कैसा दिखता है जलियांवाला बाग
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13 अप्रैल का दिन भारत के इतिहास में एक गहरे जख्म की तरह दर्ज है। जलियांवाला बाग का नाम सुनते ही 1919 का वह भयावह मंजर आंखों के सामने आ जाता है, जब सैकड़ों निहत्थे भारतीयों को बेरहमी से गोलियों से भून दिया गया था। यह घटना सिर्फ एक हत्याकांड नहीं थी, बल्कि इसने भारत के स्वतंत्रता संग्राम को नई दिशा दी और पूरे देश को झकझोर कर रख दिया।
अमृतसर में स्थित जलियांवाला बाग, स्वर्ण मंदिर के पास एक सार्वजनिक स्थल था, जहां लोग अक्सर इकट्ठा होते थे। आज यह जगह एक राष्ट्रीय स्मारक के रूप में विकसित हो चुकी है, लेकिन उस दर्दनाक दिन के निशान अब भी इसकी दीवारों पर साफ दिखाई देते हैं, जो इतिहास की सच्चाई बयां करते हैं।