अंशु सिंह
कुछ समय पहले ‘मिनिमलिस्म’ ट्रेंड में था, जो कम से कम में जीने को कहता था। मगर अब कम नहीं, ज्यादा से ज्यादा के सिद्धांत पर आधारित ‘मैक्सिमलिज्म’ शैली ट्रेंड में है। मिलान के रनवे से लेकर मुंबई तक सब ‘ज्यादा ही ज्यादा’ है। वैसे सही तो कम से कम में जीना है, लेकिन सर्दियों में यह संभव नहीं है। अब जैसे-जैसे सर्द हवाएं दरवाजे पर दस्तक दे रही हैं, वैसे-वैसे हमारे घरों को भी एक नई ऊष्मा और ऊर्जा की जरूरत महसूस होने लगी है। ऐसे में आप मैक्सिमलिस्ट शैली की मदद से अपने घर की खूबसूरती को नया आयाम दे सकती हैं और सर्दी के कहर से बच सकती हैं।
मैक्सिमलिस्ट शैली कहती है कि आप इस सर्दी घर को कम से कम में नहीं, दिल खोलकर सजाइए। पुराने स्मृति-चिह्नों को नई जगह दें, पैटर्न्स से खेलें और अपने घर को एक ऐसा आशियाना बनाएं, जहां गरमाहट सिर्फ हीटर से नहीं, आपके दिल की खुशियों से महसूस हो। तो क्यों न इस बार सर्दियों को थोड़ा रंगीन बनाया जाए?
साज-सज्जा में व्यक्तिगत स्पेस
सुप्रसिद्ध डिजाइनर जे.जे. वाल्या के विचारों में हम एक मैक्सिमलिस्ट देश हैं। जटिलता हमारी संस्कृति का हिस्सा है। मैक्सिमलिज्म हमारे खाने से लेकर हर चीज में समाहित है। हमारे मसालों, अलग-अलग स्वादों से भरी बड़ी-बड़ी थालियां, हमारे त्योहार और वास्तुकला, हर जगह इसकी झलक मिल जाती है। यूं कहें कि भारत दिल से मैक्सिमलिस्ट है। लेकिन जिस डिजिटल युग में हम रह रहे हैं, वहां हम बाकी दुनिया के साथ चलने की कोशिश करते रहते हैं। इसलिए मिनिमलिज्म हमारे बीच आ गया। हमने वर्षों तक अपने घरों में न्यूट्रल शेड वाले रंगों और संयमित आंतरिक सज्जा का इस्तेमाल किया। लेकिन अब लोग ऐसे स्थानों की तलाश कर रहे हैं, जो अधिक व्यक्तिगत, गतिशील और जीवंत लगें। बेज रंग की दीवारों, न्यूनतम अलमारियों और ‘कम ही अधिक है’ जीवन शैली के लंबे दौर के बाद इंटीरियर डिजाइनिंग में इसे एक पूर्ण विद्रोह के रूप में देखा जा रहा है।
डोपामाइन सजावट से लेकर अतीत की यादों तक मैक्सिमलिज्म उन चीजों को अपनाने के लिए आमंत्रित कर रहा है, जिन्हें हम पसंद करते हैं। यह कहीं से अराजकता पैदा नहीं करता, बल्कि रंगों, लकीरों, पैटर्न्स के जरिये अपनी कहानी कहने, स्वयं को अभिव्यक्त करने और अपने व्यक्तित्व को प्रतिबिंबित करने वाले तत्वों को परत-दर-परत प्रस्तुत कर रहा है।