बेमिशाल शायर, लेखक, निर्देशक, निर्माता और गीतकार जब एक शख्स में समा जाए तो उसे गुलजार कहते हैं। शब्दों के मास्टर गुलजार आज 84वां जन्मदिन मना रहे हैं। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक हर कोई उनका दीवाना है। आज हम आपको गुलजार साहब की लिखी हुई कुछ चुनिंदा पंक्तियां बताने जा रहे हैं जिनकी गहराइयों में प्यार और जिंदगी का असल मतलब छिपा है...
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gulzar
-उड़ के जाते हुए पंछी ने बस इतना ही देखा
देर तक हाथ हिलती रही वह शाख़ फ़िज़ा में
अलविदा कहने को? या पास बुलाने के लिए?
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gulzar
-आइना देख कर तसल्ली हुई, हमको इस घर में जानता है कोई
-सुनो.... जरा रास्ता तो बताना, मोहब्बत के सफर से वापसी है मेरी
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gulzar
-हम ने देखी है इन आँखों की महकती खुशबू, हाथ से छूके इसे रिश्तों का इल्ज़ाम ना दो, सिर्फ़ एहसास है ये रूह से महसूस करो, प्यार को प्यार ही रहने दो कोई नाम न दो
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gulzar
-एक बार वक्त से, लम्हा गिरा कही, वहा दास्ताँ मिली, लम्हा कही नहीं, थोड़ा सा हँसा के, थोड़ा सा रुला के, पल ये भी जानेवाला है
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गुलजार
-न मैं उतारूंगा अब साँसों के साहिल से, न वो उतारेगी मेरे आसमान पर झूलते तारों के पींगों से, मगर जब कहते कहते दास्ताँ फिर वक़्त ने लम्बी जम्हाई ली, न वो ठहरी ना मैं रोक पाया था, बहुत फूँका सुलगते चाँद को फिर भी उसे एक एक कला घटते हुए देखा, बहुत खींचा समंदर को मगर साहिल तलक हम ला नहीं पाये, सहर के वक़्त फिर उतरे हुए साहिल पे एक डूबा हुआ खाली समंदर था..
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गुलजार
-हमने सपना देखा है कोई अपना देखा है, जब रात का घूंघट उतरेगा और दिन की डोली गुजरेगी, तब सपना पूरा होगा, थोड़ा है थोड़े की जरूरत है, जिंदगी फिर भी यहां खूबसूरत है
-कहीं किसी रोज यूं भी होता, हमारी हालत तुम्हारी होती, जो रात हमने गुजारी मरके, वो रात तुमने गुजारी होती
-वो यार है जो खुशबू की तरह, वो जिंदगी जुबां उर्दू की तरह, वो जिसकी जुबां उर्दू की तरह, मेरी शाम रात, मेरी कायनात, वो यार मेरा सईंया-सईंया
-क्या पता कब कहाँ मारेगी? बस कि मैं जिंदगी से डरता हूँ, मौत का क्या है, एक बार मारेगी