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Navratri 2020: सदियों से चली आ रही है रामलीला मंचन की परंपरा, जानिए इससे जुड़ी 10 बातें

Sat, 24 Oct 2020 06:00 AM IST
योगेश जोशी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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रामलीला - फोटो : अमर उजाला
भारत ही नहीं दुनिया के तमाम हिस्सों में मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम के गुणों की लीलाएं होती हैं। ईश्वर से जुड़ी लीला के जरिए रामकथा का गायन और मंचन हमें सात्विक संस्कारों से अभिमंत्रित करता है। देश भर में शारदीय नवरात्रि के समय रामलीला का मंचन किया जाता है। इस साल कोरोना वायरस की वजह से बहुत जगहों पर रामलीला का मंचन नहीं किया जा रहा है। बहुत जगह रामलीला का लाइव प्रसारण भी किया जा रहा है। भगवान श्री राम की पावन नगरी अयोध्या की रामलीला का प्रसारण दूरदर्शन पर किया जा रहा है। शारदीय नवरात्रि के समय रामलीला मंचन की परंपरा सदियों से चली आ रही है। अगली स्लाइड्स में जानिए रामलीला से जुड़ी खास बातें...
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रामलीला - फोटो : अमर उजाला
तुलसीदास जी ने प्रारंभ की रामलीला
  • मान्यता है कि रामचरितमानस के प्रचार-प्रसार के लिए तुलसीदास जी ने रामलीला की शुरुआत की थी। हालांकि तुलसीदास जी की रामलीला के पहले भी रामकथा के गायन और उनके चरित्र के नाट्य स्वरूप का जिक्र मिलता है। जैसा कि बाल्मीकि रामायण में लवकुश रामकथा का गायन करते हैं। इसी तरह महाभारत में तथा हरिवंश पुराण में भी भगवान राम के चरित्र को लेकर नाटक का उल्लेख मिलता है।
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रामलीला - फोटो : अमर उजाला
क्या होती है लीला
  • लीला शब्द न सिर्फ राम बल्कि कृष्ण के साथ भी जुड़ा हुआ है। सही मायने में ईश्वर के अवातार से जुड़ी ‘लीला’ भारतीय भक्तों की अनूठी परिकल्पना है। जिसमें सिर्फ और सिर्फ आनंद है। पुराणों ने लीला में देवत्व को भी मानत्व में रूपांतरित किया है। भगवान श्रीराम और श्रीकृष्ण के जीवन से जुड़े प्रसंगों को देखकर इसे सहज ही जाना जा सकता है।

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रामलीला - फोटो : अमर उजाला
  • कितने प्रकार की होती है लीला
लीला का अर्थ होता है लीन होना। आध्यात्मिक दृष्टि से देखें तो लीला तीन प्रकार की होती है।
नित्य लीला — यह प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में दिन-प्रतिदिन घट रही है।
अवतार लीला – इसमें ईश्वर स्वयं मानव मात्र के कल्याण के लिए पृथ्वी पर अवतार लेते हैं।
अनुकरण लीला – इस लीला के जरिए मनुष्य ईश्वर के अवतार का अनुकरण करने का प्रयास करता है। फिर चाहे वह रामलीला हो या रासलीला।
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रामलीला - फोटो : अमर उजाला
लीला देखने का लाभ
  • पौराणिक मान्यता के अनुसार ईश्वर की लीला का अनुकरण करने या उसे देखने मात्र से ही पापों से मुक्ति मिल जाती है। लीला की पवित्रता को कायम रखने के लिए इसके पात्रों को भी इसी भक्ति भावना के साथ अपनी भूमिका अदा करनी पड़ती है।
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रामलीला - फोटो : अमर उजाला
लीला के दौरान आता है ऐसा भाव
  • देश के तमाम मंचों में रामलीला के दौरान कई बार पात्र को स्वयं के विशिष्ट होने या फिर उस पात्र विशेष के निकट होने की अनुभूति होती है। लीला करते समय अक्सर पात्र खुद को उस कैरेक्टर के सेवक के रूप में पाता है।
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रामलीला - फोटो : अमर उजाला
लीला नहीं ईश्वर की करते हैं साधना
  • लीला करते समय सिर्फ भगवान राम का पात्र निभाने वाला ही नहीं बल्कि रावण की भूमिका में खुद को प्रस्तुत कर रहा व्यक्ति खुद को सौभाग्यशाली समझता है। लीला के दौरान किसी पात्र की भूमिका निभाना उसके लिए ईश्वर की साधना से कम नहीं होता है। इन्हीं आस्थावान पात्रों के कारण रामलीला के दर्शकों में भी निष्ठाभाव उत्पन्न होता है।

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रामलीला - फोटो : अमर उजाला
इस तरह होता है पात्रों का चयन
  • चूंकि रामलीला में किसी पात्र की भूमिका निभाना भी अपने आप में एक विशिष्ट अनुभव होता है, इसलिए इसके चयन के दौरान व्यक्ति विशेष की उम्र, उसके के गुण-अवगुण का विशेष ध्यान रखा जाता है। अमूमन सभी रामलीला में 10 से 15 वर्ष तक के बच्चों को प्राथमिकता दी जाती है क्योंकि उनकी देह पवित्र और मन कोमल होता है। उन्हें ईश्वर का स्वरूप माना जाता है।

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रामलीला - फोटो : अमर उजाला
नाटक नहीं बल्कि धार्मिक अनुष्ठान
  • रामलीला महज मनोरंजन का माध्यम नहीं बल्कि एक धार्मिक अनुष्ठान होता है। जिसमें नियमों और परंपराओं को पूरा पालन किया जाता है। यही कारण है कि लीला में पात्रों का मेकअप नहीं बल्कि श्रद्धा भाव से शृंगार किया जाता है। गाने नहीं बल्कि चौपाई पढ़ी जाती है।

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रामलीला - फोटो : अमर उजाला
इन दृश्यों से यादगार बन जाती है रामलीला
  • लीला श्रीराम कथा का अंकुर है और चौपाईयां और संवाद उसकी शाखाएं और पत्ते हैं। रामलीला में प्रभु श्रीराम के जिन जीवन प्रसंगों को दर्शाया जाता है, उनमें धनुष यज्ञ का दृश्य, सीता स्वयंवर, परशुराम-लक्ष्मण संवाद, अंगद-रावण संवाद,  लक्ष्मण-मेघनाथ संवाद, राम-रावण युद्ध, भरत मिलाप आदि प्रमुख हैं। जिन्हें सालों-साल देखते रहने के बाद भी मन नहीं भरता है।
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रामलीला - फोटो : अमर उजाला
सभी की यही होती है कामना 
  • विश्वभर में प्रस्तुत की जाने वाली रामलीला की लोकप्रियता एवं सफलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि दुनिया का प्रत्येक व्यक्ति अपने घर में भगवान राम जैसा पुत्र, माता सीता जैसी पत्नी, लक्ष्मण जी जैसा भाई और हनुमान जी जैसा सेवक पाना चाहता है।
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