फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Motivational: अब तक कितना बदले आप? छोटे-छोटे संकल्पों से जीवन में लाएं बड़ा परिवर्तन

Tue, 14 Jan 2025 05:46 PM IST
शिवानी अवस्थी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला

सार

दिन बदले। साल बदल गए। खुद को कितना बदला आपने? खुद को कितना ‘नया’ बनाया आपने? समय-समय पर सकारात्मक बदलाव जरूरी हैं, तभी जिंदगी में कुछ नया होता है।
 
विज्ञापन
1 of 2
जीवन में सकारात्मकता के लिए बदलाव - फोटो : Freepik
आनन्दमूर्ति गुरुमाँ

संसार में परिवर्तन का एक प्रवाह चल रहा है। उस प्रवाह में वस्तुएं बनती हैं, रहती हैं और मिट जाती हैं। यह आण्विक तल पर संघटन-विघटन की प्रक्रिया प्रति क्षण हो रही है। हमारे शरीर में भी चयापचय की प्रक्रिया निरंतर चल रही है, जिसमें नए सेल्स बन रहे हैं और पुराने मर रहे हैं। उसी से शरीर का बनना, चलना और मिटना होता है। यही प्रक्रिया बाहर सारी वस्तुओं में भी हमको प्रतीत होती है। जब किसी वस्तु का विघटन होता है, तब एक नई सृष्टि का और एक नई वस्तु का सृजन भी होता है। इस सृजन के क्रम में उस वस्तु का कुछ काल तक टिकना और फिर उस वस्तु का विघटित हो जाना घटित होता है। इसी को हम संसार कहते हैं।

जहां संसरण होता है, वही संसार है। इस संसरण की प्रक्रिया, परिवर्तन की प्रक्रिया हमको न केवल भौतिक वस्तुओं में दिखाई देती है, बल्कि कालखंड में भी प्रतीत होती है। इसलिए इस कालचक्र से बंधे हुए सूर्य, चंद्रमा, ग्रह, नक्षत्र, पृथ्वी आदि और जीव, जंतु, मनुष्य आदि सब उस कालक्रम के हिस्से हैं, जिसमें ये सब कुछ बनता है, दिखता है और विघटित हो जाता है। हम विघटन को बुरा नहीं मानते और सृजन में कुछ विशेष आह्लाद की आवश्यकता नहीं होती है। यह एक सहज प्रक्रिया है, जो संसार में अनंतकाल से निरंतर चलती आ रही है। हर वस्तु का मरना, हर देह का मरना एक नए सृजन का द्योतक होता है।

सूर्य सृष्टि का प्राण है

मनुष्य ने अपनी सुविधा के लिए काल को दिन-रात, भूत-वर्तमान और भविष्य में बांट दिया, ताकि हम काल की गणना कर सकें। सूर्य के उदय से दिन और सूर्य के अस्त होने पर हम रात्रि का आरंभ मानते हैं। जैसे सूर्य का उदय होना प्रकाश और ऊर्जा को लेकर आता है, वैसे ही सूर्य का अस्त होना हम पृथ्वी वासियों के लिए एक दिन की समाप्ति का संकेत होता है। सूर्य अस्त होते-होते यह संदेश देता है कि मैं फिर उदित होऊंगा। सूर्य सारी सृष्टि का प्राण है। सूर्य अपनी रश्मियों को, ऊर्जा को, शक्ति को और किरणों को फैला देता है। सृजन सूर्य से है, प्राण भी सूर्य से हैं। क्षण, घंटा, दिन, रात्रि, सप्ताह, महीना और वर्ष इसका विभाग मनुष्य की बुद्धि ने किया है। सृष्टि में ऐसा कोई विभाग दिखाई नहीं देता, सहज नदी के प्रवाह जैसे काल बहता रहता है, लेकिन मनुष्य ने अपनी बुद्धि से इस काल को दिन-रात में बांट दिया, इसलिए नया दिन उत्साह से शुरू करता है, पूजा-पाठ से शुरू करता है, नाम स्मरण से शुरू करता है।

नए का आना नव सृजन

नया महीना चढ़ता है तो हमारे देश की परंपरा है कि हम उसको भी उत्साहित होकर मनाते हैं। ज्योतिष के अनुसार, भारत देश में नव वर्ष का आरंभ चैत्र मास से होता है। वहीं अंग्रेजी कैलंडर के अनुसार एक जनवरी से आरंभ होता है, जो हमारे सरकारी कार्यालयों में, स्कूल, कॉलेज, यूनिवर्सिटी आदि में मनाया भी जाता है। इसी नाते 31 दिसंबर को वर्ष का अंतिम दिन होता है और एक जनवरी को नया वर्ष प्रारंभ होता है। वैसे तो कैलेंडर में तिथि बदलती है, लेकिन सूर्य तो रोज एक जैसा ही उगता है। रोज एक जैसा ही अस्त होता है और रात भी रोज एक जैसी होती है, लेकिन फिर भी इस बदलते हुए वर्ष का हम सहृदयता से स्वागत करते हैं। पुराने का जाना और नए का आना निश्चित रूप से प्रसन्नता, नव सृजन और नव चेतना का श्रीगणेश होता है।

इस नवीन वर्ष 2025 को हम लोग नई ऊर्जा, नई चेतना, अपार शक्ति, अपार बुद्धि, अपार रचनात्मकता के साथ बिता सकें, इसके लिए आत्ममंथन, अंतर्विचार करने की आवश्यकता होती है। नए साल के कुछ दिन चिंतन के लिए होने चाहिए। अभी तक जो कुछ करने में आप असमर्थ रही हैं, नव वर्ष के प्रारंभ में विवेकपूर्ण बुद्धि से आत्मचिंतन करें कि कैसे अपने जीवन में सकारात्मकता और रचनात्मकता को लाएंगी और जो भी बुरा है, उससे कैसे पार पाएंगी।
विज्ञापन
विज्ञापन

2 of 2
छोटे-छोटे संकल्पों से बड़े बदलाव संभव - फोटो : Amar Ujala
छोटे-छोटे संकल्पों से आरंभ

नए साल की शुरुआत में संकल्प लेने की परंपरा है। बहुत-से लोग अनेक प्रकार के संकल्प करते हैं, जैसे- वजन कम करेंगे, मीठा नहीं खाएंगे, झूठ नहीं बोलेंगे। ऐसे संकल्प करना भी अच्छी बात है, क्योंकि इनसे भी आपके मन की शक्ति बढ़ जाती है और मन की कमी दूर हो जाती है। लेकिन मैंने यह भी देखा है कि साल के शुरू में लोग जो संकल्प लेते हैं, उनको जनवरी महीना खत्म होने से पहले ही तोड़ देते हैं। लोग संकल्प तो करते हैं, परंतु मन की बेईमानी के कारण उसे पूरा नहीं कर पाते। जैसे पानी के लिए नीचे गिरना आसान और सहज होता है, परंतु अगर उसे ऊपर उठाना हो तो मोटरपंप की जरूरत पड़ती है, वैसे ही हमारे मन के लिए नीचे गिरना आसान और सहज है। मन को ऊंचा उठाना बहुत मुश्किल है। मन के लिए अच्छी बातों से जुड़ना बहुत मुश्किल है, उनको छोड़ देना सहज है।

इस विषय में मेरा यह सुझाव है कि बहुत बड़े-बड़े संकल्प न बनाएं। छोटे-छोटे संकल्पों से आरंभ करें। छोटा संकल्प देखने में अणु जैसा छोटा लगेगा, लेकिन इन्हीं छोटे-छोटे संकल्पों को पूरा करने से मन की शक्ति अणुबम जैसी विशाल हो जाती है। इसलिए यह विचार अवश्य करिए कि हम अपने जीवन की नैया को किस दिशा में ले जाना चाहते हैं। सच बात तो यह है कि समय भागा जा रहा है। उपनिषद में ऐसा कहा गया है कि वास्तव में समय नहीं बीतता, हम बीत जाते हैं। 2024 नहीं बीता, हम बीत गए हैं।

अगर आज कोई क्रोधी, झूठा और कपटी है, परंतु वह चाहता है कि मेरा कल अच्छा हो तो यह होने वाला नहीं है। जो अपने आज की चिंता करेगा, उसे कल की चिंता नहीं करनी पड़ेगी। जिसका वर्तमान आनंद में है तो आने वाले भविष्य की चिंता क्यों करेगा? जो आज अपने वर्तमान से दुखी होते हैं, वे सोचते हैं कि पांच साल बाद इतने पैसे हो जाएंगे तो सुख होगा।

Office Tips: दफ्तर की नकारात्मकता कार्य में डाल रही है बाधा तो ऐसे पाएं अच्छा माहौल

दस साल बाद विदेश जाएंगे, तब हम बहुत सुखी हो जाएंगे, हमारा मकान बड़ा हो जाएगा तो बड़े सुखी हो जाएंगे। यह याद रखना कि तुम बहुत अच्छी तरह महल बना लो, सुखी तब भी नहीं होगे, क्योंकि सुखी तुम अपनी सोच से होते हो, अपनी समझ से होते हो। भूतकाल बीत चुका है, परंतु वर्तमान आपके हाथ में है। इसलिए आने वाले कल में क्या होगा, यह आपके आज पर निर्भर करता है। अगर आप अपने आज को साधना पूर्ण, शांतिपूर्ण और सुंदर बना लोगे तो निश्चित रूप से आपका कल भी वैसा ही होगा। आने वाले कल की चिंता आज नहीं करनी चाहिए, लेकिन आज की चिंता अवश्य करनी चाहिए। परंतु समस्या यह है कि लोग आने वाले कल की चिंता तो बहुत करते हैं, पर आज की जरा भी नहीं करते।

संसार का नियम है बदलना

जो कल बीत चुका, वैसा आज नहीं है। जैसा आज है, वैसा कल नहीं रहेगा। संसार का नियम है बदलना। वह अच्छे के लिए बदले या खराब के लिए बदले या बहुत अच्छे के लिए बदले, बदलेगा ही। इसलिए हमेशा स्वीकृति का भाव रखिए। अच्छा या बुरा जो भी आए, उसे स्वीकार करिए, झगड़ा मत करिए। जब हम अपने मन में कोई जिद बना लेते हैं तो आपकी सोची हुई जिद ही आपको दुख देती है। आप समझदार बनो। हर बार चीजें आपकी मर्जी के अनुसार नहीं होंगी। कभी-कभी उल्टी भी हो जाएंगी, तब क्या करेंगे? तब यह कह देना चाहिए कि ऐसे ही होना था।

ज्ञान पूर्वक जीवन को जीओ तो पूरा जीवन प्रसाद हो जाता है। हर क्षण एक नया क्षण है, हर सेकंड नया सेकंड है, हर मिनट नया मिनट है, हर घंटा नया घंटा है, हर दिन नया दिन है, हर सप्ताह नया सप्ताह है, ऐसे ही हर वर्ष नया वर्ष है। प्रकृति हमें कुछ भी पुराना नहीं देती है। कैलेंडर में भी 2024 से 2025 हो गया, पर अगर तुम्हारा जीवन नहीं बदला तो क्या फायदा! होना तो यह चाहिए कि हर नए पल तुम नया इतिहास लिख रहे हो। हर पल को इस प्रकार आनंद और खुशी से जीना चाहिए कि हर पल एक इतिहास हो जाए। इसलिए इतिहास को केवल पढ़ो मत, इतिहास रचो।

इस नए वर्ष में कुछ नए गुण, नई सोच, नई विधा, नया चिंतन और कुछ अच्छे कर्म आप अपने जीवन में ले आएं। किसी नादान, बेवकूफ की तरह न जीएं। जीएं तो एक जाग्रत व्यक्ति की तरह होशपूर्वक जीएं। जाग्रत व्यक्ति की तरह जीने के लिए आपको जाग्रत व्यक्ति के साथ होना पड़ेगा। जाग्रत व्यक्ति के साथ होने का मतलब है कि वह जो ज्ञान दे रहे हैं, उस ज्ञान के साथ रहना।


(लेखिका विख्यात आध्यात्मिक गुरु हैं।)
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें