुजुर्ग अपने बच्चों या पोते-पोतियों से बात करने के लिए तरस जाते हैं। वो पूछती हैं, "आज के दौर में कितने बच्चों के पास इतना टाइम है कि वे रोज़ अपने दादा-दादी या नाना-नानी से बातें कर पाएं।" कविता अपने पड़ोस का एक उदाहरण देती हैं। वह बताती हैं कि उनके पड़ोस की एक कामकाजी महिला अपने बच्चे का इस वजह से ख्याल नहीं रख पा रही है क्योंकि उसके बड़े बच्चे की छुट्टियां हो गई हैं।
कविता बताती हैं, "वह अपने बच्चों और अपने काम के शेड्यूल के बीच में बुरी तरह से उलझ गई है। बच्चे पालना उसके लिए एक बड़ा काम हो गया है और उसे घर संभालने के लिए एक फुल-टाइम मेड को रखना पड़ा।"
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- फोटो : social media
क्या देश के गांव-देहातों में भी ऐसे ही हालात हैं?
आंध्र प्रदेश के पूर्वी गोदावरी जिले के एक गांव केएच वाडा में सरकारी प्राइमरी स्कूल में टीचर विजय भानु कोटे अपने छात्रों को व्हाट्सएप ग्रुप बनाकर पढ़ाने की कोशिश कर रही हैं। वह जिस स्कूल में पढ़ाती हैं उसमें 84 बच्चे हैं।
वह कहती हैं, "आने वाले अकेडमिक ईयर से बच्चों को इंग्लिश मीडियम पर स्विच करना है। जब तक उन्हें पर्याप्त ट्रेनिंग नहीं दी जाएगी वे इंग्लिश मीडियम में पढ़ाई नहीं कर पाएंगे।"
वह छात्रों की माओं से मोबाइल के जरिए संवाद करती हैं। वह कहती हैं, "मैं नियमित तौर पर उनके काम को व्हाट्सएप के जरिए देखती हूं।"
आंध्र प्रदेश की सरकार ने कक्षा 6 से सभी सरकारी स्कूलों में पढ़ाई का माध्यम अंग्रेजी कर दिया है। शिक्षकों को यह जिम्मेदारी है कि वे बच्चों को अंग्रेजी माध्यम में पढ़ाएं।
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घर के बने खाने की अहमियत समझ रहे बच्चे
दिल्ली के लाजपत नगर में रहने वाली होम मेकर रितु शर्मा भी बच्चों के स्कूलों में हुई छुट्टियों को लेकर खुश हैं। उनके बच्चे 12वीं और 10वीं कक्षा में हैं। वह कहती हैं, "मेरे बच्चे अब पैसे की कीमत को समझ रहे हैं क्योंकि कारोबार बंद पड़ा है। वे घर के बने खाने की अहमियत भी जान रहे हैं।" वो कहती हैं, "व्यस्त अकेडमिक शेड्यूल के चलते बच्चे मुझे वक्त नहीं दे पाते थे और मैं बच्चों को मिस करती थी। अब हम लोग एक-दूसरे के साथ ज्यादा वक्त बिताते हैं। मेड्स को छुट्टी दे दी गई है। हम घर पर खाना बनाते हैं और घर साफ करते हैं।"


 
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- फोटो : pixabay
क्रिएटिविटी को लगे पंख
दिल्ली की ही होम मेकर दिव्या गुप्ता को लगता है कि उनके बच्चों की क्रिएटिविटी को जैसे पंख लग गए हैं। वह कहती हैं, "मेरा 13 साल का बेटा घर पर ही पिज्जा का बेस बनाना सीख चुका है। अगर मैं किसी दिन खाना नहीं बना पाउंगी तो अब कम से कम वह कुछ बना तो सकता है।" उनकी 9 साल की बेटी अद्विका अपनी बार्बी डॉल्स के लिए खुद कपड़े सिलना सीख रही है। जितने बच्चों से हमने बात की उनमें से ज्यादातर को इस लॉकडाउन में रहने से कोई दिक्कत नहीं है। कविता कहती हैं कि सोशल डिस्टेंसिंग ने असलियत में परिवारों को एकसाथ जोड़ने में अहम भूमिका निभाई है।
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