फोन पर इंटरनेट, सोशल मीडिया और एप्स में भले ही कई बुराई हो और भले ही हम अपने बच्चों को इनसे दूर रखने की कोशिशें कर चुके हों, मगर इस वक्त इनसे न सिर्फ लोगों को बचाने में मदद मिल रही है और अर्थव्यवस्था को भी इनसे ही सहारा मिल रहा है।
स्मार्टफोन और सोशल मीडिया को लेकर हमें अक्सर चेतावनी भरी सलाह मिलती रहती है। लेकिन, आज के इस दौर में जब हम एक महामारी का सामना कर रहे हैं तब तकनीक जीवन बचाने के लिहाज से बेहद अहम साबित हो रही है।
जरा सोचिए, अगर ये 2005 का दौर होता तो कैसे हालात होते। तब न तेज ब्रॉडबैंड था, न स्मार्टफोन और न ही आज के वक्त के टूल्स और एप्स ही थे। उस वक्त अगर हमारा सामना इस महामारी से होता तो शायद हमारी मुश्किलें आसमान छू रही होतीं।