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रोज-रोज हो रही है एसिडिटी? ये 3 आदतें बदलते ही पेट की परेशानी हो सकती है कम

Tue, 08 Sep 2026 06:01 PM IST
शिवानी अवस्थी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Acidity problem: एसिडिटी की समस्या को केवल कभी-कभार बाहर का खाना खाने से जोड़कर नहीं देखा जा सकता। हमारी रोजमर्रा की आदतें भी इसके लिए जिम्मेदार हो सकती हैं।
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एसिडिटी से छुटकारा पाने के टिप्स - फोटो : Ai
Gut Health: आजकल पाचन से जुड़ी समस्याएं बहुत आम हो गई हैं। गैस, बदहजमी, पेट में भारीपन और सीने में जलन जैसी परेशानियां कई लोगों को बार-बार होती हैं। भारत में हुए अलग-अलग अध्ययनों में गैस्ट्रोईसोफेगल रिफ्लक्स डिजीज यानी जीईआरडी की समस्या 5 से 28.5 प्रतिशत लोगों में पाई गई है। इसका औसत अनुमान करीब 15.6 प्रतिशत है।

एसिडिटी की समस्या को केवल कभी-कभार बाहर का खाना खाने से जोड़कर नहीं देखा जा सकता। हमारी रोजमर्रा की आदतें भी इसके लिए जिम्मेदार हो सकती हैं। देर से खाना, खाने के बीच बहुत लंबा अंतर रखना, रात में भारी खाना, तनाव, लंबे समय तक बैठे रहना और शारीरिक गतिविधि की कमी जैसी आदतें पाचन को प्रभावित कर सकती हैं।

डॉ. विनय पुरोहित के अनुसार, एसिड रिफ्लक्स की समस्या के पीछे अक्सर सिर्फ एक कारण नहीं होता। खान-पान, तनाव, नींद और पूरी दिनचर्या मिलकर इसके लक्षणों को बढ़ा सकते हैं। अच्छी जीवनशैली और संतुलित खान-पान से पाचन तंत्र को बेहतर रखने में मदद मिल सकती है।
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Diet, Foods, Eating - फोटो : istock
क्या और कैसे खाते हैं, इस पर ध्यान दें
 
एसिडिटी की समस्या का संबंध आपकी खाने की आदतों से काफी हद तक हो सकता है। लंबे समय तक भूखे रहने के बाद अचानक बहुत ज्यादा खाना या जल्दी-जल्दी खाना परेशानी बढ़ा सकता है।
 
कई लोग सुबह का नाश्ता छोड़ देते हैं, दोपहर का खाना देर से खाते हैं और रात में देर से भारी भोजन करते हैं। ऐसी दिनचर्या पाचन के लिए परेशानी पैदा कर सकती है।
 
बहुत ज्यादा मसालेदार, तला हुआ और तेल वाला खाना, ज्यादा प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ और कम फाइबर वाला भोजन भी कुछ लोगों में एसिडिटी के लक्षण बढ़ा सकता है।
 
इसलिए कोशिश करें कि खाना समय पर खाएं, भोजन की मात्रा संतुलित रखें और धीरे-धीरे खाना खाएं। रोजाना खाने का समय लगभग एक जैसा रखने से भी दिनचर्या को व्यवस्थित करने में मदद मिल सकती है।
 
मुंबई के जनरल फिजिशियन डॉ. तुषार गोसावी के अनुसार, जब खाने का समय और भोजन की गुणवत्ता नियमित रहती है तो शरीर को भोजन पचाने में आसानी होती है। लगातार अनियमित तरीके से खाने पर कुछ लोगों का पाचन तंत्र ज्यादा संवेदनशील हो सकता है।
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पौष्टिक खानपान - फोटो : Adobe
अपनी रोज की दिनचर्या सुधारें 

सिर्फ खान-पान पर ध्यान देना ही काफी नहीं है। हमारी पूरी जीवनशैली का असर पाचन पर पड़ सकता है।

आजकल लोग घंटों बैठकर काम करते हैं। इसके अलावा तनाव, देर रात तक जागना, देर से खाना और ज्यादा कैफीन या तंबाकू का सेवन भी कई लोगों की दिनचर्या का हिस्सा बन गया है। ये आदतें एसिडिटी और एसिड रिफ्लक्स के लक्षणों को बढ़ा सकती हैं।

इसलिए दिनभर लगातार बैठे रहने के बजाय बीच-बीच में छोटे ब्रेक लें। थोड़ी देर चलें और अपनी शारीरिक गतिविधि बढ़ाएं। पर्याप्त नींद लेने की कोशिश करें और तनाव को कम करने के लिए आराम या हल्की गतिविधियों को दिनचर्या में शामिल करें।

रात में बहुत देर से खाना खाने से बचना भी फायदेमंद हो सकता है, खासकर अगर खाने के बाद आपको सीने में जलन या खट्टी डकार की समस्या होती है।

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acidity - फोटो : AI
परेशानी होने पर सही तरीके से राहत पाएं
 
व्यस्त जीवन में हर बार पेट की परेशानी होने पर काम रोकना संभव नहीं होता। ऑफिस, यात्रा या किसी जरूरी काम के दौरान एसिडिटी, गैस या सीने में जलन होने पर व्यक्ति तुरंत राहत चाहता है।
 
लेकिन केवल लक्षण कम होने का मतलब यह नहीं है कि पाचन तंत्र तुरंत पूरी तरह सामान्य हो गया है। कई बार जलन कम होने के बाद भी कुछ समय तक पेट भारी या असहज महसूस हो सकता है।
 
ऐसे में अपने लिए सही और सुरक्षित उपाय चुनना जरूरी है। अगर आपको बार-बार एसिडिटी या एसिड रिफ्लक्स होता है तो बिना सलाह के लगातार दवाएं लेने के बजाय डॉक्टर से बात करें। खासकर अगर परेशानी लंबे समय से बनी हुई है या बार-बार लौटती है।
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Stomach Pain, Digestion, acidity - फोटो : istock
छोटी आदतों से बड़ा फर्क
 
एसिडिटी को संभालने के लिए अपनी रोजमर्रा की आदतों पर ध्यान देना जरूरी है। समय पर और संतुलित भोजन करना, बहुत ज्यादा तला-मसालेदार खाना कम करना, पर्याप्त नींद लेना, तनाव कम करना और दिनभर सक्रिय रहना पाचन के लिए फायदेमंद हो सकता है।
 
हर व्यक्ति में एसिडिटी के कारण और ट्रिगर अलग हो सकते हैं। इसलिए यह समझना जरूरी है कि किन खाद्य पदार्थों या आदतों के बाद आपकी परेशानी बढ़ती है।
 
अगर सीने में जलन, खट्टी डकार, पेट दर्द या बदहजमी बार-बार होती है, बहुत ज्यादा बढ़ रही है या घरेलू उपायों से ठीक नहीं हो रही है, तो डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है। लगातार होने वाली समस्या को नजरअंदाज करने के बजाय समय पर सही कारण पता करना ज्यादा जरूरी है।
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