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Monsoon Plant Care: मानसून में पौधों को हो सकती हैं ये 5 खतरनाक बीमारियां, समय रहते बचा लें

Tue, 21 Jul 2026 04:04 PM IST
शिवानी अवस्थी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला

सार

Gardening Tips: मानसून में अधिक नमी और लगातार बारिश के कारण पौधों में जड़ सड़न, पत्ती धब्बा, पाउडरी मिल्ड्यू, डाउनी मिल्ड्यू और फफूंद जनित रोग तेजी से फैल सकते हैं। सही सिंचाई, अच्छी ड्रेनेज व्यवस्था और समय पर देखभाल से इन बीमारियों से पौधों को बचाया जा सकता है।
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बारिश में पौधों को कौन सी बीमारियां हो सकती हैं - फोटो : AI

Monsoon Plants Diseases : मानसून का मौसम पौधों के लिए जितना फायदेमंद माना जाता है, उतना ही चुनौतीपूर्ण भी हो सकता है। बारिश से पौधों को प्राकृतिक पानी, ठंडा वातावरण और तेजी से बढ़ने का मौका मिलता है, लेकिन लगातार नमी, कम धूप और खराब जल निकासी कई तरह की बीमारियों को भी बढ़ावा देती है। यही वजह है कि इस मौसम में गार्डनिंग करने वाले लोगों को पौधों की देखभाल पर विशेष ध्यान देना चाहिए।

अक्सर लोग समझते हैं कि बारिश हो रही है, इसलिए पौधों को किसी अतिरिक्त देखभाल की जरूरत नहीं है। जबकि सच यह है कि मानसून के दौरान फंगस, बैक्टीरिया और कीट तेजी से सक्रिय हो जाते हैं। समय रहते बीमारी के शुरुआती संकेत पहचान लिए जाएं, तो पौधों को गंभीर नुकसान से बचाया जा सकता है। चाहे आपके घर में छोटे गमले हों, बालकनी गार्डन हो या बड़ा किचन गार्डन, कुछ आसान उपाय अपनाकर पौधों को स्वस्थ रखा जा सकता है।

आइए जानते हैं मानसून में पौधों को होने वाली 5 सबसे आम बीमारियां, उनके शुरुआती लक्षण और बचाव के प्रभावी तरीके।
 

किन पौधों में मानसून के दौरान ज्यादा समस्या आती है?
 

  • गुलाब

  • टमाटर

  • मिर्च

  • तुलसी

  • मनी प्लांट

  • गेंदा

  • पुदीना

इन पौधों में अधिक नमी के कारण फफूंद और पत्ती संबंधी रोग अपेक्षाकृत अधिक देखने को मिल सकते हैं।

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मानसून में पौधों की जड़ सड़ सकती हैं - फोटो : AI

जड़ सड़ना
 

लक्षण

  • पत्तियां पीली पड़ने लगती हैं।

  • पौधा मुरझाने लगता है।

  • जड़ों से बदबू आ सकती है और वे मुलायम हो जाती हैं।


कारण

गमले में पानी जमा रहना और खराब ड्रेनेज।


बचाव

  • अतिरिक्त पानी तुरंत निकालें।

  • अच्छी जल निकासी वाले गमले और मिट्टी का उपयोग करें।

  • जरूरत से ज्यादा पानी न दें।

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पत्तों में धब्बे पड़ना - फोटो : Ai

पत्ती धब्बा रोग 


लक्षण

  • पत्तियों पर भूरे, काले या पीले धब्बे।

  • धीरे-धीरे पत्तियां सूखने लगती हैं।


कारण

अधिक नमी और फफूंद या बैक्टीरिया का संक्रमण।


बचाव

  • संक्रमित पत्तियां हटा दें।

  • पौधों के बीच पर्याप्त दूरी रखें ताकि हवा का प्रवाह बना रहे।

  • पत्तियों पर देर तक पानी जमा न रहने दें।

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पाउडरी - फोटो : Ai

पाउडरी मिल्ड्यू 


लक्षण

  • पत्तियों पर सफेद पाउडर जैसी परत।

  • नई पत्तियों की वृद्धि प्रभावित होना।


कारण

उच्च आर्द्रता और खराब वायु संचार।


बचाव

  • पौधों को खुली और हवादार जगह रखें।

  • प्रभावित पत्तियां हटाएं।

  • आवश्यकता होने पर उपयुक्त जैविक या अनुशंसित फफूंदनाशी का उपयोग करें।

 

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डाउनी - फोटो : AI

डाउनी मिल्ड्यू 


लक्षण

  • पत्तियों के ऊपर पीले धब्बे।

  • नीचे की सतह पर धूसर या सफेद फफूंद जैसी परत।


कारण

लगातार नमी और ठंडा वातावरण।


बचाव

  • सुबह के समय सिंचाई करें।

  • पौधों की नियमित जांच करें।

  • संक्रमित हिस्सों को समय पर हटा दें।

 

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गार्डनिंग टिप्स - फोटो : AI

फफूंद जनित तना सड़ना

लक्षण

  • तने का निचला हिस्सा काला या भूरा पड़ना।

  • पौधा अचानक गिरना या सूखना।

कारण

मिट्टी में लंबे समय तक नमी बने रहना।


बचाव

  • मिट्टी को बहुत अधिक गीला न रखें।

  • गमलों में उचित ड्रेनेज सुनिश्चित करें।

  • संक्रमित पौधों को अलग रखें ताकि संक्रमण न फैले।


मानसून में पौधों की देखभाल के जरूरी टिप्स

  • जरूरत के अनुसार ही पानी दें।

  • गमलों की जल निकासी नियमित जांचें।

  • सूखी और संक्रमित पत्तियां हटाते रहें।

  • पौधों को पर्याप्त रोशनी और हवा मिलने दें।

  • बारिश के बाद गमलों में पानी जमा न होने दें।

  • जैविक खाद का संतुलित उपयोग करें।

  • सप्ताह में एक बार पौधों का निरीक्षण करें।

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