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Signs of Intelligence: इन पांच बेकार बातों पर बुद्धिमान नहीं करते हैं बहस, आप भी रहे दूर

Wed, 18 Jun 2025 01:16 PM IST
शिवानी अवस्थी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला

सार

Signs of Intelligence: कुछ विषय बिना किसी वास्तविक लाभ के अक्सर अनावश्यक तनाव, समय की बर्बादी और खराब रिश्तों की ओर ले जाते हैं। यहां ऐसे ही कुछ बेकार बातों और व्यर्थ तर्कों के बारे में बताया जा रहा है, जिससे बुद्धिमान लोग खुद को दूर रखते हैं।
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बुद्धिमान लोग इन पांच बेकार बातों पर बहस कभी नहीं करते हैं - फोटो : Adobe stock
Signs of Intelligence: बुद्धिमान व्यक्ति की पहचान सिर्फ उसके ज्ञान से नहीं, बल्कि उसके सोचने, समझने और व्यवहार करने के तरीके से होती है। बुद्धिमानी का मतलब हर बात में अपनी राय देना नहीं, बल्कि यह समझना है कि कहां बात करनी चाहिए और कहां चुप रहना ही बेहतर है। किसी बात को साबित करने के लिए बहस करना सही समाधान नहीं है, बल्कि यह समय और ऊर्जा की बर्बादी है। इस बात को अत्यधिक बुद्धिमान और होशियार लोग अच्छी तरह समझते हैं। इसलिए वे चुनौतीपूर्ण स्थितियों पर प्रतिक्रिया करने के बजाय जवाब देना चुनते हैं।

कुछ विषय बिना किसी वास्तविक लाभ के अक्सर अनावश्यक तनाव, समय की बर्बादी और खराब रिश्तों की ओर ले जाते हैं। यहां ऐसे ही कुछ बेकार बातों और व्यर्थ तर्कों के बारे में बताया जा रहा है, जिससे बुद्धिमान लोग खुद को दूर रखते हैं। पांच ऐसी ‘बेकार बहस'  के बारे में जानिए, जिनसे बुद्धिमान लोग हमेशा दूरी बनाए रखते हैं:
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समझदार लोग खुुद को सही साबित करने के लिए बहस नहीं करते हैं - फोटो : Adobe Stock
'मैं सही, तुम गलत' वाली बहस

बहस की एक सबसे बड़ी वजह होती है, खुद की बात को सही साबित करने की कोशिश। कुछ लोग हर बात में खुद को सही साबित करने की जिद पर अड़े रहते हैं। वह जीतना चाहते हैं, इसलिए व्यर्थ की बहस में अपना समय और ऊर्जा दोनों खर्च करते हैं। लेकिन बुद्धिमान व्यक्ति यह जानता है कि हर व्यक्ति का नजरिया अलग होता है। ऐसे में वह तर्क-वितर्क में फंसने की बजाए सम्मानपूर्वक अपनी बात कहकर आगे बढ़ जाते हैं। सही समय पर चुप हो जाना बुद्धिमानी है। 
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बुद्धिमान लोग दूसरों की धारणा बदलने की कोशिश नहीं करते हैं - फोटो : Adobe stock
दूसरों की धारणा बदलने की कोशिश

धर्म और राजनीति जैसे विषय पर लोगों की अपनी व्यक्तिगत मान्यता या धारणा होती है। भारत में तो धार्मिक और राजनीतिक विषय कट्टरवादी विचार पर आधारित होते हैं, इस पर बहस करना बेवकूफी की ओर ले जाता है। ये विषय संवेदनशील हैं और समझदार लोग इस बात को भलीभाति जानते हैं कि लोग इन विषयों पर भावुक होते हैं और बहस गर्मागर्मी को बढ़ा सकती है। ठोस तथ्यों के बावजूद भी लोगों की धारणा आसानी से नहीं बदलती है। इसलिए समझदार लोग इन बातों में उलझकर रिश्ते खराब नहीं करते। वे लोगों के मतभेदों का सम्मान करते हैं और बहस करने के बजाय वे चर्चा के विषयों को बदलना चुनते हैं। अपनी आस्था या विश्वास खुद तक सीमित रखना ही बुद्धिमानी है।

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सोशल मीडिया की फालतू बहस को इग्नोर करने वाला बुद्धिमान होता है - फोटो : FREEPIK
सोशल मीडिया की फालतू बहस

ऑनलाइन बहसें, खासकर ट्रोल्स और फेक अकाउंट्स के साथ बहस करना न तो तर्कपूर्ण होता है और न ही इनका कोई समाधान निकलता है। समझदार व्यक्ति जानता है कि सोशल मीडिया पर ऊर्जा बर्बाद करने से बेहतर है अपनी ऊर्जा खुद के विकास में लगाई जाए। समझदार व्यक्ति सोशल मीडिया का उपयोग तो करता है लेकिन व्यर्थ बहस में नहीं पड़ते और ऐसे विषयों को स्क्रॉल या स्किप कर देते हैं। 
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तर्कपूर्ण और तथ्यपरक बातों की आड़ में बहस नहीं करनी चाहिए - फोटो : Freepik
झूठी तर्कपूर्ण बहस 

आज की डिजिटल और तेज़-तर्रार दुनिया में गलत सूचनाएं तेजी से फैलती हैं और बहुत से लोग इसके बारे में जानते भी नहीं हैं। वे जो कुछ भी देखते या सुनते हैं, उस पर विश्वास कर लेते हैं और यह उनकी राय को आकार देता है। जब लोग व्यक्तिगत राय को निर्विवाद सत्य के रूप में प्रस्तुत करते हैं तो बहस करना लुभावना हो सकता है। लेकिन बुद्धिमान लोग तर्क का मुखौटा पहने बहस को भी नजरअंदाज करते हैं। वे समझते हैं कि हर कोई दुनिया को अलग तरह से देखता है और कुछ लोग आपके तर्क चाहे कितने भी तार्किक क्यों न हों, वे नहीं मानेंगे। 
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दूसरों की गलतियों को अनदेखा करने वाला समझदार होता है - फोटो : Adobe
दूसरों की छोटी गलतियां भी सुधारना

बुद्धिमान लोग समय को कीमती मानते हैं। वे दूसरों की छोटी-मोटी गलतियों को नजरअंदाज करना ही सही समझते हैं। होशियार लोगों को यह साबित करने की जरूरत नहीं होती कि वे सही हैं। दूसरों को नीचा दिखाने, उनकी गलतियों की ओर इशारा करने या गॉसिप में अपना वक्त नहीं गंवाने के बजाय ऐसी बातों का अनदेखा और अनसुना करना सही समझते हैं। वह ऐसी बातों को नजरअंदाज करते हैं जो बातचीत को अप्रिय बना सकती है  या उन्हें घमंडी बना सकती है। बुद्धिमता चुप रहकर चरित्र दिखाने में है।
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