लेकिन... पति के कहे से दिल टूट गया
मेरे परिवार ने मुझसे कहा, "यह तुम्हारा भाग्य है!" लेकिन इस दौरान मेरे पति ने जो कहा उससे मुझे बेहद ठेस पहुंची। उन्होंने कहा, "तुम्हें जो अच्छा लगता है वो करो, किसी और के साथ सो सकती हो, मैं तुम्हें परेशान नहीं करूंगा और ना ही किसी को इसके बारे में बताऊंगा। अगर उससे तुम्हे बच्चा हो जाए तो मैं उसे अपना नाम देने के लिए तैयार हूं। "किसी भी औरत को अपने पति के ऐसे विचारों को नहीं सुनना चाहिए। वो बेईमान था और वह खुद के और अपने परिवार के सम्मान को बचाने के लिए ऐसा कह रहा था।
वो मेरे पैरों पर गिर कर रोने लगा और कहा, "प्लीज, इसे किसी को मत बताना और न ही मुझे तलाक देना।"उसने जो सुझाया वो मैं सोच भी नहीं सकती थी। अब मेरे पास केवल एक ही विकल्प था या तो मैं उसे छोड़ दूं या उसे अपना जीवनसाथी मानकर अपनी इच्छाओं का त्याग कर दूं। अंत में मेरी भावनाओं की जीत हुई। मैंने अपने उस तथाकथित पति का घर छोड़ दिया। मेरे माता-पिता ने मुझे स्वीकार नहीं किया। अपने दोस्तों की मदद से मैं एक लेडिज होस्टल में चली गयी। जल्दी ही मुझे एक नौकरी मिल गयी। धीरे धीरे ही सही, मेरा जीवन पटरी पर आने लगा और मैंने कोर्ट में तलाक की अर्जी डाल दी।