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Jallianwala Bagh: जलियांवाला बाग नरसंहार की बरसी आज, देखें अब की तस्वीरें

Mon, 13 Apr 2026 10:01 AM IST
Shivani Awasthi लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला

सार

Jallianwala Bagh Massacre: हर साल हजारों लोग जलियांवाला बाग पहुंचकर शहीदों को श्रद्धांजलि देते हैं और उस दिन को याद करते हैं, जिसने भारत के भविष्य को बदल दिया।
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कैसा दिखता है जलियांवाला बाग - फोटो : Adobe
Jallianwala Bagh Pictures: आज जलियांवाला बाग नरसंहार की बरसी है। 13 अप्रैल को जलियांवाला बाग में कुछ ऐसा हुआ था, जो इतिहास में काले दिन के रूप में दर्ज हो गया। जलियांवाला बाग का नाम ही स्वतंत्रता संग्राम के खौफनाक और दुखद पलों की याद दिलाता है। ये वह जगह है जहां सैकड़ो निर्दोष भारतीयों को बिना किसी चेतावनी के गोलियों से भून दिया गया था। ये दिन गुलाम भारत के इतिहास का वह काला अध्याय है, जिसके किस्से आज भी लोगों के रोंगते खड़े कर देते हैं।
 

पंजाब के अमृतसर शहर में जलियांवाला बाग स्थित है, जो स्वर्ण मंदिर से कुछ ही दूरी पर स्थित है। यह एक सार्वजनिक स्थल था, जहां लोग अक्सर इकट्ठा होते थे। उस नरसंहार के बाद से अब तक ये स्थान काफी बदल गया है। लेकिन उस काले दिन के निशान आज भी वहां की दीवारों पर दर्ज हैं। तस्वीरों में देखिए जलियांवाला बाग नरसंहार का सबूत।

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कैसा दिखता है जलियांवाला बाग - फोटो : Adobe
13 अप्रैल का दिन भारत के इतिहास में एक गहरे जख्म की तरह दर्ज है। जलियांवाला बाग का नाम सुनते ही 1919 का वह भयावह मंजर आंखों के सामने आ जाता है, जब सैकड़ों निहत्थे भारतीयों को बेरहमी से गोलियों से भून दिया गया था। यह घटना सिर्फ एक हत्याकांड नहीं थी, बल्कि इसने भारत के स्वतंत्रता संग्राम को नई दिशा दी और पूरे देश को झकझोर कर रख दिया।

अमृतसर में स्थित जलियांवाला बाग, स्वर्ण मंदिर के पास एक सार्वजनिक स्थल था, जहां लोग अक्सर इकट्ठा होते थे। आज यह जगह एक राष्ट्रीय स्मारक के रूप में विकसित हो चुकी है, लेकिन उस दर्दनाक दिन के निशान अब भी इसकी दीवारों पर साफ दिखाई देते हैं, जो इतिहास की सच्चाई बयां करते हैं।

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कैसा दिखता है जलियांवाला बाग - फोटो : Adobe

1919 में ब्रिटिश सरकार ने रॉलेट एक्ट लागू किया था, जिसने भारतीयों के मौलिक अधिकारों को कुचल दिया। इस काले कानून के खिलाफ पूरे देश में विरोध प्रदर्शन हो रहे थे। इसी बीच, बैसाखी के दिन हजारों लोग जलियांवाला बाग में शांतिपूर्ण सभा के लिए एकत्र हुए थे, जिन्हें अंदाजा भी नहीं था कि वे एक भयावह घटना का हिस्सा बनने जा रहे हैं।

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कैसा दिखता है जलियांवाला बाग - फोटो : Adobe

उसी दौरान ब्रिटिश अधिकारी रेजिनाल्ड डायर ने बिना किसी चेतावनी के बाग का मुख्य द्वार बंद करवा दिया और सैनिकों को गोली चलाने का आदेश दे दिया। करीब 10 मिनट में 1650 गोलियां चलाई गईं। इस निर्मम हमले में हजार से अधिक लोग मारे गए और कई हजार घायल हुए। यह घटना मानवता को शर्मसार करने वाली थी।

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Jallianwala Bagh - फोटो : istock

इस हत्याकांड के बाद पूरी दुनिया में इसकी कड़ी निंदा हुई। महात्मा गांधी ने इसके विरोध में असहयोग आंदोलन शुरू किया, जबकि रवींद्रनाथ टैगोर ने अपना नाइटहुड सम्मान लौटा दिया। इस घटना ने भारतीयों के मन में आजादी की ज्वाला को और भड़का दिया, जो अंततः स्वतंत्रता की राह बनी।

आज जलियांवाला बाग एक राष्ट्रीय स्मारक के रूप में खड़ा है, जहां शहीदी कुआं, संग्रहालय और गोलियों के निशान उस दर्दनाक इतिहास की गवाही देते हैं। हर साल हजारों लोग यहां पहुंचकर शहीदों को श्रद्धांजलि देते हैं और उस दिन को याद करते हैं, जिसने भारत के भविष्य को बदल दिया।

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