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International Dance Day 2020: आखिर कौन थे वो प्रसिद्ध डांसर जिनकी याद में मनाया जाता है नृत्य दिवस

Wed, 29 Apr 2020 04:38 AM IST
अपराजिता शुक्ला लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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नृत्य एक ऐसा माध्यम है जिसकी मदद से लोग अपनी भावनाओं को व्यक्त करते हैं। दुनिया के इस खास अंदाज को एक खास दिन के माध्यम से मनाने का फैसला यूनेस्को ने 29 अप्रैल 1982 को किया गया था। डांस के रिफार्मर महान नर्तक जीन जार्ज नावेरे के जन्म की याद में इस दिन को अन्तर्राष्ट्रीय नृत्य दिवस के रूप में मनाया जाता है। अन्तर्राष्ट्रीय नृत्य दिवस की शुरूआत करने का कारण लोगों को इसकी खासियत बताने के लिए किया गया था। क्योंकि बहुत से लोगों को नृत्य में रूचि नहीं होती थी। जीन जार्ज चाहते थे कि नृत्य को बच्चों के शिक्षा में एक आवश्यक अंग के रूप में शामिल किया जाए।


 
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- फोटो : social media
जार्ज एक फ्रेंच डांसर थे जो बैले में पारंगत थे। उन्होंने अपनी किताब में डांस की कई सारी बारीकियों के बारे में लिखा था। इसके अलावा उन्होंने एक किताब और लिखी थी जिसका नाम था लेट्स मीट द बैले। भले ही दुनिया में डांस को मान्यता नहीं मिली थी लेकिन भारत में डांस की बहुत सारी विधाएं प्राचीन काल से प्रचलित हैं। यहां तक कि भगवान शिव ने तांडव किया था जो कि नृत्य की एक विधा बन गई।


 
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भारत के कोने-कोने में बहुत सारे लोकनृत्य प्रचलित हैं। जिसमें भरतनाट्यम, कुचिपुड़ी, मोहिनीअट्टम, कत्थक, कथकली, बिहू, छाऊ जैसे कुछ लोकप्रिय नृत्य विधाएं हैं। इन नृत्य को प्रचलित करने का श्रेय कुछ लोकप्रिय नृत्यांगनाओं को है जिन्होंने इसे दुनियाभर में मशहूर करने में खासा योगदान दिया।


 

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भारत के कुछ मशहूर नर्तकों ने पूरी दुनिया में अपनी कला से लोगों को आकर्षित किया है। नृत्य एक ऐसा माध्यम है जो संसार को एकता का पाठ पढ़ाता है। भारत के कई सारे नृत्य के साधक हैं जिन्होंने पूरी दुनिया में इसे मशहूर किया जिनमें कथक के पंडित बिरजू महाराज, ओडिशी के गुरू केलुचरण महापात्रा, कुचिपुड़ी और भरतनाट्यम के लिए मल्लिका साराभाई शामिल हैं। 

 
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भले ही इन सारे नर्तकों ने दुनियाभर में अपना नाम कमाया हो और नृत्य की विधाओं को एक अलग पहचान दिलाई हो। लेकिन दुनिय़ा के बहुत से कोने में आज भी डांस को अच्छे नजरिए से नहीं देखा जाता है। यहां तक कि भारत में भी लोग इसे एक पेशे के रूप में अपनाने से झिझकते हैं।
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